Jeetendra
मेरी बेटी 17 साल की थी, जब उसने अपनी कंपनी खोली। जिस उम्र में बच्चे शौक-मौज करते हैं, उस उम्र में मेरी बेटी काम करने लगी थी। अगर वह चाहती, तो कुछ न करती, लेकिन उसने अपने लिए अलग राह चुनी। एड फिल्ममेकर कैलाश सुंदरनाथ से उसने बारीकियां सीखीं और फिर बिना किसी बड़ी मदद के अपना मुकाम बनाया। मुझे याद है, उस समय मैं बहुत काम नहीं कर रहा था, तो मेरे पास जो भी पैसा था, वह मैंने एकता को उसकी कंपनी खोलने के लिए दे दिया। उस समय दूरदर्शन पर शोज आते थे। तब ऐसा था कि आपको बेहतरीन कंटेट बनाकर उसे बेचना है और आपके पास कुछ सेंकड होते थे, उसे बेचने के लिए। आपको एड मिले- न मिले यह भी था।