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फैज की नज्म को लेकर हो रहे विवाद पर बोलकर ट्रोल हुए जावेद अख्तर, यूजर्स बोले- कोई तकलीफ है आपको?

Thu, 02 Jan 2020 06:49 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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जावेद अख्तर - फोटो : Twitter
मशहूर शायर फैज अहमद फै (Faiz Ahmad Faiz) की नज्म 'हम देखेंगे (Hum Dekhenge) लाजिम है कि हम भी देखेंगे' को लेकर विवाद जारी है। फैज की इस नज्म को हिंदू विरोधी कहा जाता रहा है। इस पर आईआईटी कानपुर में एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की गई है, जो इस बात की जांच कर रही है कि नज्म राष्ट्र विरोधी है या नहीं। इस बीच मामले में गीतकार जावेद अख्तर का बयान आया।
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जावेद अख्तर - फोटो : ANI
जावेद अख्तर ने कहा कि फैज अहमद फैज को 'हिंदू विरोधी' कहना इतना बेतुका और मजाकिया है कि इसके बारे में गंभीरता से बात करना मुश्किल है। अख्तर ने कहा कि फैज ने अपना आधा जीवन पाकिस्तान के बाहर गुजारा, उन्हें वहां पाकिस्तानी विरोधी कहा गया। 'हम देखेंग' नज्म उन्होंने जियाउल हक की सांप्रदायिक, प्रतिगामी और कट्टरपंथी सरकार के खिलाफ लिखा था।
 
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जावेद अख्तर - फोटो : social media
जावेद अपने इस बयान के बाद ट्रोल हो रहे हैं। एक यूजर ने जावेद अख्तर को टैग करते हुए लिखा- क्या तकलीफ है आपको। एक अन्य यूजर ने लिखा- ऐसे लोगों से क्यों राय ली जाती है? तुम जैसे इंसान के लिए पाकिस्तान जैसी जगह बनी है। हालांकि जावेद अख्तर ने कुछ गलत नहीं कहा है लेकिन यूजर्स को उनका ये कमेंट भी पसंद नहीं आ रहा है।

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आईआईटी कानपुर - फोटो : Twitter
गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करने वाले जामिया विश्वविद्यालय के छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ आईआईटी कानपुर में 17 दिसंबर को हुए प्रदर्शन में पाकिस्तानी शायर फैज अहमद की नज्म ‘हम देखेंगे, लाजिम है हम भी देखेंगे...’ गाई थी, जिसको लेकर कई प्रोफेसरों ने शिकायत की थी कि यह नज्म हिंदू और राष्ट्र विरोधी है।
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आईआईटी कानपुर
वहीं, अब इस पर आईआईटी कानपुर में एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की गई है, जो इस बात की जांच कर रही है कि नज्म राष्ट्र विरोधी है या नहीं। कमेटी 15 दिन के भीतर रिपोर्ट आईआईटी निदेशक को देगी। सीएए के विरोध में जामिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रदर्शन किया था। आईआईटी कानपुर के छात्रों ने भी प्रदर्शन करने की अनुमति आईआईटी प्रशासन से मांगी थी। शहर में धारा-144 लागू होने की वजह से आईआईटी प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद छात्रों ने 17 दिसंबर को शांति मार्च निकाला था। आरोप है कि सभा के दौरान छात्रों ने राष्ट्र और हिंदू विरोधी भाषणबाजी की। साथ ही पाकिस्तानी शायर फैज अहमद की नज्म गाई। कुछ छात्रों ने इसका विरोध भी किया था। इससे छात्रों के बीच तनाव हो गया था। 
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