जान्हवी कपूर
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जीवन के निर्णायक और भावनात्मक क्षणों में हम अक्सर उन्हें अपने आसपास महसूस करते हैं, जिन्हें हम सबसे ज्यादा चाहते हैं। आप अपनी मम्मी श्रीदेवी की लाडली रही हैं, तो कभी उनकी पारलौकिक उपस्थिति महसूस की, अपने आसपास? ‘वह तो हर वक्त महसूस होता है। हमेशा दिमाग में चलता रहता है कि इस वक्त वह होतीं तो क्या बोलतीं। इस मौके पर वह होतीं तो क्या करतीं, या किस बात पर खुश होतीं, किस बात पर नाराज़ होतीं। जीवन के हर पहलू में, हर बड़ी चीज के बाद, हर शूट के दिन, हर छुट्टी के दिन, वह आसपास ही महसूस होती हैं और जाहिर है ये कभी बदलने वाला नहीं।’ जान्हवी बिना कहीं विराम लिए पूरी बात एक सांस में बोल देती हैं।