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EXCLUSIVE: जान्हवी कपूर का खुलासा, हमारी जो रिलेशनशिप है वह फिल्मों से गुजर कर कहीं ज्यादा है!

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शरन शर्मा के साथ जान्हवी कपूर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
डबल रोल किसी कलाकार के करियर का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट होता है। किसी फिल्म में डबल रोल मंजे हुए सितारे अपने करियर के शीर्ष पर आकर करते हैं, लेकिन श्रीदेवी की बेटी जान्हवी कपूर ने ये खतरा अपने करियर की तीसरी फीचर फिल्म में ही उठा लिया है। पिछले शनिवार को ही 24 साल की हुईं जान्हवी की ये फिल्म इस शुक्रवार को रिलीज हो रही है। ‘अमर उजाला’ के साथ एक खास बातचीत में जान्हवी ने अपनी इस फिल्म, अपनी मां श्रीदेवी के खुद पर असर और अपने साथी निर्देशकों के बारे में अपने विचार साझा किए।
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श्रीदेवी-जान्हवी कपूर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

शुरूआत फिल्म ‘रूही’ से करते हैं। जान्हवी की मां श्रीदेवी ने भी फिल्म ‘चालबाज’ में डबल रोल किए थे। ‘रूही’ में जान्हवी के क्या किरदार है? वह बताती हैं, ‘रूही एक सहमी हुई और डरी हुई लड़की है जिसके अंदर भूतनी आ जाती है। भूतनी के आने के बाद वह बदल जाती है। बीच बीच में जो भी भूतनी उसके शरीर में रहकर कर रही है वह रूही को भुगतना होता है। वहीं, अफजा उसके ठीक उलट है। वह एकदम बिंदास है और वह किसी से डरी हुई नहीं है। वह तो दूसरों को डराती है। ये रुही और अफजा की कहानी है। दो शरीर और एक आत्मा की कहानी।‘

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जान्हवी कपूर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हॉरर थ्रिलर युवाओं का इन दिनों सबसे पसंदीदा सिनेमा है, लेकिन क्या जान्हवी को रूहानी ताकतों में विश्वास रहा है? वह तपाक से हां कहती है। जान्हवी कहती हैं, ‘लोग तो मजाक में मुझे भी आत्मा ही बोलते हैं। कहते हैं कि मैं रूहों की तरह ही बर्ताव करती हूं। मेरा कुछ तय नहीं रहता। कभी कुछ बोलती हूं तो कभी कुछ। कभी कुछ चाहती हूं तो कभी कुछ। मेरा ये मूड स्विंग लोगों को इस तरह की बातें बोलने का मौका देता है। लेकिन हां, मुझे रूहानी ताकतों में यकीन रहा है।’

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जान्हवी कपूर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जीवन के निर्णायक और भावनात्मक क्षणों में हम अक्सर उन्हें अपने आसपास महसूस करते हैं, जिन्हें हम सबसे ज्यादा चाहते हैं। आप अपनी मम्मी श्रीदेवी की लाडली रही हैं, तो कभी उनकी पारलौकिक उपस्थिति महसूस की, अपने आसपास? ‘वह तो हर वक्त महसूस होता है। हमेशा दिमाग में चलता रहता है कि इस वक्त वह होतीं तो क्या बोलतीं। इस मौके पर वह होतीं तो क्या करतीं, या किस बात पर खुश होतीं, किस बात पर नाराज़ होतीं। जीवन के हर पहलू में, हर बड़ी चीज के बाद, हर शूट के दिन, हर छुट्टी के दिन, वह आसपास ही महसूस होती हैं और जाहिर है ये कभी बदलने वाला नहीं।’ जान्हवी बिना कहीं विराम लिए पूरी बात एक सांस में बोल देती हैं।
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जान्हवी कपूर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपने निर्देशकों को जान्हवी कैसे याद करना चाहेंगी? कैसे निर्देशक उनको पसंद आते हैं? जान्हवी कहती हैं, ‘मुझे तो हर उस निर्देशक के साथ काम करना पसंद है जो मुझसे सबसे अच्छा काम निकाले। ‘धड़क’ में शशांक के साथ काम करना अलग ही अनुभव रहा। हम उसे पापा खेतान बुलाते थे। वह मेरी गाइडेंस फोर्स हैं। ‘घोस्ट स्टोरीज’ में जोया के साथ भी मेरा वैसा ही रिश्ता बना। कभी भी मुझे कुछ पूछना हो समझना हो तो मैं सीधे उनके पास चली जाती हूं फोन करके। ‘गुंजन सक्सेना’ का निर्देशक शरन तो मेरा बेस्ट फ्रेंड है। हमारी जो रिलेशनशिप है वह फिल्मों से गुजर कर कहीं ज्यादा है। हम बहुत एक दूसरी की जिंदगी में बहुत ज्यादा शामिल हैं। ‘रूही’ के निर्देशक हार्दिक की ऊर्जा मुझे बहुत सही लगी। नेशनल अवार्ड विनर डायरेक्टर होने के बावजूद उनका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत ही अतरंगी है।
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