शेरनी
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ये पूछने पर कि ‘शकुंतला देवी’, ‘शेरनी’, ‘तुम्हारी सुलू’ या ‘बेगम जान’ जैसी फिल्मों करते समय किसी भी कलाकार की जिम्मेदारी बढ़ती है। विद्या बालन कहती हैं, ‘मैं खास कोशिश नहीं कर रही हूं इसके लिए हां पर इस तरह की फिल्में जब चलती हैं तो इस तरह की और फिल्में बनेंगी और सभी को फायदा होगा। आज मैं इकलौती अभिनेत्री नहीं हूं जो महिला प्रधान फिल्में कर रही है। और सभी की फिल्में चल भी रही हैं। कुछ नहीं चलतीं, कुछ चलती हैं। पर मेरे ख्याल से जैसे मैं मानती हूं कि सिनेमा समाज का आइना होता है तो समाज में ये बदलाव हो रहा है। समाज पुरुष प्रधान से हटकर मैं महिला प्रधान समाज तो नहीं कहूंगी लेकिन पुरुष प्रधान समाज से हटकर समाज ऐसी तरफ बढ़ रहा है जहां महिला और पुरुष बराबर हैं। सतुलन बना रहेगा। इस वजह से हमारी कहानियां भी उभरकर आने लगीं।‘