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Jaideep Ahlawat Interview: 'प्यासा' और 'देवदास' ने सिखाया सिनेमा, पापा ने यही कहा, जो मन को भाये वही काम करो

Sat, 26 Nov 2022 04:41 PM IST
शशि सिंह अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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एन एक्शन हीरो में जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
'पाताल लोक' से जयदीप अहलावत को ऐसी लोकप्रियता मिली कि आयुष्मान खुराना को 'एन एक्शन हीरो' के लिए जयदीप अहलावत के डेट्स के हिसाब से अपनी तारीखें बदलनी पड़ीं। इस बात का जिक्र करने पर जयदीप अहलावत सिर्फ मुस्कराकर रह जाते हैं। जयदीप अहलावत को ओटीटी से पहले सिनेमा ने ही बांहें पसारकर अपनाया। कुछ अच्छे किरदार भी उन्होंने किया लेकिन असल पहचान उन्हें ‘पाताललोक’ ने ही दिलाई। फिल्म 'एन एक्शन हीरो' में आयुष्मान खुराना और जयदीप अहलावत के बीच सीधा मुकाबला है। और, इस मुकाबले पर ही फिल्म का असली आकर्षण टिका हुआ है। उनसे एक संक्षिप्त मुलाकात..
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आयुष्मान खुराना, जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ के ट्रेलर में आयुष्मान खुराना के साथ आपके जबरदस्त एक्शन सीन हैं। इनके किस तरह की तैयारियां करनी पड़ीं?
फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ के एक्शन सीन्स के लिए ज्यादा बॉडी डबल की जरूरत नहीं पड़ी। मुझे लगता है कि आयुष्मान को भी बॉडी डबल की जरुरत नहीं पड़ी, शूटिंग पर जाने से पहले एक्शन सीन की पूरी तैयारी के साथ जाते हैं। एक्शन टीम में मुंबई और इटली के भी लोग थे। फिल्म में बहुत सारे एक्शन सीन है तो बहुत अच्छे तरीके से डिजाइन किया गया है। बहुत सारे गाड़ियों के रनिग शॉट है तो बहुत सेफ्टी का ध्यान रखा गया था। जब भी किसी एक्शन सीन की शूटिंग करनी होती थी तो, उसकी दो दिन पहले हम लोग ठीक से रिहर्सल करते थे, ऐसा नहीं था कि सेट पर पहुंचते ही हम लोग शूटिंग शुरू कर देते थे। रिहर्सल करने के बाद शूटिंग आसान हो जाता था।
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जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
एक्शन में आप अपना रोल मॉडल किसे मानते हैं?
अगर हम बॉलीवुड की बात करें तो यहां पहले दारा सिंह थे, धर्मेंद्र जी हैं, आज भी उनको एक्शन हीरो ही माना जाता है, सनी देयोल एक्शन के बहुत बडे स्टार हुए, सुनील शेट्टी, अक्षय कुमार अपने अपने समय में एक्शन करते रहे। आज के दौर में टाइगर श्रॉफ और विद्युत जामवाल बहुत कमाल का एक्शन करते हैं मैंने टाइगर श्रॉफ के साथ 'बागी'  और विद्युत जामवाल के साथ 'कमांडो' में काम किया है। आज बहुत सारी टेक्नॉलजी आ गई है। एक्शन में कई तरह के नए नए प्रयोग हो रहे हैं।

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पाताल लोक - फोटो : सोशल मीडिया
'पाताल लोक' में ऐसा क्या कर दिया आपने कि वह किरदार आप की बाकी फिल्मों के किरदार पर भारी पड़ गया?
‘पाताल लोक’ की कहानी बहुत प्यारी थी और बहुत ही खूबसूरती से लिखी गई थी, जब आप पूरी ईमानदारी के साथ काम करते हैं तो, बात दर्शकों तक पहुंचती है। ‘पाताल लोक’ में हाथीराम चौधरी  का मेरा किरदार ही ऐसा था कि लोगों ने खुद से रिलेट किया। उसमें पिता-पुत्र का जो संबंध दिखाया गया, उसे हर मध्यमवर्गीय परिवार ने खुद से जुड़ा हुआ महसूस किया। हम सभी अपने पिता को लेकर बहुत सजग रहते हैं। आज के 15 साल के बच्चों को तो लगता है कि उन्हे सब कुछ पता है, पापा तो बस पगला गए हैं। हम सब उस दौर से गुजरे हैं। हाथीराम जब अपने बेटे के लिए बाहर निकलता है तो आप उसे हीरो के रूप में भी देखते हैं।
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एन एक्शन हीरो में जयदीप अहलावत और आयुष्मान खुराना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जब आप 15 साल के थे, उस समय सिनेमा का कैसा प्रभाव था आपके ऊपर, किस तरह की फिल्में आप देखते थे, कब लगा आपको अभिनय में आना है?
जब हम सब 90 के दशक में बडे हो रहे थे तब उस समय सिनेमा का प्रभाव हम सब पर होता है। उस समय जो भी फिल्में आती थी सब देखते थे। सिनेमा ही दुनिया को जानने का एक तरीका था, उस समय अखबार में हफ्ते में एक दिन फिल्मों के बारे में लेख आता था। वही पढकर फिल्मी दुनिया के बारे में जानते थे। उस समय कभी सोचा नहीं था कि अभिनय के फील्ड में आना है। ग्रेजुएशन के बाद आर्मी में जाने की सोच रहा था।
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एन एक्शन हीरो कास्ट क्रू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, इसमें आपके पिता का कितना प्रभाव रहा?
सिनेमा का प्रभाव सिर्फ मनोरंजन से था। मुझे याद है, पापा जब 'प्यासा', 'अनुपमा', 'देवदास' जैसी फिल्मों के वीएचएस कैसेट लाते थे और हम साथ में बैठ कर फिल्में देखते थे। पापा को फिल्में देखने का बहुत शौक था। जब पापा के साथ  'प्यासा', 'अनुपमा', 'देवदास' जैसी फिल्में देखता तो लगता था कि यह नॉर्मल सिनेमा से कुछ अलग चीज है। जब आर्मी में मेरा चयन नहीं हुआ तो मैंने थिएटर करना शुरू किया तब पापा के साथ देखे सिनेमा के मायने समझ में आने लगे।  
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एन एक्शन हीरो में जयदीप अहलावत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पिता के साथ फिल्में देखना और फिर पिता को ये बताना कि मैं फिल्मों में जा रहा हूं, दोनों की कितनी अलग अलग प्रतिक्रिया रही?
उनके लिए भी नया था। जब आप  ग्रेजुएशन कर रहे होते हो तभी, अपने करियर को लेकर प्लान कर लेते हैं। उनको पता था कि मैं आर्मी में जाना वाला हूं,लेकिन जब वहां नहीं हुआ तो वह भी सोच में पड़ गए कि अब मैं क्या करूंगा? मेरे पिताजी की हमेशा से यह अच्छी बात रही है कि कभी उन्होंने मुझे किसी काम को करने से रोका नहीं। मेरे पापा दयानंद अहलावत और मम्मी अब दोनों सेवानिवृत हो चुके हैं। जब पापा को पहली बार बताया कि मुझे एफटीआई जाना है तो कुछ देर तक सोचने के बाद बोले, 'अगर तुम्हारा मन है तो करो।' पापा की ऐसी सोच रही है कि बच्चे जो करना चाहते है, उनको वह करने देना चाहिए।

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जयदीप अहलावत फिल्म खट्टा मीठा - फोटो : सोशल मीडिया
और, पहला ब्रेक आपको प्रियदर्शन की फिल्म 'खट्टा मीठा' में मिला...
नहीं, एफटीआई से निकलने के बाद जब मुंबई आया तो शुरू में एक साल तक कुछ समझ में नहीं आया कि कहां जाएं और किससे मिलें? कास्टिंग डायरेक्टर हनी त्रेहन के यहां एक फिल्म का ऑडिशन दिया। वह फिल्म बनी नहीं। फिर हनी त्रेहन का 'आक्रोश' के ऑडिशन के लिए कॉल आया और यह फिल्म मुझे तीन दिन के अंदर मिल गई, 'आक्रोश' की शूटिंग के दौरान ही प्रियदर्शन साहब ने कह दिया था कि तुम्हारे लायक 'खट्टा मीठा' में रोल है और तुम यह फिल्म कर रहे हो। बस रिलीज पहले 'खट्टा मीठा' हो गई और 'आक्रोश' बाद में।
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जयदीप अहलावत फिल्म राजी में - फोटो : social media
हाथीराम चौधरी के अलावा और ऐसे कौन से किरदार हैं जो आप के दिल के बेहद करीब हैं?
मेघना गुलजार की फिल्म  'राजी' का किरदार बहुत बढ़िया किरदार था जिसे बहुत ही खूबसूरती से लिखा भी गया था। उस फिल्म की शूटिंग के दौरान काफी कुछ सीखने को मिला और एक अभिनेता के तौर पर यह समझ में आया कि एक सिनेमा प्रति आपकी कैसी अप्रोच होनी चाहिए। जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो मेरी पहली दो फिल्में 'आक्रोश' और 'खट्टा मीठा' प्रियदर्शन की, अनुराग कश्यप की 'गैंग्स ऑफ वासेपुर', कमल हासन की 'विश्वरूपम', इम्तियाज अली की 'रॉकस्टार', मेघना गुलजार की 'राजी', विपुल शाह की 'कमांडो' ये सब ऐसी फिल्में हैं जिनमें इंडस्ट्री के बड़े निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिला। किसी फिल्म में अगर दो सीन में भी हूं तो वह भी निकल के बाहर आता था। सबके अपने काम करने के अलग अलग तरीके हैं। किसी को कम ज्यादा नहीं आंक सकते।
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