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गजलें ही नहीं चुटकुले भी खूब सुनाते थे जगजीत सिंह, 'हमारा हाल देखा क्या हो गया है...'

Thu, 10 Oct 2019 11:44 AM IST
भावना शर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Jagjit Singh
मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह के गाए भजन, गीत और गजलें आज भी उनके चाहने वालों की सुबह, दोपहर और शामें रोशन करती रहती हैं। अपने लाइव कार्यक्रमों के दौरान जगजीत सिंह चुटकुले भी खूब सुनाते थे। उनकी कुछ परफॉरमेंसज से चुने गए कुछ चुटकुले हम संकलित कर लाए हैं खास आपके लिए, उनकी पुण्यतिथि पर।
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Jagjit Singh
जगजीत सिंह सुनाते हैं, ‘पेड़ पर एक तोता मैना बेठे प्यार कर रहे थे  तो तोता मैना को जब बीवी ने देखा तो वह बोली देखो जब हम पांच साल पहले आए थे, तब भी यह तोता मैना यहीं बैठे थे। आज तक कितना प्यार है इनमें। और हमारा हाल देखो क्या हो गया है। पति बोला ज़रा ध्यान से देखो। तोता वही है मैना दूसरी है।‘ 
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jagjit singh
एक और लतीफा जो अक्सर जगजीत सिंह सुनाया करते थे, वह यूं है, ‘एक बीवी गई मायके, पति घर पर अकेला था। उसने दीवार पर बीवी की फोटो लगाई और उस पर चाकू फेंक रहा है उसपर। लेकिन चाकू निशाने पर नहीं लग रहा, मिस हो रहा है। कभी इधर कभी उधर। इतने में बीवी का फोन आया। बोली, डार्लिंग क्या कर रहे हो। पति बोला, कुछ नहीं डार्लिंग तुम्हें मिस कर रहा हूं।’

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Jagjit Singh
ये है अगला चुटकुला जो जगजीत सिंह का बहुत फेवरिट रहा है, ‘पति पत्नी ड्रॉइंग रूम में बैठे थे। इतने में टेलीफोन की घंटी बजी। पति बोला मेरा हो तो बोलना मैं घर पर नहीं हूं। पत्नी ने फोन उठाया बोला। फिर धीरे से बोली, हैलो, वो घर पर हैं और फोन रख दिया। पति कहता है कि तुम्हें कहा था  ना, मेरा हो तो कहना मैं घर पर नहीं हूं। पत्नी बोली आपको फोन नहीं था, मेरा फोन था।’ 
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jagjit singh
जगजीत सिंह की लाइव परफॉरमेंसेज में उनसे कैफ़ भोपाली की ग़ज़ल, ‘तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है’ की बहुत फरमाइशें होती थीं। इस गज़ल को वह सुनाते भी बड़े मजे लेकर थे। जैसे ही मिसरा आता था, आग का क्या है पल दो पल में लगती है। जगजीत सिंह साजिंदों को रफ्तार कम करने का इशारा करते और बोलते, ये इश्क़ की आग है। प्रेम की अग्नि। love at first sight, उसके बाद sight ढूंढते रहो। फिर अगली लाइन सुनाते, बुझते बुझते एक ज़माना लगता है। फिर रुकते और बोलते, सबसे पहले तो चश्मा लगता है, फिर दांत लगते हैं, फिर बाल भी लगते हैं, और कभी तो घुटने भी लगते हैं। 
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Jagjit Singh
निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन , बहुत बे-आबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले। ये शेर पढ़ते पढ़ते जगजीत सिंह पहले तो बताते कि ये मिर्ज़ा ग़ालिब की ग़ज़ल का मिसरा है। फिर बताते हैं कि इस मिसरे में पूरे आदम जात की कहानी है। ख़ुल्द कहते हैं जन्नत को और आदम यानी एडम। उनको यानी एडम और ईव को जन्नत से निकाल दिया था क्योंकि उन्होने एपल खाया था। और, डॉक्टर यहां कहता है कि रोज एक एपल खाया करो।
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