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Rocket Boys: क्या सच में काल्पनिक है 'रॉकेट ब्वॉयज' के रजा मेहदी का किरदार?

Tue, 22 Feb 2022 04:17 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Rocket Boys - फोटो : SonyLIV
सोनी लिव पर रिलीज हुई सीरीज 'रॉकेट ब्वॉयज' को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है। यह देश के दो महान वैज्ञानिकों की कहानी है, जो हर वक्त देश के लिए सोचते हैं। और ये दो वैज्ञानिक थे, विक्रम सारा भाई  और  डॉ. होमी जहांगीर भाभा। सीरीज के हर एक कलाकार ने अपने किरदार में जान डाल दी है। सीरीज के एक-एक सीन पर जबरदस्त मेहनत की गई है। सीरीज की शुरुआत में ही एक किरदार आता है और आखिरी तक बना रहता है वो है होमी भाभा के प्रतिद्वंद्वी रजा मेहदी का किरदार। इस किरदार को निभाया है दिव्येंदु भट्टाचार्य ने।

क्या हिंदू मुस्लिम एंगल देने के लिए गढ़ा गया किरदार?
इस सीरीज में रजा मेहदी के किरदार को लेकर विवाद है क्योंकि, सच में देश में इस नाम का कोई वैज्ञानिक हुआ ही नहीं है।  आरोप है कि 'रॉकेट ब्वॉयज' इस किरदार के जरिए जबरदस्ती हिंदू मुस्लिम एंगल देने की कोशिश की गई है। सीरीज के अनुसार, रजा एक शिया मुसलमान है जिसने कभी मुस्लिम लीग का समर्थन किया था। उसके मां-बाप के साथ धर्म के नाम पर अत्याचार हुआ था। हालांकि इसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है, यहां आप जिस रजा मेहदी की चर्चा देखते और सुनते हैं वो किरदार असल में वैज्ञानिक मेघनाद साहा से मिलता जुलता है। हालांकि वे मुस्लिम नहीं बल्कि हिंदू थे।
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मेघनाद साहा और सीरीज का पोस्टर - फोटो : SonyLIV
कौन थे मेघनाद साहा 
मेघनाद साहा देश के महान वैज्ञैनिक और भौतिक विज्ञानी थे। उन्होंने साइक्लोट्रॉन का निर्माण किया था। उन्होंने ही साहा समीकरण दिया था जो काफी प्रसिद्ध है। यह समीकरण तारों में भौतिक एवं रासायनिक स्थिति की व्याख्या करता है। मेघनाद साहा की एक खोज आयोनाइजेशन फार्मूला है। यह फार्मूला खगोलशास्त्रियों को सूर्य और अन्य तारों के आंतरिक तापमान और दबाव की जानकारी देता है। उन्होंने 1950 में कलकत्ता में इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स की स्थापना की थी। साहा कलकत्ता के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ साइंस में प्रवक्ता भी रहे। साहा न्यूक्लियर पावर के सकारात्मक इस्तेमाल के पक्षधर थे।
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Rocket Boys - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
साहा और भाभा में थे मतभेद
आजादी से पहले भारत के विकास के बुनियादी पहलुओं को लेकर भाभा और साहा में मतभेद रहे। इसी को लेकर शायद निर्माताओं ने और निर्देशक अभय पन्नू ने राजा मेहदी का किरदार रचा। एक साक्षात्कार में अभय पन्नू ने इस विवाद पर बोलते हुए कहा कि उन्होंने 'क्रिएटिव लिबर्टी' यानी रचनात्मक स्वतंत्रता ली है। पर क्या इस स्वतंत्रता के अंतर्गत एक ऐसा किरदार रचा जाना चाहिए जो था ही नहीं? ये बड़ा सवाल है। आलोचकों का मानना है कि या तो आप पूरा इतिहास दिखाइए या फिर पूरी कल्पना। अन्यथा दर्शक भ्रमित होता है कि वो किसे सच माने और किसे नहीं? 

 
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rocket boys - फोटो : SonyLIV
दिव्येंदु भट्टाचार्य ने किया है बेहतरीन काम
दिव्येंदु भट्टाचार्य का काम अच्छा है। दिव्येंदु लगातार अपने किरदारों से अपने हर प्रोजेक्ट में प्रभावित कर रहे हैं और इसलिए वह अच्छे निर्देशकों की चाहत भी बन चुके हैं। स्वतंत्र भारत के शिल्पी कहे जाने वाले प्रधानमंत्री पं नेहरू के किरदार को रॉकेट ब्वॉयज में जिस तरह उकेरा गया है, उसे देख कर लगता है कि उन्हें जानबूझकर कमजोर दिखाने की कोशिश है। हालांकि बावजूद इन कमियों के शिद्दत से बनी इस सीरीज से आप आसानी से कनेक्ट हो पाएंगे।
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