21 जून को पूरी दुनिया पिछले कुछ सालों से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाती है। योग इंसानों के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए वाकई एक कारगर उपाय है, इसके जीते जागते उदाहरण हैं इस दुनिया में 123 वर्ष सफलता पूर्वक गुजार चुके हिन्दू संत स्वामी शिवानंद। स्वामी शिवानंद के जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर बने पासपोर्ट से यह साबित होता है कि उनका जन्म 8 अगस्त 1896 में उत्तर प्रदेश के शहर वाराणसी में हुआ है। इतने सालों में वह अपने आसपास और दुनिया की कई बड़ी त्रासदियों को अपनी आंखों से देख चुके हैं। और यह संभव हो सका है उनके हर रोज दो घंटे के योगाभ्यास से।
ए आर रहमान के साथ मिलकर मां तुझे सलाम, वंदे मातरम और जन गण मन जैसे म्यूजिक वीडियो बनाने वाले फिल्ममेकर भारत बाला ने स्वामी शिवानंद पर भी एक फिल्म बनाई है। '123- द हैपिएस्ट मैन' के नाम से बनी इस फिल्म में स्वामी शिवानंद ने अपने पूरे जीवन के यात्रा वृत्तांत को खुद बताया है। स्वामी शिवानंद ने बताया कि उनकी जिंदगी इस दुनिया के इतिहास में अतुल्य रही है। उन्होंने कहा, 'मेरी लंबा जीवन जीने की कोई इच्छा नहीं थी। यह तो भगवान की कृपा से संभव हो सका है कि मैं अब तक जीवित हूं।'
स्वामी शिवानंद जब चार साल के थे, तभी उनकी माता का निधन हो गया था। इसके दो साल बाद ही शिवानंद के सिर से अपने पिता का साया भी उठ गया। उन्होंने बताया कि छह साल की उम्र से ही उन्होंने यह तय कर लिया था कि उन्हें अपनी जिंदगी किस हिसाब से जीनी है। उन्होंने बताया, 'मैं हर दिन दो घंटे योगाभ्यास करता हूं। योग हमें तन और मन दोनों की शांति देता है। लोगों को हर दिन शारीरिक व्यायाम करना चाहिए। इसके लिए सिर्फ चलना जरूरी नहीं है, बल्कि शरीर के बाकी अंगों का भी काम करना बहुत जरूरी है।'
व्यायाम के अलावा स्वामी शिवानंद संतुलित आहार भी लेते हैं जिसमें दाल और सब्जी तो होती ही हैं, कभी-कभी आलू चोखा भी खाते हैं। वह रोटियों की मात्रा दिन में दो और रात में भी सिर्फ दो ही रखते हैं। वह कहते हैं, 'स्वस्थ दिमाग के लिए स्वस्थ शरीर का भी रहना बहुत जरूरी है। जहां शरीर है वहां दिमाग है। यह दोनों एक दूसरे से आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं।' वह योग और साधना ही है जिसने स्वामी शिवानंद को अब तक जीवित रखा है।
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