8 मार्च को महिला दिवस है। इस खास अवसर पर 'अमर उजाला' फिल्म जगत की ऐसी 5 अभिनेत्रियों को याद कर रहा है जिन्होंने अपने बल पर कई फिल्मों को सफलता के शिखर तक पहुंचाया। आइए जानते हैं कि हमारी लिस्ट में कौन सी 5 फिल्में हैं।
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मदर इंडिया (1957)
जब महिला प्रधान फिल्मों की बात होती है तो सबसे पहला नाम आता है नरगिस दत्त की मदर इंडिया का। मदर इंडिया, साल 1957 में रिलीज हुई थी। जब किसी को हिन्दी सिनेमा से परिचित कराया जाता है तो उसे नरगिस की 'मदर इंडिया' देखने की सलाह जरूर दी जाता है। कहा जाता है कि अगर आपने 'मदर इंडिया' नहीं देखी तो हिन्दी फिल्में नहीं देखीं।
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आंधी (1975)
गुलजार द्वारा निर्देशित फिल्म 'आंधी' 1975 में रिलीज हुई थी। यह एक विवादित फिल्म थी। इस पर विवादो की ऐसी आंधी उठी कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर फिल्म के प्रदर्शन पर बैन लगा दिया गया था। कथित रूप से गांधी के जीवन पर आधारित फिल्म की नायिका सुचित्रा सेन का पूरा गेटअप उनसे प्रेरित था। इस फिल्म को क्रिटिक्स ने बहुत सराहा था।
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दामिनी (1993)
1993 में आई राजकुमार संतोषी की फिल्म 'दामिनी' में मीनाक्षी शेषाद्री ने लीड रोल निभाया था। दामिनी एक ऐसी महिला की कहानी थी जो अन्याय के खिलाफ लड़ती है। और इंसाफ के लिए अपने परिवार के भी खिलाफ हो जाती है। इस फिल्म में मीनाक्षी शेषाद्री ने जबरदस्त अभिनय किया था। इसी के लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस नॉमिनेशन मिला था।
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नो वन किल्ड जेसिका (2011)
राजकुमार गुप्ता द्वारा निर्देशित ' नो वन किल्ड जेसिका' फिल्म सनसनीखेज जेसिका लाल हत्याकांड पर आधारित थी। सबरीना और मीरा गैटी की भूमिकाओं में विद्या बालन और रानी मुखर्जी ने जबरजस्त अभिनय किया था। उनसे बेहतरीन शाहद ही दूसरा कोई कलाकार एक्टिंग कर सकता था। इन दोनों ऐक्ट्रेसेस ने बेहतरीन परफॉर्मेंस दी थी। उस साल की यह कामयाब फिल्मों में से थी।
कहानी (2012)
सुजॉय घोष द्वारा निर्देशित फिल्म 'कहानी' में विद्या बालन ने मुख्य रोल निभाया था। इसकी हीरोइन विद्या बालन के ही इर्दगिर्द घूमती है। फिल्म एक महिला के बदले की कहानी है जिसे पर्दे पर विद्या बालन ने जीवंत कर दिया। इस फिल्म के लिए विद्या को फिल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड से सम्मानित किया गया था।