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Rajshri Productions: राजश्री प्रोडक्शंस को इस शख्स ने बनाया संस्कारों की पाठशाला, जानिए 75 साल के गौरवमयी इतिहास के बारे में

Tue, 10 May 2022 10:33 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क
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ताराचंद बड़जात्या - फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में 'राजश्री प्रोडक्शन' का अपना दबदबा है। इस प्रोडक्शन हाउस ने कई शानदार फिल्में बॉलीवुड को दी हैं और यह सिलसिला आज भी जारी है। बता दें कि राजश्री प्रोडक्शंस बॉलीवुड की बड़ी और नामी फिल्म प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी है। 15 अगस्त 1947 में ताराचंद बड़जात्या ने 'राजश्री पिक्चर्स' के रूप में इस कंपनी की नींव रखी थी। इस प्रोडक्शन कंपनी ने बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। इस कंपनी की सबसे सफल फिल्मों में दोस्ती (1964), अंखियों के झरोखे से (1978), नदिया के पार (1982), सारांश (1984), मैंने प्यार किया (1989) हम आपके हैं कौन (1994) और हम साथ साथ हैं (1999) शुमार हैं।
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ताराचंद बड़जात्या - फोटो : सोशल मीडिया
19 साल की उम्र में फिल्मी दुनिया में दस्तक दी
ताराचंद बड़जात्या ने 'राजश्री पिक्चर्स' की नींव रखकर फिल्म प्रोडक्शन हाउस के तौर पर हिंदी सिनेमा का एक ऐसा एम्पायर खड़ा किया, जिसमें पिछले 75 साल से लगातार पारिवारिक और सामाजिक फिल्में आज भी बनाई जा रही हैं। राजश्री उनकी बेटी का नाम है, जो आज भी जयपुर में रहती है। राजस्थान के कुचामन सिटी में 14 मई, 1914 में जन्मे ताराचंद बड़जात्या ने 1933 में फिल्मों में प्रवेश किया, जब वे महज 19 साल के थे। उन्होंने 'मोती महल थियेटर्स' से अपना काम शुरू किया।
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राजश्री प्रोडक्शन - फोटो : सोशल मीडिया
बेटी के नाम पर रखा प्रोडक्शन हाउस का नाम
ताराचंद बड़जात्या ने पहले अपने फिल्म प्रोडक्शन हाउस का नाम अपने बेटों 'राज' और 'कमल' के नामों को मिलाकर राजकमल रखा था, लेकिन तभी वी. शांताराम ने इस नाम से प्रोडक्शन हाउस खोल लिया। तब उन्होंने बेटी राजश्री के नाम पर संस्थान का नाम रखा। इस प्रोडक्शन हाउस में जब भी नई फिल्म बनती तो पहले परिवार के सदस्यों और घर के ड्राइवर तक को दिखाया जाता था। उनसे फिल्म के बारे में राय ली जाती थी। जरूरी होने पर संशोधन के बाद ही फिल्म रिलीज होती थी। परिवार के बच्चे भी इस रायशुमारी में शामिल होते थे। उनकी फिल्में हमेशा ऐसी होती थीं, जिन्हें लोग परिवार के साथ बैठकर देख सकें।

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ताराचंद बड़जात्या - फोटो : सोशल मीडिया
20 शहरों में खोले दफ्तर
ताराचंद बड़जात्या ने चेन्नई, हैदराबाद से अपना करियर शुरू किया और दक्षिण भारत से अनेक फिल्म निर्माताओं को बॉलीवुड में हिंदी फिल्मों की मुख्यधारा में लाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। उन्होंने सबसे पहले फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन का काम शुरू किया और पहली बार इसके उत्तर और दक्षिण भारत में जालंधर से लेकर विशाखापट्टनम तक लगभग 20 प्रमुख शहरों में अपने कार्यालय खोले। उन्होंने अनेक ब्लॉक बस्टर फिल्मों का डिस्ट्रीब्यूशन किया जिनमें 'शोले', 'धर्मवीर', 'अमर-अकबर-एंथनी', 'विक्टोरिया नं. 203', 'रोटी कपड़ा और मकान', 'कुली', 'खिलौना', 'बैजू बावरा', 'आनंद', 'गुड्डी', 'कभी खुशी कभी गम', 'देवदास' और 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' जैसी अपने समय की सुपरहिट फिल्में शामिल हैं।
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फिल्म दोस्ती - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म 'दोस्ती' ने मचाई धूम
ताराचंद बड़जात्या ने बाद में 1960 में 'राजश्री प्रोडक्शन्स' की स्थापना की और हिंदी सिनेमा को एक से एक नायाब फिल्में दीं। उनकी पहली फिल्म 'आरती' ही सुपरहिट साबित हुई। इसके बाद 1964 में आई दूसरी फिल्म 'दोस्ती' ने तो धूम मचा दी। अपने समय की यह ब्लॉक बस्टर फिल्म थी, जिसे 6 फिल्म फेयर पुरस्कार मिले। इसके बाद फिल्मों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। भारत सरकार ने ताराचंद को उस फिल्म समिति का सदस्य भी बनाया, जिसकी अध्यक्ष तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री इंदिरा गांधी होती थीं। 21 सितम्बर, 1992 को मुंबई में उनका निधन हो गया।
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