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परिंदा की कैसेट पर नाम न देख इस लेखक ने छोड़ा था विधु का साथ, पढ़ें अन्ना के क्रिएशन की कहानी

Sun, 03 Nov 2019 02:47 PM IST
anand anand पंकज शुक्ल, मुंबई
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Vidhu Vinod Chopra, Imtiaz Hussain, Nana Patekar - फोटो : amra ujala
विधु विनोद चोपड़ा ने सिनेमा में अपने 30 साल पूरे होने पर कुछ साल पहले एक किताब प्रकाशित की, “30 ईयर्स ऑफ स्ट्राइविंग इन सिनेमा” (सिनेमा में प्रयासों के 30 साल)। इस किताब में विधु के पसंदीदा लेखक रहे अभिजात जोशी फिल्म परिंदा का जिक्र आने पर लिखते हैं कि कैसे विधु ने नाना पाटेकर को एक मराठी नाटक में देखने के बाद इस फिल्म में अन्ना के किरदार के लिए चुना। लेकिन, फिल्म के संवाद लेखक इम्तियाज हुसैन के मुताबिक इस किरदार की परदे के पीछे की कहानी कुछ और ही है।
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Parinda - फोटो : amar ujala mumbai
अमर उजाला से एक्सक्लूसिव बातचीत में इम्तियाज कहते हैं, “हिंदी सिनेमा में अभिनेता हों या निर्देशक, लेखकों के नामों का जिक्र बहुत कम करते हैं। मुझे अन्ना के किरदार की लाइनें तक अब तक याद हैं। ‘ना भाई ना बहन ना बेटा, धंधे के मामले में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसा का बेटा नहीं। करन को चुप रहना होगा या जाना होगा। उसको अपनी बोट पे ले जा, समझा, नहीं समझे तो गोली मार दे।’, ये अन्ना के किरदार का असली खाका है। ये संवाद मुझे 30 साल बाद अब भी याद है तो इसलिए क्योंकि मैंने अन्ना को गढ़ा है, क्रिएट किया है।”
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Nana Patekar - फोटो : amar ujala mumbai
इम्तियाज के मुताबिक इस किरदार का नाम पहले फिल्म में पाट्या था। जो उस समय के एक बड़े डॉन युसूफ पटेल के नाम पर रखा गया। इम्तियाज हुसैन को इस फिल्म में संवाद लेखन के लिए विधु विनोद चोपड़ा के कास्टिंग डायरेक्टर जनक टोपरानी ने उनके एक नाटक के बाद संपर्क किया था। दरअसल विधु ये नाटक देखने के बाद इम्तियाज के बच्चों को फिल्म में करन और किशन के बचपन के रोल देना चाहते थे लेकिन दोनों बच्चों ने थिएटर को तरजीह दी और फिल्म करने से मना कर दी। इस घटना के नौ-दस महीने बाद जनक के बुलावे पर इम्तियाज इस फिल्म का हिस्सा बतौर संवाद लेखक बने।

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Imtiaz Hussain - फोटो : amar ujala mumbai
इम्तियाज बताते हैं, “जब मैं इस फिल्म का हिस्सा बना तो मुझे फिल्म की पटकथा का 16वां ड्राफ्ट मिला था। फिल्म में विलेन का नाम था पाट्या और इसे परेश रावल करने वाले थे। ये रोल नाना के पास कैसे गया इसका भी दिलचस्प किस्सा है। दो भाइयों की इस कहानी में बड़े भाई किशन का रोल सबसे पहले नसीरुद्दीन शाह को करना था। उनको मैंने विधु के घर पर कहानी सुनाई। विधु नहाने जा रहे थे औऱ मुझे बोलकर गए कि इनको पूरी कहानी मत सुनाना बस इंटरवल तक ही सुनाना, लेकिन एक लेखक के तौर पर मैंने ईमानदारी दिखाते हुए नसीर को पूरी कहानी सुना दी। तो नसीर बोले जब छोटे भाई का मर्डर हो जाएगा तो उसके बाद हॉल में कौन रुकेगा। और, ये कहकर उन्होंने फिल्म छोड़ दी।”
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Parinda - फोटो : amar ujala
नसीर के बाद परिंदा में किशन का ये रोल अमिताभ बच्चन को भी सुनाया गया और फिर नाना पाटेकर ये किरदार करने को तैयार हो गए। इम्तियाज बताते हैं, “अनिल कपूर को तब लगा कि अगर नाना पाटेकर ये रोल करते हैं तो उनका रोल कमजोर हो जाएगा। अनिल के कहने पर हम जैकी श्रॉफ से मिले और जैकी ने कहानी सुनते ही बोल दिया, ‘”ठीक है बिड़ू, मैं करेगा ये फिल्म।’ फिल्म में जैकी श्रॉफ का एक सीन है जिसमें वह फूटफूट कर रोते हैं। इस सीन में किशन अपने गांव में बसने के सपने करन को समझा रहा है। ये जैकी श्रॉफ के करियर का सबसे लंबा अनकट सीन है, जिसे करने के लिए मैंने जैकी को कई कई दिन रात  जागकर रिहर्सल कराई थी।”
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Parinda - फोटो : amar ujala mumbai
जैकी श्रॉफ के किशन का रोल करने के बाद जब नाना को बताया गया कि वह रोल नहीं कर रहे तो क्या हुआ होगा? ये पूछने पर इम्तियाज बताते हैं, “हम सब उस रोज विधु के घर पर थे। नाना पाटेकर को जब ये पता चला तो वह रुआंसे हो गए। मैं और नाना अंदर के कमरे में थे और बाकी यूनिट उस एक कमरे, किचन और हॉल वाले विधु के फ्लैट में बाहर बैठी थी। मैंने तब नाना को बताया कि पाट्या का किरदार मैंने बदलकर अन्ना सेठ का कर दिया है और अगर वह ये किरदार करते हैं तो उनके करियर को काफी मजबूती मिलेगी। ये वह समय था जब गोविंद निहलानी अपनी फिल्म सुनाने के बाद नाना को लेने से इंकार कर चुके थे और नाना को एक दमदार फिल्म की सख्त जरूरत थी। नाना और मेरे रिश्ते थिएटर के दिनों के हैं और मैंने ही उन्हें इस रोल के लिए राजी किया। अन्ना मेरा गढ़ा (क्रिएट) हुआ किरदार है।” नाना पाटेकर को इसी किरदार के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।
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Parinda - फोटो : amar ujala mumbai
विधु विनोद चोपड़ा की फिल्मों में लेखक का खास महत्व होता है, फिर परिंदा के बाद आपने उनके लिए कोई दूसरी फिल्म में काम क्यों नहीं किया? ये सवाल करते ही परिंदा के संवाद लेखक इम्तियाज का गला भर आया। वह भावुक होकर बताते हैं, “शोले के बाद परिंदा दूसरी फिल्म थी जिसके डॉयलॉग्स का कैसेट जारी हुआ। इस कैसेट के कवर पर छपा था ‘रिटेन, प्रोड्यूस्ड एंड डायरेक्टेड बाई विधु विनोद चोपड़ा’। ये कैसेट देखकर मशहूर निर्देशक शक्ति सामंत ने मुझे बुलाया और कहा, ‘ये कैसेट देखने के बाद कौन तुम्हें परिंदा का डॉयलॉग राइटर मानेगा।’ मशहूर निर्देशक बी आर इशारा ने भी विधु को इसे लेकर लंबा पत्र लिखा था। विधु का दफ्तर शक्ति सामंत के दफ्तर के बगल में ही था तो मैं कैसेट लेकर वहां चला गया और विधु से इस बारे में बात की। मैंने उन्हें तमाम बातें सुनाईं और कहा कि मैं अब तुम्हारे साथ कभी काम नहीं करूंगा। मैं दफ्तर से ये कहकर बाहर निकला तो विधु ने पीछे से आवाज लगाई और कहा कि ऐसा करने के बाद मुझे कहीं काम नहीं मिलेगा। लेकिन, तदबीर पर भरोसा करने वालों का तकदीर हमेशा साथ देती है। मुझे उसी दिन हेमा मालिनी के यहां से फोन आया। मैंने दिल आशना है लिखी, फिर वास्तव, अस्तित्व, गुलाम ए मुस्तफा जैसी तमाम सुपरहिट फिल्मों के संवाद लिखे।”
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Vidhu Vinod Chopra and Nana Patekar - फोटो : file photo
इम्तियाज के दोनों बेटे अब बड़े हो चुके हैं। फिल्मों में ही अच्छा काम कर रहे हैं। वह खुद भी 70 साल से ऊपर की उम्र में अब भी लेखन में सक्रिय हैं। सतीश कौशिक की एक फिल्म उन्होंने हाल ही में पूरी की है। परिंदा के तीस साल पूरे होने पर उन्होंने विधु विनोद चोपड़ा समेत फिल्म के सभी कलाकारों और यूनिट के सदस्यों को मुबारकबाद भी दी।
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