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Hukus Bukus: ‘रामायण’ के राम से सुनिए कश्मीरी पंडितों की संघर्ष कथा, इस फिल्म में बनी गई घाटी की एक और कहानी

Fri, 18 Aug 2023 01:16 PM IST
प्रियंका नेगी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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हुकुस बुकुस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कश्मीर शुरू से फिल्मकारों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। कश्मीर की पृष्ठभूमि पर सदियों से फिल्मों का निर्माण होता रहा है, जिसमे कश्मीर की खूबसूरती के साथ -साथ वहां की संस्कृति को भी देखने को मिला है। तो, कुछ ऐसी फिल्में भी बनी जिसमें  कश्मीर की भयावह स्थिति को भी पेश किया किया है। कश्मीर की पृष्ठभूमि पर एक और फिल्म 'हुकुस बुकुस' बन रही है, जिसमें  कश्मीरी पंडित समुदाय के एक प्रतिष्ठित सदस्य की संघर्षपूर्ण कहानी को दिखाया गया है। इस फिल्म में धारावाहिक रामायण के राम यानी अरुण गोविल खास किरदार में नजर आएंगे।
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अरुण गोविल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
निर्माता- निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' में कश्मीर से पलायन कर रहे कश्मीरी पंडितों और उनके संहार की दिल दहला देने वाली कहानी देखने को मिली थी। फिल्म 'हुकुस बुकुस' में  कश्मीरी पंडित समुदाय के एक प्रतिष्ठित सदस्य की संघर्षपूर्ण कहानी को दर्शाती है, जिन्होंने अपने संस्कृति, परंपरा और विरासत को बचाने के लिए एक मंदिर बनाने का संकल्प लेता है। 
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अरुण गोविल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस फिल्म के माध्यम से यह  यह समझने का प्रयास किया गया है कि  हमें अपनी परंपराओं की महत्वपूर्णता को समझना और इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी  इसे समर्पित रूप से जीने का अवसर पाएं। फिल्म 'हुकुस बुकुस' का शीर्षक कश्मीर की इसी नाम की लोरी पर आधारित है। जिसका मतलब होता है कि आप हमें क्यों मार रहे हैं। हम दोनों को बनाने वाला तो एक ही है। यह लोरी कश्मीर में चली आ रही हिंसा और विभाजन पर सवाल उठाती है, जिसने एकता के माहौल को खराब कर दिया है।

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अरुण गोविल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अरुण गोविल इस फिल्म में एक ऐसे कश्मीरी पंडित की भूमिका निभा रहे हैं, जिसने खुद को अपनी सांस्कृतिक  धरोहर और परंपरा से जोड़ कर  एक मंदिर की स्थापना की।  मंदिर की नींव कश्मीरी पंडित समुदाय की अगली पीढ़ियों के लिए एक प्रतिष्ठित स्मारक के रूप में रखने का एक उद्देश्य है, जो धरोहर और संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका को सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
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अरुण गोविल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपनी संस्कृति, परंपरा और धरोहर को सुरक्षित रखने की आवश्यकता आज भी हमारे जीवन में है। फिल्म के निर्देशक विनय भारद्वाज कहते हैं, 'इस फिल्म के माध्यम से हमने यही बताने की कोशिश की है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाने और सुरक्षित रखने की  जिम्मेदारी हम सबकी है। यह फिल्म व्यक्तिगत रूप से आज के दिन की जरूरतों से  जोड़ती है। निर्देशक विनय भारद्वाज और सौमित्र सिंह द्वारा निर्देशित इस फिल्म में अरुण गोविल, दर्शील सफारी और गौतम विग प्रमुख भूमिका में हैं।
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