सिद्धार्थ आनंद
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सिद्धार्थ बताते हैं, ‘‘जब हमने शुरूआत की और ‘वॉर’ की पटकथा लिखी जा रही थी, मैं उसे अंग्रेजी फिल्म की तरह लिख रहा था। उसमें गीत नहीं थे, उसकी भाषा बिलकुल नई थी। जब मैं भाषा की बात करता हूँ, तो मेरा मतलब फिल्म में बोली जा रही भाषा से नहीं है, मैं फिल्म की भाषा की बात कर रहा हूँ, यानी जिस तरह फिल्म के दृश्य आगे बढ़ते हैं, उन्हें प्रस्तुत करने का तरीका। हमें यह सोचकर सब कुछ तैयार करना था कि वह दो साल बाद फिल्म रिलीज होने के वक्त बिल्कुल प्रासंगिक लगे, फिर चाहे हर दृश्य का कंटेन्ट हो, या स्क्रीनप्ले का अंदाज, यह सब थोड़ा कठिन था और जिस तरह चीजें आगे बढ़ रही थीं, वह लगातार थ्रिलर जैसी थीं। मुझे यह भी नहीं पता था कि दो साल बाद दर्शक आखिर क्या देखना पसंद करेंगे, मुझे मौजूदा ट्रेंड्स के हिसाब से दर्शकों की उभरती पसंद के अनुरूप कंटेन्ट लेकर आना था।”