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हिंदी दिवस 2020: 90 के दशक की फिल्मों के संवाद, आज भी जुबान पर हैं लोगों की

Sat, 12 Sep 2020 10:45 PM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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90 के दशक की बॉलीवुड फिल्में - फोटो : फाइल फोटो
14 सितंबर 2020 को देशभर में हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। हिंदी दिवस को हिंदी भाषा के प्रचार- प्रसार के लिए जाना जाता है। हिंदी भाषा का प्रचार- प्रसार शुरू से ही किया जाता रहा है। इसमें बॉलीवुड फिल्मों ने भी बढ़- चढ़कर अपना योगदान दिया है। कभी फिल्मों से, कभी गानों से तो कभी अपने संवादों से। इस पैकेज में आपको बताते हैं 90 के दशक की फिल्मों के ऐसे डायलॉग्स जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं।
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अग्निपथ - फोटो : फाइल फोटो
फिल्म: अग्निपथ (1990)
डायलॉग: विजय दीनानाथ चौहान पूरा नाम। बाप का नाम दीनानाथ चौहान। मां का नाम सुहासिनी चौहान। गांव मांडवा। उमर 36 बरस नौ महीने तीन दिन और ये सोलहवां घंटा चल रहा है।
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सौदागर - फोटो : फाइल फोटो
फिल्म: सौदागर (1991)
डायलॉग: जानी, हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे। लेकिन उस वक्त बंदूक भी हमारी होगी। गोली भी हमारी होगी और वक्त भी हमारा होगा।

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तिरंगा - फोटो : फाइल फोटो
फिल्म: तिरंगा (1993)
डायलॉग: दिल्ली सिर्फ देखती रहती है, इमारतें ढह जाती है, लोग मारे जाते हैं दिल्ली खामोश देखती रहती है।
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दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे - फोटो : फाइल फोटो
फिल्म: दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1996)
डायलॉग: बड़े-बड़े शहरों में ऐसी छोटी-छोटी बातें तो होती रहती हैं सैन्योरीटा।
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यशवंत - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म: यशवंत (1997)
डायलॉग: साला एक मच्छर, बस एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है। एक मच्छर काटा कि खेल खत्म।
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दिल तो पागल है का पोस्टर - फोटो : फाइल फोटो
फिल्म: दिल तो पागल है (1997)
डायलॉग: मैंने दोस्ती को प्यार समझने की भूल की तुम प्यार को दोस्ती समझने की भूल कर रही हो।

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मृत्युदंड - फोटो : फाइल फोटो
फिल्म: मृत्युदंड (1997)
डायलॉग: पति हैं, पति ही बने रहिए। परमेश्वर बनने की कोशिश मत कीजिए।

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दामिनी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म: दामिनी (1993)
डायलॉग: चड्ढा समझाओ इसे, ऐसे खिलौने बाजार में बहुत मिलते हैं। लेकिन इसे खेलने के लिए जो जिगर चाहिए ना, वो दुनिया के किसी बाजार में नहीं मिलता। मर्द उसे लेकर पैदा होता है। और जब ये ढाई किलो का हाथ किसी पर पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है।

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करण- अर्जुन - फोटो : फाइल फोटो
फिल्म: करण- अर्जुन (1995)
डायलॉग: मेरे करण अर्जुन आएंगे। धरती का सीना फाड़कर आएंगे। आकाश चीर कर आएंगे। मेरे करण अर्जुन आएंगे।
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फिल्म रिहाई का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म: रिहाई (1997)
डायलॉग: औरतों से सीता बनने की आशा करने वाले पुरुष क्या खुद राम की तरह काम करते हैं।

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