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#हिंदीहैंहम: 'यह अमीर और गरीब का झगड़ा नहीं है बाबू', पढ़ें 50-60 के दशक के सदाबहार फिल्मी संवाद

Sat, 12 Sep 2020 10:08 PM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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50-60 के दशक की फिल्में - फोटो : फाइल फोटो
हिंदी दिवस को लेकर सभी लोगों को जागरुक करने का जिम्मा हमेशा से बॉलीवुड ने भी उठाया है। बॉलीवुड शुरुआत से ही अपने फिल्मों, उनके संवाद और गानों से लोगों को हिंदी के प्रति जागरुक कर रहे हैं। हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत 1953 से की गई थी। जिसके बाद से आज तक इसे मनाया जाता रहा है। वहीं हिंदी सिनेमा ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है। इस पैकेज में आपको बताते हैं 50 और 60 के दशक की फिल्मों के डायलॉग्स...
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श्री 420 (1955) - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म: श्री 420 (1954)
डायलॉग: वाह राज क्या ठाठ है। तुम्हारे ये शानदार सूट, मंहगी टाई, क्या चमकदार जूते हैं। वाह! भाई तुमने सच ही कहा था कि एक दिन बम्बई पर राज करोगे। राज असलियत में - मेरा दम घुट रहा है।
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मिस्टर एंड मिसेज 55 - फोटो : Social Media
फिल्म: मिस्टर एंड मिसेज 55
डायलॉग: तुम्हारी बातों से लगता है कि तुम कम्युनिस्ट हो। 
गुरुदत्त - जी नहीं मैं कम्यूनिस्ट नहीं...कार्टूनिस्ट हूं मुझसे क्या डरना।

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गंगा जमुना - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म: गंगा जमुना (1961)
डायलॉग: देवरजी अपनी भौजाई के लिए कंगन तो नहीं लाए पर भैया के लिए हथकड़ी लेकर आए हो।
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आवारा - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म: आवारा (1951)
डायलॉग: जज साहब, मैं जन्म से अपराधी नहीं हूं। मेरी मां चाहती थी कि मैं पढ़ लिखकर वकील बनूं, जज बनूं परंतु हमारी बस्ती से एक गंदा नाला गुजरता है जिसमें अपराध के कीड़े बहते हैं। मेरी फिक्र छोड़िए, मुझे सजा दीजिए परंतु इन मासूम बच्चों को बचा लीजिए।
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आवारा फिल्म का पोस्टर
फिल्म: आवारा (1951)
डायलॉग: मैं अपने आपको गिरा हुआ, नीच और कमीना समझता था परंतु आप तो मेरे भी बाप निकले।
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hum log
फिल्म: हमलोग (1951)
डायलॉग: जिस दिए में तेल कम है वो कब तक चलेगा।
बलराज साहनी- जब तेल खत्म होगा तो सुबह हो जाएगी।

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devdas - फोटो : amar ujala mumbai
फिल्म: देवदास (1955)
डायलॉग: इतना अंहकार...जानती हो चांद के चेहरे पर भी दाग है। मैं तुम्हारे माथे पर दाग बना देता हूँ।

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naya daur
फिल्म: नया दौर (1957)
डायलॉग: यह अमीर और गरीब का झगड़ा नहीं है बाबू। ये तो मशीन और हाथ का झगड़ा है।

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मुगल ए आजम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म: मुगल ए आजम (1960)
डायलॉग: अकबर- तुम्हें तीर लग सकता था, क्यों तुम्हें खौफ नहीं हुआ।
अनारकली- जिल्लेइलाही मैं अफसाने को हकीकत में बदलते देखना चाहती थी इसलिए पलक भी नहीं झपकाई।
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जिस देश में गंगा बहती है (1960) - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म: जिस देश में गंगा बहती है (1960)
डायलॉग: राजू- तुम इसे जान दे नहीं सकते तो तुम्हें जान लेने का हक भी नहीं है।
बच्चा- मैं इसे खाता हूँ, इसलिए इसे मारता हूँ

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