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अमिताभ ने लगातार जलाए रखी सिनेमा में हिंदी की मशाल, बॉलीवुड शब्द से है सख्त नफरत

Sat, 14 Sep 2019 06:25 PM IST
anand anand मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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amitabh bachchan - फोटो : social media
हिंदी सिनेमा में हिंदी की पुनर्स्थापना के लिए जिस एक शख्स ने पिछले दो दशक में सबसे ज्यादा योगदान किया है वह हैं हिंदी के कवि रहे स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन के पुत्र अमिताभ बच्चन। अमिताभ को भले लोग सदी का महानायक मानते हों, पर खुद अमिताभ को अपने इस नाम पर हमेशा आपत्ति रही है। वह इसे एक विदेशी न्यूज पोर्टल पर जमा हुए आंकड़ों से ज्यादा कुछ नहीं मानते और इसी पोर्टल की तरफ से दिए गए हिंदी सिनेमा के प्रचलित नाम बॉलीवुड का प्रयोग तक नहीं करते।
 
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सलमान खान - फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी सिनेमा को बॉलीवुड कह कर बुलाने के विरोध में सलमान खान भी काफी मुखर रहे हैं। वह इंटरव्यू के दौरान हिंदी सिनेमा को बॉलीवुड कहने पर नए पत्रकारों को टोकते भी रहे हैं। अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा में हिंदी की प्रतिष्ठा के लिए और भी बहुत कुछ करते रहे हैं। वह हिंदी सिनेमा के उन पहले सुपरसितारों में से हैं जिन्होंने अपनी फिल्मों की पटकथाएं हिंदी में मंगानी शुरू की।
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amitabh bachchan - फोटो : social media
अमिताभ कहते हैं, ‘मुंबई आने वाले तमाम लेखकों को देवनागरी में हिंदी लिखनी नहीं आती। तमाम नए कलाकार रोमन में लिखी हिंदी को पढ़ने मे आसान भी पाते हैं लेकिन मेरा व्यक्तिगत मानना ये है कि भाषा अपनी लिपि में ही लिखी जानी चाहिए। मैं सेट पर भी हिंदी में ही अपने संवाद मिलना पसंद करता हूं। रोमन में अगर लिखकर कोई संवाद ले भी आए तो उससे निवेदन करता हूं कि अगली बार यह गलती ना दोहराएं।’
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amitabh bachchan - फोटो : social media
19 साल पहले जब देश में मनोरंजन चैनल अपने शैशव काल में थे तो अमिताभ बच्चन ने टेलीविजन पर अपना पहला कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में ‘लेडीज एंड जेंटलमैन’ की जगह ‘देवियों और सज्जनों’ बोलना उनको इतना भाया कि यह कॉरपोरेट जगत की बैठकों में भी बोला जाने लगा। मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में हिंदी को प्रतिस्थापित करने के लिए अमिताभ अब भी खूब जतन करते रहते हैं। अपने से मिलने वालों को वह हिंदी में ही शुभकामना संदेश लिखकर देते हैं और आमतौर पर इसके लिए भगवा रंग की स्याही का प्रयोग करते हैं।
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