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Himesh Reshammiya Birthday: पिता की विरासत को आगे बढ़ाने वाले संगीत सितारे, हिमेश का नाम भी लिस्ट में शुमार

Sun, 23 Jul 2023 04:35 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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विपिन रेशमिया, हिमेश रेशमिया - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
23 जुलाई 1973 को मुंबई मे जन्मे हिमेश रेशमिया ने संगीतकार के तौर पर अपने करियर की शुरुआत सलमान खान की फिल्म 'प्यार किया तो डरना क्या' से की । यह फिल्म हिट रही और हिमेश रेशमिया अभिनेता, निर्माता सलमान खान कैंप के फेवरेट म्यूजिक डायरेक्टर बन गए। हिमेश रेशमिया न सिर्फ संगीतकार के तौर पर हिट रहे बल्कि कई हिट गाने भी गाए। हिमेश रेशमिया बॉलीवुड के जाने माने संगीतकार विपिन रेशमिया के बेटे हैं। आज हिमेश रेशमिया अपना 50 वां जन्मदिन मना रहे हैं। आइए जानते हैं, हिन्दी सिनेमा की पिता, पुत्र के संगीतकार जोड़ियों के बारे में:
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एस डी बर्मन, आर डी बर्मन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

एस डी बर्मन/आर डी बर्मन

भारतीय सिनेमा के संगीत के क्षेत्र मे सचिन देव बर्मन (एस डी बर्मन) का बहुत बड़ा योगदान रहा है। एस डी बर्मन ने संगीतकार के तौर पर अपने करियर की शुरुआत बांग्ला फिल्मों से साल 1937 मे की और चार दशक तक उनके संगीत का जादू चलता रहा। एक पार्श्वगायक के रूप में एस डी बर्मन ने कई फिल्मों में गीत भी गाए। उनके बेटे आर डी बर्मन भी मशहूर संगीतकार रहे। आर डी बर्मन ने 1960 से लेकर 1990 के दशक था 331 फिल्मों के लिए संगीत की रचना की।

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रोशन, राजेश रोशन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

रोशन/राजेश रोशन

संगीतकार के रूप में रोशन लाल नागरथ ने अपने करियर की शुरुआत केदार शर्मा की फिल्म 'नेकी और बदी' से साल 1949 में की और साल 1973 तक संगीतकार के तौर पर सक्रिय रहे। उनके बेटे राजेश रोशन भी संगीतकार के तौर पर काफी सफल रहे। संगीतकार के तौर पर राजेश रोशन को सबसे पहला ब्रेक महमूद की फिल्म 'कुंवारा बाप' में साल 1974 मे मिल। उनकी मां इरा रोशन भी गायिका रही हैं और संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा राजेश रोशन ने अपनी मां से ही ली।

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चित्रगुप्त, आनंद मिलिंद - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

चित्रगुप्त/आनंद मिलिंद

चित्रगुप्त ने कई यादगार फिल्मों के लिए संगीत की रचना की। भोजपुरी सिनेमा में भी वह सक्रिय रहे। चित्रगुप्त ने साल 1946 में फिल्म 'फाइटिंग हीरो' से संगीतकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और साल 1988 तक सक्रिय रहे। उनके बेटे आनंद और मिलिंद हिन्दी सिनेमा के कामयाब संगीतकार रहे हैं। आनंद मिलिंद ने साल 1984 में फिल्म 'अब आएगा मजा' से संगीतकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और 'कयामत से कयामत तक' के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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सरदार मलिक, अनु मलिक - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

सरदार मलिक/अनु मलिक

संगीतकार सरदार मलिक ने संगीतकार के तौर पर अपने करियर की शुरुआत साल 1949 में रिलीज फिल्म 'राज' से की लेकिन सही मायने में उन्हें पहचान मिली साल 1953 में रिलीज फिल्म 'लैला मजनू' और 'ठोकर' से। सरदार मालिक ने अपने करियर में करीब 600 गीतों की रचना की। उनके बेटे अनु मलिक ही मुख्य रूप से अपने पिता की संगीत विरासत को संभाले हुए हैं। इस पीढ़ी में तीसरे संगीतकार के तौर पर डब्बू मालिक के बेटे अमाल मालिक भी हिन्दी सिनेमा के जाने माने संगीतकार हैं।

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श्रवण राठौड, संजीव-दर्शन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

श्रवण राठौड/संजीव-दर्शन

संगीतकार नदीम और श्रवण की जोड़ी ने 90 के दशक में एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए। पहली बार दोनों ने फिल्म 'जीना सीख  लिया' में संगीत दिया था और 'आशिकी'  से उन्हे जबरदस्त सफलता मिली। श्रवण राठौड के बेटे संजीव और दर्शन ने संजीव दर्शन के नाम से अपने करियर की शुरुआत अजय देवगन की फिल्म 'ये रास्ते हैं प्यार के' से साल 2001 में की।

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समीर सेन, सोहेल सेन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

समीर सेन/सोहेल सेन

चाचा-भतीजे की जोड़ी दिलीप सेन और समीर सेन ने कई फिल्मों में हिट संगीत दिया । आज भी इस जोड़ी की का संगीतबद्ध किया गीत 'ओले ओले' काफी लोकप्रिय है। समीर सेन के बेटे सोहेल सेन ने साल 2008 में फिल्म 'सिर्फ' से संगीतकार के रूप मे अपने करियर की शुरुआत की। सोहेल सेन अब तक 'मेरे ब्रदर की दुल्हन', ‘एक था टाइगर', ‘गुंडे', 'हाउसफुल 3’, हैप्पी भाग जाएगी' जैसी कई फिल्मों में संगीत दे चुके हैं।
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