राजेंद्र गुप्ता
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पिता ने अपना विचार कभी नहीं थोपा
राजेंद्र गुप्ता के पिता जय भगवान दास का पानीपत में ऊनी कपड़ों का कारखाना था। राजेंद्र गुप्ता बताते हैं, 'मेरे पिता जी बहुत ही मेहनती इंसान थे। पानीपत में जो उद्योग की शुरुआत हुई, उसके फाउंडर मेंबर मेरे पिताजी ही थे। मेरे पिता जी ऐसे थे कि अगर बच्चे खुद से कुछ करना चाहते थे तो उन पर वह अपना विचार नहीं थोपते थे। वह यही बोलते थे कि तुम खुद समझदार हो देख लो कैसे क्या करना है? जब मैं एनएसडी में पढ़ता था, पिताजी खुद देखने आते थे। भाइयों को जरूर बुरा लगता था कि यहां इतना सारा काम है, पता नहीं क्या करने जा रहे हो। उस समय एनएसडी के बारे में किसी को पता ही नहीं था, नाटकों की भी पढ़ाई होती है। यह सुनकर ही अजीब लगता था।'