राकेश चतुर्वेदी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फेल होना बुरी बात नहीं!
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय यानी एनएसडी ने मुझे चुनौतियों से जूझने का नया हौसला दिया। नसीरुद्दीन शाह यहां साल में एक बार तीसरे वर्ष के छात्रों के साथ वर्कशॉप करने आते हैं। नसीर सर जब हमारे बैच के साथ वर्कशॉप करने आए तो उनकी क्लास के दौरान मैं हर कोशिश में फेल हुआ। फिर भी हर बार कोशिश करता रहा। नाटक ‘रोमियो एंड जूलिएट इन टेक्निकलर’ की वर्कशॉप भी की जिसमें आदिल हुसैन भी शामिल थे और रॉयस्टन एबल उसके निर्देशक थे। नसीर साहब जिस दिन बंबई वापस जा रहे थे तो अचानक अपने होटल से एनएसडी आ गए और हमारे बैच के लोगों के साथ चाय की दुकान पर बैठ गए। मुझे पता चला तो हॉस्टल से मैं भी भागा। तब तक 15 मिनट हो चुके थे। मुझे अच्छे से याद है कि मैं कुछ नहीं बोला उस पूरी मीटिंग के दौरान। जब नसीर सर चले गए तो बाद में मुझे रॉयस्टन एबल ने कहा, ’’सर, तेरे बारे में बात कर रहे थे।’’ मैंने पूछा, क्या? तो रॉयस्टन ने कहा, ’’किसी ने पूछा था कि अभिनय में मैं अपनी सीमाओं को नहीं तोड़ पा रहा हूं। अंदर से अक्सर कोई चीज जकड़ लेती है तो सर ने कहा कि फेल होने से मत डरो, राकेश को देखो, कितना फेल होता है, पर मानता नहीं है, हर बार कोई न कोई नई कोशिश करने आ जाता है। इसलिए फेल एंड फेल बेटर।’’