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‘90 का दशक रोमांटिक गीतों का था’, कविता कृष्णमूर्ति और हरिहरन से लेकर शान तक ने संगीत में आए बदलाव पर की बात

Sat, 14 Feb 2026 04:24 PM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Remember 90s Love Songs On Valentine Day: 90 के दशक के रोमांटिक गीतों को आज भी बॉलीवुड के सबसे प्यार भरे गीतों में गिना जाता है। अब उस दौर के दिग्गज गायकों ने आज के रोमांटिक गीतों की 90 के दशक के गीतों से तुलना की है। जानिए क्या कहा…
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हरिहरन, कविता कृष्णमूर्ति और शान - फोटो : सोशल मीडिया

बॉलीवुड में कई ऐसे गाने रहे हैं, जिनके जरिए अपने प्यार का इजहार किया जा सकता है। खासकर 90 के दशक में ऐसे कई प्यार भरे नगमे आए, जो आज भी उतने ही पसंद किए जाते हैं। आज वैलेंटाइन डे के मौके पर उस दशक में कई रोमांटिक गानों को आवाज देने वाले कविता कृष्णमूर्ति, हरिहरन, अनुराधा पौडवाल और शान जैसे गायकों ने 1990 के दशक के रोमांटिक गानों को याद किया। साथ ही मौजूदा वक्त में लव सॉन्ग्स में आए बदलावों पर भी बात की।

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कविता कृष्णमूर्ति - फोटो : सोशल मीडिया

आज के रोमांटिक गाने उतने प्रभावी नहीं
90 के दशक में कई रोमांटिक गीत गाने वाली कविता कृष्णमूर्ति ने उस दौर के बारे में बात करते हुए एएनआई से कहा, ‘उस दौर में कई ऐसी फिल्में बनती थीं जिनमें संगीत की अहम भूमिका होती थी। हर भावना को संगीत के जरिए ही व्यक्त किया जाता था। चाहे वह प्रेम कहानी हो या कोई और भावना। इसी वजह से गाने सदाबहार बन गए।’ समय के साथ रोमांटिक गानों के बदलाव पर उन्होंने कहा कि आज के रोमांटिक सॉन्ग उनके दिल को नहीं छूते। उन्होंने अरिजीत सिंह, श्रेया घोषाल, शान, सुनिधि चौहान और दिवंगत किशोर कुमार को अपने पसंदीदा गायकों में बताया।

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अनुराधा पौडवाल - फोटो : सोशल मीडिया

उन गानों के जरिए लोगों के दिलों में जगह बनाने का मौका मिला
गायिका अनुराधा पौडवाल का कहना है कि उस वक्त उन गानों को दर्शकों के साथ विकसित होने का समय दिया गया और वे धीरे-धीरे रोजमर्रा की जिंदगी में घुलमिल गए। उन्होंने कहा, ‘70 और 80 के दशक के गाने अमर थे। 'हीरो' के बाद कई एक्शन फिल्में बनीं। कई अच्छे गाने आए और हमें उनके जरिए लोगों के दिलों में जगह बनाने का मौका मिला।'

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हरिहरन - फोटो : सोशल मीडिया

90 के दशक में संगीत ही था हीरो
दिग्गज गायक हरिहरन ने 90 के दशक के गानों की तारीफ करते हुए कहा कि उस दौर में संगीत ही हीरो था। हमारे पास समय की भरपूर सुविधा थी कि हम धुन को पनपने दें और शायरी धुन तय करे। ये बनावटी नहीं थे। इन्हें धीरे-धीरे पकाया गया था। इसीलिए वे गाने एक ऐसी खुशबू की तरह लगते हैं जो हमेशा आपके साथ रहती है। संगीत के बदलाव पर उन्होंने कहा कि 90 का दशक एक मधुर धुन में जीया गया एक खूबसूरत सपना था। जबकि आज का दौर डिजिटल फ्लैश में कैद की गई बातचीत जैसा है। इसीलिए कहा जाता है कि कला हमेशा कलाकार से बड़ी होती है।

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शान - फोटो : सोशल मीडिया
उस दशक में गानों में कविता को ज्यादा महत्व मिलता था
नए युग में म्यूजिक में हुए बदलाव से प्रभावित होने की बात कहते हुए शान का मानना है कि रोमांटिक गानों में चाहे कोई भी दशक हो, धुन और भावनाओं को प्राथमिकता दी जाती थी। ताकि श्रोता उनसे जुड़ पाते थे। उन्होंने कहा कि उस समय की सिनेमाई स्वतंत्रताएं ही थीं, जिन्होंने उन रोमांटिक गानों को दर्शकों से और दर्शकों को संगीत से जोड़ने में सक्षम बनाया। लेकिन आजकल के गाने ऐसा करने में सफल नहीं हैं।
90 के दशक के म्यूजिक में कविता को प्रमुखता दी जाती थी। जहां प्रेम को ऊंचा दर्जा दिया जाता था और उसकी पूजा की जाती थी। लेकिन अब समय के साथ भाषा सरल हो गई है और भावनाएं उतनी तीव्र नहीं रहीं। 90 के दशक के रोमांटिंक गानों की तुलना आज के संगीत से करते हुए शान ने कहा कि आजकल प्यार में तीव्रता तो अधिक है, लेकिन रोमांस नहीं।
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