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M.Balamuralikrishna: गायन-वादन ही नहीं,अभिनय प्रतिभा के भी धनी थे बालामुरलीकृष्ण, इस फिल्म में बने थे नारद

Wed, 06 Jul 2022 08:00 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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एम. बालामुरलीकृष्ण - फोटो : सोशल मीडिया
एम. बालामुरलीकृष्ण लोकप्रिय गायक और संगीतकार थे। अपने सुरीले कंठ के लिए उन्हें खास पहचान मिली। इसके अलावा बालामुरलीकृष्ण मृदंगम और वायलिन वादन में मास्टर थे। साथ ही, अभिनय प्रतिभा के भी धनी थे। एम बालमुरलीकृष्ण कर्नाटक संगीत की बहुत ही सम्मानित हस्ती होने के साथ ही एक ऐसे गायक थे, जिन्होंने भारतीय एकता और अखंडता को लेकर काफी गीत गाए थे। राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत गीत 'मिले सुर मेरा तुम्हारा...' में भी इन्होंने अपनी आवाज दी। आज बालामुरलीकृष्ण का जन्मदिन है। आइए जानते हैं इनके बारे में...
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एम. बालामुरलीकृष्ण - फोटो : सोशल मीडिया
एम. बालमुरलीकृष्ण देश की मशहूर और सम्मानित हस्तियों में से एक थे। उनका जन्म 6 जुलाई 1930 को आंध्र प्रदेश के संकरागुप्तम में हुआ था। संगीत के प्रति प्रेम और प्रतिभा इन्हें विरासत में मिली थी। इनके पिता मंगल्लमपल्ली पट्टाभिरामय्या एक प्रसिद्ध बांसुरी वादक और संगीत के शिक्षक थे। वहीं, बालामुरलीकृष्ण की माता सूर्यकान्थम्मा एक वीणा कलाकार थीं। पिता भी बालामुरलीकृष्ण की प्रतिभा को बचपन में ही पहचान गए थे, लिहाजा उन्होंने इन्हें श्री पारुपल्ली रामकृष्ण पंतुलू के संरक्षण में रखा। उनके मार्गदर्शन में बालामुरलीकृष्ण ने कर्नाटक संगीत की बुलंदियों को छूआ। बालामुरलीकृष्ण ने महज 6 साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था। कर्नाटक वाद्य संगीत, वॉयला और वायलिन बजाने में बालमुरलीकृष्ण बेजोड़ थे। 15 साल की उम्र से ही वह नियमित रूप से कॉन्सर्ट में परफॉर्म करने लगे थे।
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एम. बालामुरलीकृष्ण - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि बचपन में उनका नाम मुरली कृष्ण था, लेकिन एक बार उनकी प्रतिभा को उस वक्त के मशहूर संगीतकार सूर्यनारायण मूर्ती भगवातार ने देखा तो उनके नाम के आगे बाला जोड़ दिया। इस तरह इनका नाम बालामुरलीकृष्ण हुआ। गायन-वादन के साथ-साथ बालामुरीकृष्ण में अभिनय प्रतिभा भी कूट-कूट कर भरी थी। तेलगू, कन्नड़, संस्कृत और तमिल सहित कई भाषाओं की तमाम फिल्मों में अपना गायन देने के साथ बालामुरलीकृष्ण ने कुछ तेलगू और तमिल फिल्मों में अभिनय भी किया। इन्होंने 1967 में आई फिल्म 'भक्त प्रहलाद' में नारद की भूमिका के साथ अपने अभिनय की शुरुआत की थी।
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एम. बालामुरलीकृष्ण - फोटो : सोशल मीडिया
उन्होंने चार दशकों तक अपने संगीत से श्रोताओं को लुभाया। संगीत क्षेत्र की बेहद सम्मानित हस्ती बालमुरलीकृष्ण राष्ट्रीय एकता को समर्पित प्रसिद्ध गाने 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' में दिखे थे, जिसमें उन्होंने तमिल में कुछ पंक्तियां गायी थीं। वर्ष 1965 में आई शिवाजी गणेशन अभिनीत 'तिरूविलयादल' का उनका गाना 'ओरू नाल पोथुमा' तमिल श्रोताओं में बेहद लोकप्रिय हुआ था। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया था। वह भारत के तीनों पद्म पुरस्कार- पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित किए गए थे। 22 नवंबर 2016 को बीमारी के कारण बालमुरलीकृष्ण का निधन हो गया और वह सदा के लिए इस दुनिया से चले गए। मगर, संगीत के क्षेत्र में उन्होंने जो योगदान दिया, उसके लिए वह हमेशा याद रखे जाएंगे।
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