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Guru Purnima 2023: गुरु कृपा से बदल गई इन सितारों की जिंदगी, माता पिता के आशीर्वाद से बन गए चोटी के सितारे

Mon, 03 Jul 2023 04:26 PM IST
साक्षी पांडेय अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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ऐश्वर्या राय बच्चन, मणि रत्नम ,अनुराधा पौडवाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
गुरु का हमारे जीवन में बहुत ही बड़ा महत्व होता है। गुरु की ही कृपा से जीवन को एक सार्थक दिशा मिलती है। गुरु माता और पिता दोनों के रूप में हो सकते हैं। गुरु वह होते है जो सही रास्ते पर चलने की सलाह देते हैं। आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आइए जानते हैं हिंदी सिनेमा के इन सितारों के बारे में जिनकी जिंदगी गुरु की कृपा से बदल गई।
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मणिरत्नम,ऐश्वर्या राय बच्चन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
ऐश्वर्या राय बच्चन 
मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने के बाद ऐश्वर्या राय बच्चन को सबसे पहला मौका मणि रत्नम ने अपनी फिल्म 'इरुवर' में दिया था। ऐश्वर्या राय बच्चन, मणि रत्नम को अपना गुरु मानती हैं। ऐश्वर्या राय बच्चन मणि रत्नम को सिर्फ गुरु ही नहीं मानती बल्कि गुरु शिष्य की जो परंपरा वर्षो से चली आ रही है उसका निर्वाह भी करती हैं। ऐसे कई मौके आए हैं जब ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपने गुरु मणि रत्नम का सम्मान सार्वजनिक तौर पर किया है। पीएस 2 के ट्रेलर लांच के दौरान भी ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपने गुरु मणि रत्नम 'के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और कहा, 'फिल्म की शूटिंग के दौरान जब मणि सर ने प्यार से मुझे नंदनिया कहा तो मुझे बहुत खुशी हुई।’ ऐश्वर्या राय ने कहा, 'जब भी मणि सर ने मुझे याद किया,उनके साथ काम करने के लिए हमेशा तैयार रही। उनके साथ गुरु भक्ति, श्रद्धा भक्ति, कृतज्ञता  के साथ जुड़ी रही हूं। जब भी  मणि रत्नम सर का फोन आया आया उनके साथ काम करने के लिए तैयार रही।’ 
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राजेश रोशन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
राजेश रोशन 
संगीतकार राजेश रोशन के पिता रोशन लाल नागरथ उर्फ 'रोशन' फिल्मी दुनिया के जाने माने संगीत निर्देशक थे। राजेश रोशन को संगीत इस तरह से विरासत में मिला, लेकिन कभी भी उन्होंने संगीत की क्षेत्र में अपना करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा था। वह सरकारी नौकरी करना चाह रहे थे। लेकिन पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने संगीत के क्षेत्र में दिलचस्पी लेनी शुरू की और अपनी मां इरा रोशन से मिली प्रेरणा की वजह से संगीत सीखना शुरू किया। राजेश रोशन अपनी मां को अपना गुरु मानते हैं। एक इंटरव्यू के दौरान राजेश रोशन ने इस बात का खुलासा किया किया था कि उनकी सफलता के पीछे उनकी मां इरा रोशन का बहुत बड़ा योगदान है। 

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प्रीतम चक्रवर्ती - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
प्रीतम चक्रवर्ती 
सिनेमा में धूम मचाने संगीतकार प्रीतम अपने पिता  प्रबोध चक्रवर्ती को अपना गुरु मानते हैं। प्रीतम चक्रवर्ती के पिता प्रबोध चक्रवर्ती मशहूर गिटार वादक थे और बच्चों को गिटार सिखाते थे। संगीत से पहला परिचय प्रीतम चक्रवर्ती का उनके पिता की वजह से ही हुआ था और उन्होंने प्रीतम को गिटार बजाना सीखया था। हालाकिं प्रीतम के पिता नहीं चाहते थे कि वह म्यूजिक में करियर बनावे। प्रीतम चक्रवर्ती का आज हिंदी सिनेमा में संगीतकार के रूप में बहुत बड़ा नाम है वह अपने पिता को ही अपना गुरु मानते हैं। प्रीतम का कहना कहना है कि उन्हें जो भी सफलता मिली है उसके पीछे उनके माता - पिता का आशीर्वाद है। 
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रूप कुमार राठौड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
रूप कुमार राठौड़
गायक रूप कुमार की शुरुआत तबला प्लेयर के रूप में हुई थी। रूप कुमार राठौर के पिता चतुर्भुज राठौर अपने जमाने के मशहूर द्रुपद गायक रहे हैं और उन्होंने ही रूप कुमार राठौर को पहली बार तबला पर हाथ रखवाया और उन्हें तबला  बजाना सिखाया।  शुरुआती दौर में  रूप कुमार राठौर ने अपने पिता चतुर्भुज राठौर से ही संगीत की शिक्षा ली थी। लेकिन रूप कुमार राठौर को इस बात का जिंदगी भर  अफसोस रहा कि वह ज्यादा समय तक अपने पिता से संगीत नहीं सीख सके। पिता की असामयिक मृत्यु के उपरांत उन्होंने कहा था कि वह डबल अनाथ हो गए क्योंकि  पिता के साथ  गुरु भी चले गए। 
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मधुरानी, पीनाज मसानी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
पीनाज मसानी 
मशहूर गजल गायिका पीनाज मसानी  के  पिता डॉली मसानी शास्त्रीय संगीत गायक थे। उनकी  मां पीलू मसानी को भी संगीत का शौक था। इस तरह से संगीत का माहौल तो बचपन से ही मिला, लेकिन गजल गायकी की तरफ पीनाज मसानी का झुकाव मधुरानी जी की वजह से हुआ। गजल गायिकी में  पीनाज मसानी को लाने का श्रेय मधुरानी जी को जाता है। पीनाज मसानी अपना गुरु मधुरानी जी को मानती हैं। जब पीनाज  मसानी का पहला गजल अल्बम ''आपकी बज़्म में पीनाज  मसानी' रिलीज हुआ तो इस गजल अल्बम को सुनकर मेहदी हसन ने पीनाज  मसानी को फोन किया। पीनाज  मसानी कहती हैं कि इसका क्रेडिट गुरु मधुरानी जी को जाता है, क्योंकि वह ऐसी -ऐसी गजले चुनती थी जिसमे नयापन हो, एक स्टैंडर्ड हो और उनके धुन ऐसे हो कि सबको समझ में आए।
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अनुराधा पौडवाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

अनुराधा पौडवाल
अनुराधा पौडवाल बताती हैं, ‘मेरी गुरु सुमति टनक तो अभी नहीं रही, उनको अंबाजी की सिद्धि प्राप्त थी। वह मेरे पति अरुणजी की बुआ लगती थीं। उन्होंने ही मुझे बोला था कि तुमको गाना है। मेरे कुछ गाने सुनकर मुझे हृदयनाथ मंगेशकर ने भाव सरगम में गाने का आमंत्रण दिया था लेकिन मैंने मना कर दिया। तब गुरुजी ने कहा कि गाने वाली तुम कौन हो? गाने वाली तो मैं हूं, तुम जाकर वहां बैठो, मुझे तुम्हें वहां देखना है। मुझे आज तक नहीं पता चला कि मुझे कैसे गाना आया। मंच पर बैठने के बाद गुरु के शब्द मेरे कान में गूंजते हैं और मैं गा देती हूं। मैंने गाना कभी सीखा नहीं, हां, रियाज जरूर लताजी के गानों पर किया।’ 

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