50 से 60 के दशक में बेहतरीन फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा को गुलजार करने वाले फिल्ममेकर गुरुदत्त ने जिंदगी के हर रंग देखे। गुरुदत्त ने करियर में शानदार फिल्मों के निर्माण के साथ ही अपने अभिनय का भी लोहा मनवाया। हालांकि, रंगमंच के इस दिग्गज खिलाड़ी ने महज 39 की उम्र में दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। एक काबिल-ए-तारीफ फिल्ममेकर, अभिनेता, प्रोड्यूसर और राइटर होने के बावजूद गुरुदत्त ने दो दफा अपनी जीवन लीला समाप्त करने की कोशिश की थी। गुरुदत्त सब कुछ होने के बावजूद भी ताउम्र बेचैन रहे थे। आखिर क्या था जो गुरुदत्त को जीवन में सबकुछ रहते हुए भी शांति नहीं थी, चलिए जान लेते हैं-