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गुरु दत्त की शादीशुदा जिंदगी के बीच आ गई थी ये अभिनेत्री, ढाई साल की बेटी से मिलने की इच्छा रह गई अधूरी...

Thu, 09 Jul 2020 05:31 AM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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गुरु दत्त बर्थडे - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
भारतीय सिनेमा में गुरु दत्त बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने फिल्म निर्माण से लेकर निर्देशन, कोरियोग्राफी और एक्टिंग तक में अपना लोहा मनवाया। गुरु दत्त का जन्म 9 जुलाई 1925 को बेंगलुरु में हुआ था। उनका असली नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। गुरु दत्त का जन्म बेहद गरीबी और तकलीफों में बीता था। तो वहीं गुरुदत्त का अंत भी काफी दुखद हुआ था। उनकी शादीशुदा जिंदगी बेहद खुशनुमा बीत रही थी। लेकिन उनकी जिंदगी में एक अभिनेत्री आईं जिसकी वजह से उनकी शादीशुदा जिंदगी में दरार आ गई...
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गुरु दत्त
गुरुदत्त और गीता की मुलाकात फिल्म 'बाजी' के सेट पर हुई थी। उस समय गीता रॉय एक पार्श्व गायिका के रूप में मशहूर हो चुकी थीं। उनके पास एक लंबी गाड़ी हुआ करती थी, वो गुरुदत्त से मिलने उनके माटुंगा वाले फ्लैट पर आया करती थीं। सरल इतनी थीं कि रसोई में सब्जी काटने बैठ जाती थीं। अपने घर से वो ये कह कर निकलती थीं कि वो गुरु दत्त की बहन से मिलने जा रही हैं।
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गुरु दत्त और गीता दत्त
उस दौरान राज खोसला गुरु दत्त के असिस्टेंट हुआ करते थे। उन्हें गाने का बहुत शौक था। गुरु दत्त के यहां होने वाली बैठकों में राज खोसला और गीता रॉय डुएट गाया करते थे और पूरा दत्त परिवार बैठ कर उनके गाने सुनता था। गुरु दत्त की छोटी बहन ललिता, गुरु दत्त और गीता के प्रेम पत्र एक दूसरे के लिए ले जाया करती थीं। दोनों का प्यार परवान चढ़ चुका था और 1953 में गुरु दत्त और गीता रॉय विवाह बंधन में बंध गए।

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गुरु दत्त और गीता - फोटो : Twitter
दोनों की जिंदगी काफी खुशनुमा चल रही थी। अचानक ही 'प्यासा' बनने के दौरान गीता और उनके बीच दूरियां आनी शुरू हो गईं। कारण था उनकी अपनी हीरोइन वहीदा रहमान से बढ़ती नजदीकियां। दोनों के बीच शक इस हद तक बढ़ गया कि एक दिन गुरु दत्त को एक चिट्ठी मिली। उसमें लिखा गया था कि, 'मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। अगर तुम मुझे चाहते हो तो आज शाम को साढ़े छह बजे मुझसे मिलने नारीमन प्वॉइंट पर आओ। तुम्हारी वहीदा।'
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गुरु दत्त
जब गुरु दत्त ने ये चिट्ठी अपने दोस्त अबरार को दिखाई तो उन्होंने कहा कि मुझे ये नहीं लगता कि ये चिट्ठी वहीदा ने लिखी है। दोनों ने इस चिट्ठी का रहस्य जानने की योजना बनाई। अबरार अपनी फिएट कार में नारीमन प्वॉइंट पहुंचे और उन्होंने अपनी कार सीसीआई के पास एक गली में पार्क कर दी। उन्होंने देखा कि गीता दत्त और उनकी दोस्त स्मृति बिस्वास एक कार की पिछली सीट पर बैठी किसी को खोजने की कोशिश कर रही हैं। पास की बिल्डिंग से गुरु दत्त भी ये सारा नजारा देख रहे थे। घर पहुंचकर दोनों में इस बात पर जबरदस्त झगड़ा हुआ और दोनों के बीच बातचीत तक बंद हो गई।
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गुरु दत्त
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार 9 अक्टूबर को उनके दोस्त अबरार अलवी उनसे मिलने गए तो गुरु दत्त शराब पी रहे थे। इस बीच उनकी गीता दत्त से फोन पर लड़ाई हो चुकी थी। वो अपनी ढाई साल की बेटी से मिलना चाह रहे थे और गीता उसे उनके पास भेजने के लिए तैयार नहीं थीं। गुरु दत्त ने नशे की हालत में ही उन्हें अल्टीमेटम दिया, 'बेटी को भेजो वरना तुम मेरा मरा हुआ शरीर देखोगी।' एक बजे रात को दोनों ने खाना खाया और फिर अबरार अपने घर चले गए। अगले दिन दोपहर में उनके पास फोन आया कि गुरु दत्त की तबीयत खराब है।
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गुरु दत्त
जब वो उनके घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि गुरु दत्त कुर्ता-पायजामा पहने पलंग पर लेटे हुए थे। पलंग की बगल की मेज पर एक गिलास रखा हुआ था जिसमें एक गुलाबी तरल पदार्थ अभी भी थोड़ा बचा हुआ था। अबरार के मुंह से निकला, गुरु दत्त ने अपने आप को मार डाला है। लोगों ने पूछा आप को कैसे पता? अबरार को पता था, क्योंकि वो और गुरु दत्त अक्सर मरने के तरीकों के बारे में बातें किया करते थे। गुरु दत्त ने ही उनसे कहा था, 'नींद की गोलियों को उस तरह लेना चाहिए जैसे मां अपने बच्चे को गोलियां खिलाती है...पीस कर और फिर उसे पानी में घोल कर पी जाना चाहिए।' अबरार ने बाद में बताया कि उस समय हम लोग मजाक में ये बातें कर रहे थे। मुझे क्या पता था कि गुरु दत्त इस मजाक का अपने ही ऊपर परीक्षण कर लेंगे।

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