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Gunjan Saxena: अनुराग कश्यप बोले नौकरी छोड़ दो, तो मैं नौकरी छोड़ आया, मेहनत काम आई और इस तरह बना फिल्म राइटर

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गुंजन सक्सेना, अकेली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
महिला प्रधान फिल्मों में अपना झंडा मजबूती से गाड़ चुकी अभिनेत्री नुसरत भरूचा की अगली फिल्म ‘अकेली’ के चर्चे इन दिनों हर तरफ हैं। युद्ध के बीच फंसी एक अकेली भारतीय लड़की की कहानी कहती इस फिल्म का ट्रेलर लोगों को खूब पसंद आ रहा है लेकिन क्या आपको पता है कि इस फिल्म को लिखने वाले गुंजन सक्सेना की कहानी भी कम फिल्मी नहीं है। शॉर्ट फिल्में लिखने के एक कंपटीशन में जीते गुंजन मुंबई आए तो उन्हें निर्माता, निर्देशक अनुराग कश्यप ने नौकरी छोड़कर फिल्में लिखने का सुझाव ही दे डाला। और, गुंजन ने भी आव देखा न ताव, अच्छी खासी नौकरी से इस्तीफा दे भी दिया।
 
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गुंजन सक्सेना का परिवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
तब से लेकर अब तक गुंजन सक्सेना ने बहुत मेहनत, मशक्कत की है। अपने शुरुआती दिनों के बारे में पूछे जाने पर गुंजन बताते हैं, ‘मेरे पिता कुरुक्षेत्र के इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर थे। मां भी स्कूल में पढ़ाती। दोनों रिटायर हुए तो पटियाला आ गए। घर वाले चाहते थे कि मैं भी इंजीनियर बनूं लेकिन मैंने चंडीगढ़ से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया और दिल्ली में बढ़िया नौकरी करने लगा। तब तो कभी सपने में भी ख्याल नहीं आया कि एक दिन मुंबई फिल्म जगत आकर फिल्में लिखूंगा।’
 
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तुमभी वर्कशॉप - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
फिर, ये धारा बदली कैसे? ये पूछे जाने पर गुंजन बताते हैं, ‘मुझे एक पोर्टल पर एक सूचना दिखी कि ‘तुमभी डॉट कॉम’ एक फिल्म राइटिंग कंपटीशन कर रही है। मैंने अपनी एक कहानी उसमें भेज दी। कंपटीशन के जजों का जो पैनल था, उसमें निर्माता निर्देशक अनुराग कश्यप, दिग्गज पटकथा लेखक जावेद सिद्दीकी और वरिष्ठ फिल्म समीक्षक पंकज शुक्ल शामिल थे। मैं चुना गया तो मुंबई आय़ा वर्कशॉप के लिए वहीं मेरी नीरज घेवन से मुलाकात हुई जो उन दिनों अनुराग कश्यप के सहायक हुआ करते थे।’
 

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मस्तराम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
गुंजन बताते हैं, ‘नीरज से मिलना मेरे जीवन का टर्निंग प्वाइंट रहा। मैं भी अनुराग कश्यप के दफ्तर जाने लगा। पैसा तो नहीं मिलता था लेकिन हां पढ़ने को स्क्रिप्ट्स और पेटभर खाना जरूर मिल जाता था। वहां मैं तमाम दूसरे फिल्म निर्देशकों से भी मिलता रहा। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ लिखने वालों में अखिलेश जायसवाल भी शामिल थे। उनके दोस्ती हुई और हमने मिलकर लिखी फिल्म ‘मस्तराम’। अपने तरह की ये अनोखी और पहली फिल्म थी। बहुत ही कम बजट में ये फिल्म बनकर तैयार हुई और रिलीज भी हुई।’
 
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गुंजन सक्सेना,अकेली - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
फिल्म ‘मस्तराम’ अपने समय की बेहद चर्चित फिल्म रही है। गुंजन बताते हैं, ‘मामी फिल्म फेस्टिवल में इसका नाम हुआ तो मुझे ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के ही एक और लेखक जीशान कादरी ने भी बुलाया। उनके पास एक कहानी थी जिस पर मैंने काम किया और ये फिल्म बनी ‘मेरठिया गैंगस्टर’ के नाम से। इस तरह से ‘अकेली’ मेरी लिखी तीसरी स्क्रिप्ट है जिस पर फिल्म बनी और अब ये सिनेमाघरों तक पहुंचने ही वाली है।’ इस बीच गुंजन सक्सेना ने टेलीविजन और ओटीटी पर भी काम किया है और फिल्म के लिखी उनकी कुछ और कहानियों पर भी इन दिनों काम चल रहा है।

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