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फैज की नज्म को राष्ट्र विरोधी बताने पर आया गुलजार का बयान, कह दी ऐसी बात

Sat, 04 Jan 2020 02:54 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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gulzar - फोटो : Social Media
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करने वाले जामिया विश्वविद्यालय के छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ आईआईटी कानपुर में 17 दिसंबर को हुए प्रदर्शन का मामला गरमा गया है। कई प्रोफेसरों ने शिकायत की थी प्रदर्शनकारी छात्रों ने विरोध जताने के लिए पाकिस्तानी शायर फैज अहमद की नज्म ‘हम देखेंगे, लाजिम है हम भी देखेंगे...’ गाई थी, जोकि हिंदू और राष्ट्र विरोधी है। इस मामले ने तूल पकड़ा और राजनेताओं से लेकर अभिनेताओं तक ने इस पर अपनी प्रतक्रिया दी। अब इस विवाद पर मशहूर गीतकार गुलजार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि फैज साहब पर इल्जाम लगाना गलत है।
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गुलजार
गुलजार ने कहा, 'फैज साहब एशिया के सबसे बड़े शायरों में से एक हैं। वो टाइम्स ऑफ पाकिस्तान के एडिटर रह चुके हैं, कम्युनिस्ट पार्टी के लीडर रह चुके हैं। उस स्तर के शायर, जो प्रोगेसिव मूवमेंट के संस्थापक भी रहे, उस आदमी को महजब के आधार पर इस तरह का इल्जाम देना मुनासिब नहीं लगता। ये मतलब उन लोगों के लिए गलत है, जो ऐसा कर रहे हैं।'
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gulzar
उन्होंने आगे कहा, 'फैज अहमद फैज को सब जानते हैं और उन्होंने जिया उल हक के जमाने में लिखी. अगर नज्म को आउट ऑफ कॉन्टेस्ट प्लेस कर दें, तो इसमें नज्म पर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते। यह गलती उनकी है, जो इस तरह की बात कर रहे हैं। एक कविता, एक शेर या कुछ भी लिखा गया है, उसे एक सही परिपेक्ष्य में देखना जरूरी है।'
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जावेद अख्तर - फोटो : Twitter
इससे पहले इस विवाद पर जावेद अख्तर ने कहा था कि फैज अहमद फैज को 'हिंदू विरोधी' कहना इतना बेतुका और मजाकिया है कि इसके बारे में गंभीरता से बात करना मुश्किल है। अख्तर ने कहा कि फैज ने अपना आधा जीवन पाकिस्तान के बाहर गुजारा, उन्हें वहां पाकिस्तानी विरोधी कहा गया। 'हम देखेंग' नज्म उन्होंने जियाउल हक की सांप्रदायिक, प्रतिगामी और कट्टरपंथी सरकार के खिलाफ लिखा था।

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