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'प्रदर्शनकारी किसान परिवारों के साथ मना सकते हैं लोहड़ी', अभिनेत्री गुल पनाग ने जताई उम्मीद

Wed, 13 Jan 2021 12:03 PM IST
स्वाति सिंह एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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गुल पनाग - फोटो : इंस्टाग्राम
तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन जारी रहा है। पंजाब से काफी संख्या में किसानों के जत्थे धरने पर हैं।  किसान आंदोलन के बीच 13 जनवरी को देश में लोहड़ी का पर्व मनाया जाएगा। इसी बीच शुरू से ही किसान आंदोलन का समर्थन करते में नजर आईं अभिनेत्री गुल पनाग ने बयान जारी किया है। 
 
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गुल पनाग - फोटो : इंस्टाग्राम
गुल पनाग ने एक इंटरव्यू में कहा, 'वे हर रोज आग जलाकर खुद को गर्म रखकर किसी तरह पर्व मना रहे हैं।  कब से चल रही है उनकी लोहड़ी। चूंकि ये आंदोलन हरियाणा और खासकर दो अहम जगहों सिकरी और सिंघू जो कि दोनों हरियाणा में हैं, तो इसलिए ये पूरे पंजाब का आंदोलन है।  लेकिन आपको वहां जाकर देखना होगा कि इस आंदोलन में कितने अलग-अलग लोग शामिल हैं।  मैं वहां गई हूं इसलिए मुझे पता है।  मैंने सिंघू बॉर्डर पर सीजन का पहला साग चखा था। '
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गुल पनाग - फोटो : इंस्टाग्राम
उन्होंने कहा, 'लोहड़ी पर सपरिवार हो इसकी आशा करते हुए कहा कि सब कुछ सरकार के फैसले पर निर्भर करता है। सभी चाहते हैं कि वे अपने घर वापस जाएं और अपने परिवार के साथ रहें लेकिन उन्होंने अपने परिवार को अलग रखा है।  वे यहां होने की बजाय अपने घरों में होते। लोहड़ी पंजाबियों का बहुत खास त्यौहार है।

 ऐसे में ये सवाल उठता है कि आंदोलन के 40 दिन गुजरने और 50 मौतें होने के बावजूद वे यहां हैं, और कोई समाधान अब तक क्यों नहीं है। '  

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पाताल लोक - फोटो : Prime
इससे पहले आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पहुंची अभिनेत्री गुल पनाग ने कहा था कि सरकार की नीयत पर किसानों को शक है। इसे दूर कर, किसानों का दिल जीतने के लिए सरकार को प्रयत्न तो करना ही पड़ेगा।

गुल पनाग ने किसानों के आंदोलन के बारे में अलग अलग तरह के भ्रामक बातों पर निशाना साधते हुए कहा था कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं। अपने घर-परिवारों को छोड़कर आए, किसान सर्द रातों की परवाह किए बगैर अपने अधिकारों की लड़ाई में जुटे हुए हैं।
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Gul Panag
इससे साथ ही गुल पनाग ने कृषि बिलों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह कृषि बिलों को ऑर्डिनेंस के रूप में लाया गया। लॉकडाउन के दौरान इसे बगैर किसानों से बगैर मशविरा इसे लोकसभा और राज्यसभा में कैसे पास कर दिया गया। किसानों के समर्थन में आगे भी आवाज उठाती रहेंगी, क्योंकि इनकी मांगे जायज हैं और आंदोलन को झूठ की बदौलत कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
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