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'चुपके चुपके' से लेकर 'वो नहीं मेरा मगर' तक, सुनिए गुलाम अली की शानदार गजलें

Sat, 05 Dec 2020 03:01 PM IST
anand anand एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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गुलाम अली - फोटो : file photo

गजल की दुनिया के मशहूर गायक उस्ताद गुलाम अली का जन्म 5 दिसबंर 1940 को हुआ था। पाकिस्तान से संबंध रखने वाले गुलाम अली ने अपनी शानदार गजलों से पूरी दुनिया में नाम कमाया है। भारत में उनकी गजल के हमेशा दीवाने रहे हैं। गुलाम अली पटियाला घराना से संबंध रखते हैं। जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनकी कुछ खास गजलों से रूबरू करवाते हैं। 

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गजल- चुपके चुपके
गुलाम अली की यह गजल साल 1980 में आई एलबम 'चुपके चुपके' की है। उनकी यह गजल विश्व प्रसिद्ध है। गुलाम अली की इस गजल को भारत में भी खूब पसंद किया जाता है। 
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गजल- ये दिल ये पागल दिल मेरा
उनकी यह खूबसूरत गजल भी साल 1980 में आई थी। गुलाम अली की यह गजल साल 1980 में आई एलबम 'पागल दिल मेरा' की है। 

गजल- तुम्हारे खत में
गुलाम अली की यह गजल साल 1983 में आई एलबम 'मेरी पसंद' की है। यह गजल आज भी कई महफिलों की जान है। 
 
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गजल- हम तेरे शहर में
गुलाम अली की यह शानदार गजल काफी मशहूर है। उनकी यह गजल साल 1996 में आई एलबम 'तेरे शहर में' की है। 
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गजल- पत्ता पत्ता बूटा बूटा
यह मशहूर गजल गुलाम अली ने साल 1998 में आई एलबम 'जुदा भी हो के वो' की है। इस शानदार गजल से उन्होंने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। 
 
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गजल- अपनी धुन में
उनकी यह एलबम साल 1999 में आई थी। उनकी इस गजल को भी खूब पसंद किया गया था। 
 

गजल- मैं नजर से पी रहा हूं
गुलाम अली ने यह खूबसूरत गजल साल 1979 में आई एलबम 'दोस्त बनकर' के लिए गाई। यह गजल भी काफी मशहूर है।

गजल- सइयां विदेशी घर आजा रे
गुलाम अली ने यह खूबसूरत गजल साल 2013 में अमेरिका के एक लाइव शो में गाई थी।

गजल- खुली जो आंख
यह शानदार गजल गुलाम अली ने साल 2003 में गाई थी। उनकी यह गजल साल 2003 में आई एलबम 'गुलाम अली वन' की है। 
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गजल- वो नहीं मेरा मगर
इस खूबसूरत गजल को गुलाम अली ने गायिका कविता कृष्णमूर्ति के साथ मिलकर गया है। यह गजल साल 2017 में आई थी। 
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