'हमरी अटरिया पे आओ सांवरिया देखा देखी तनिक होई जाए...'
गजल क्वीन बेगम अख्तरी बाई फैजाबादी के इस गाने को जब फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज ने अपनी फिल्म 'डेढ़ इशकिया' में शामिल किया, तो चर्चा रेखा भारद्वाज के साथ साथ बेगम अख्तर की भी हुई। आज की जेनरेशन के लोग जो बेगम को नहीं भी जानते थे वो भी इनके दीवाने हो गए।
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begum akhtar
गाने के नए वर्जन के साथ-साथ बेगम की आवाज में गाए इसी गीत को लोगों ने खूब सुना। आज उनके जन्मदिन के मौके पर सिर्फ गूगल ने डूडल बनाकर ही नहीं, बल्कि ट्विटर से लेकर फेसबुक तक पर चर्चा हो रही है।
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लेकिन बेगम अख्तर को जितना सेलिब्रेट किया जाता है, उनकी जिंदगी उतनी ही उदासीन रही। बचपन ने पिता ने उन्हें छोड़ दिया, जुड़वा बहन की मौत हो गई, खुद नाबालिग उम्र में एक बच्ची की मां बनी और फिर शौहर के कहने पर गायिकी से भी मुंह मोड़ना पड़ा।
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अपने दम पर मुकाम हासिल करने वाली बेगम की जिंदगी में एक दौर वह भी आया जब पैसे जुटाने के लिए उन्होंने जमीन पर बैठकर नात पढ़ा। एक बार बेगम अख्तर एक संगीत सभा में भाग लेने मुंबई गईं। वहीं उन्होंने अचानक तय किया कि वे हज करने मक्का जाएंगी। जब तक वो मदीना पहुंची, उनके सारे पैसे खत्म हो चुके थे। उन्होंने जमीन पर बैठकर नात पढ़ना शुरू कर दिया। लोगों की भीड़ लग गई और इस तरह उन्होंने पैसे जमा किए।
हज से आने के बाद दो साल तक बेगम अख्तर ने शराब को हाथ नहीं लगाया, मगर धीरे-धीरे फिर से पीना शुरू कर दिया। गजल हो ठुमरी या फिर दादरा, सुरों की मल्लिका बेगम अख्तर के गाने आज भी सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
बेगम आप आज भी हमारे जेहन में जिंदा हैं, जन्मदिन की बधाई कुबूल कीजिये....