हिंदी, भोजपुरी और मराठी सिनेमा के गढ़ कहे जाने वाले मुंबई शहर का एक नाम मायानगरी भी अरसे से प्रचलन में है। और सिनेमा की माया ऐसी है कि इसके आभामंडल को अगर सिरे से न समझा जाया तो बाहर से आना वाला इंसान इसमें गोल गोल घूमकर रह जाता है। किसी फिल्म, धारावाहिक या ओटीटी सीरीज बनाने के लिए शुरुआत भले एक अच्छी कहानी या एक बड़े सितारे की उपलब्धता से होती है लेकिन इसे सिनेमाघरों, टेलीविजन या ओटीटी तक प्रसारित, प्रकाशित करने के बीच की प्रक्रिया सरल नहीं है। सिनेमा बनाने वालों के लाखों परिवार मुंबई में रहते हैं और इस सबको एक तार से जोड़े रखने के लिए बनी फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (FWICE)। ये फेडरेशन दरअसल मनोरंजन जगत में काम करने वाले तकनीशियनों, कारीगरों, कामगारों, कलाकारों और निर्माताओं की अलग अलग यूनियनों के बीच समन्वय का काम करती है और फेडरेशन के अध्यक्ष बी एन तिवारी की मानें तो ऐसी करीब 32 यूनियनें इस फेडरेशन के तहत काम करती हैं।
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