एक सुपरस्टार के लिए वाकई बड़ी बात थी। कुछ दिन पहले जो शख्स महंगी कार, कीमती कपड़़े और आलीशान घर में रहता था, कुछ ही दिनों में वह टॉयलेट साफ कर रहा था, माली का काम कर रहा था। यहां तक कि बर्तन भी साफ करता था।
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vinod khanna
साल 2002 में दिये अपने एक इंटरव्यू में विनोद खन्ना ने बताया कि नाम और पैसा कमाने के बावजूद उन्हें जिंदगी में कुछ खालीपन सा लग रहा था। इसे पूरा करने के लिए वह सन्यासी बने और पूरे चार साल तक अमेरिका में आध्यात्निक गुरु ओशो के आश्रम में बिताए।
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विनोद खन्ना
- फोटो : SELF
आश्रम में विनोद खन्ना हर वो काम करते थे जो शायद एक सेलिब्रिटी रहते उन्होंने कभी करने की सोची भी न होगी। वो सुपरस्टार जो शायद फिल्मों में पहने अपने कपड़े को दोबारा शरीर से लगाता भी न होगा, वह आश्रम जाते ही किसी के लिए मैनेक्वीन तक बन गया था। इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि ओशो से उनकी कद-काठी इतनी मिलती-जुलती थी कि गुरु से पहले उन्हें उनके कपड़े पहनाए जाते थे।
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विनोद खन्ना
विनोद खन्ना करीयर के शीर्ष पर पहुंचकर रिटायरमेंट लेने वाले पहले बॉलीवुड एक्टर थे। पहले डाकू के रोल से लोगों को डराया, फिर पुलिसवाला बनकर उनका दिल जीता भी। लव मेकिंग सीन दिया तो इंडस्ट्री में नया ट्रेंड सेट हो गया पर जब सब सन्यासी बनने का फैसला लिया तो किसी को यकीन नहीं हुआ।
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विनोद खन्ना
1980 में विनोद खन्ना का मन फिर बदला। वह अपने परिवार के पास वापस लौटना चाहते थे। हालांकि ओशो की ओर से उन्हें ऑफर भी दिया गया कि वह चाहें तो पुणे के आश्रम की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं, लेकिन विनोद खन्ना ने इंकार कर दिया।
विनोद खन्ना ने अपने फिल्मी करियर में विलेन से लेकर रोमांटिक हीरो तक के किरदार निभाए। कहा जाता है कि अगर उन्होंने सिबैटिकल (काम से ब्रेक) न लिया होतो तो इंडस्ट्री में उनका ओहदा अमिताभ बच्चन के बराबर का होता। वो अमिताभ बच्चन ही तो थे जिनके न कहने के बाद फिल्म 'कुर्बानी' विनोद खन्ना को ऑफर की गई। यह फिल्म विनोद खन्ना ने आश्रम से वापसी के बाद की थी।
7 अप्रैल 2017 को कैंसर की वजह से उनका निधन हो गया। वह भले ही आज अपने 71वें जन्मदिन पर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी कला के बदौलत हमारे जेहन में हमेशा सांसें लेते रहेंगे।