जनता को पसंद आया आरबीआई गर्वनर का काम
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खुशकिस्मती से हाल के दिनों में भारत से आने वाली कुछ खबरें उत्साह बढ़ाने वाली भी रहीं। जब देश में अलग-अलग धर्मों के युवा, हिंदू और मुसलमान युवा, हाथों में हाथ डालकर और राष्ट्रध्वज लिए, नेताओं के थोपे नकली अलगाव को ठुकराकर एक साथ मार्च करते हैं तो यह दिखाता है कि हमारे संविधान की मूलभूत भावना आज भी उज्ज्वल है। जब प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी अपनी 'ड्रीम जॉब' से इसलिए इस्तीफा दे देते हैं क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि वो ठीक तरह से अपना फर्ज निभा पा रहे हैं तो वो इस बात की जीती-जागती मिसाल होते हैं कि हमें आजादी दिलाने वाले पूर्वज हमें आज भी प्रेरित कर रहे हैं। जब एक चुनाव आयुक्त बिना अपने परिवार के उत्पीड़न की परवाह किए पूरी निष्पक्षता से अपना काम करता है तो वो ये सुनिश्चित करता है कि मूल्य पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं। जब मीडिया के कुछ लोग बिना थके हुए सच्चाई तक पहुंचने के लिए काम करते हैं जबकि उन्हीं के साथी सरकारी दबाव के आगे घुटने टेक देते हैं, तो वे ये दिखाते हैं कि एक गणतंत्र का जिम्मेदार नागरिक कैसा होता है।