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Digital Review: ‘द ताशकंद फाइल्स’ ने पूछा सवाल, ‘शास्त्री जी मरे या मार दिए गए?’

Mon, 25 Mar 2019 06:01 PM IST
anand anand मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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Tashkent - फोटो : amar ujala
सिनेमा का ये प्रधानमंत्री काल चल रहा है। इंदिरा गांधी पर इंदु सरकार, मनमोहन सिंह पर द एक्सीडेंटल प्राइममिनिस्टर, नरेंद्र मोदी पर पीएम नरेंद्र मोदी और अब लाल बहादुर शास्त्री पर द ताशकंद फाइल्स। ट्रेलर शुरू होते ही सवाल उठाता है, ‘शास्त्री जी मरे या मार दिए गए?’ और ट्रेलर का ये सवाल ही फिल्म की मंशा जताता है। आम चुनाव के पहले चरण के मतदान के ठीक अगले दिन रिलीज होने जा रही इस फिल्म में जहां इस संदिग्ध मृत्यु की बात होती है, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का चेहरा भी परदे पर दिखाया जाता है।
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the Tashkent files - फोटो : amar ujala mumbai
फिल्म का ट्रेलर एक इन्वेस्टिगेशन टीम की आपसी बहस के बहाने देश के उस वक्त के हालात पर बात करता है जब देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आकस्मिक मृत्यु हुई। पंकज त्रिपाठी, राजेश शर्मा, मंदिरा बेदी, प्रकाश बेलवाडी और श्वेता बासु प्रसाद के निभाए किरदार इस बात पर बहस करते नजर आते हैं कि शास्त्री को दिल का दौरा पड़ा तो वहां घंटी क्यों नहीं थी? क्या रात को सोने से पहले दिए गए दूध में जहर था? आदि आदि। 
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ताशकंद फाइल्स का ट्रेलर शुरू होते ही अगर आपको खुद में अटकाता है तो इसकी वजह है मिथुन चक्रवर्ती की दमदार वापसी और उनके दमदार संवाद। फिर एक के बाद एक हर कलाकार अपने पूरी चमक के साथ परदे पर दिखता है। और, सोने पर सुहागा जैसा है नसीरुद्दीन शाह का सधा हुआ अभिनय और विनय पाठक का रहस्यमयी स्वरूप। 

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the Tashkent files - फोटो : amar ujala mumbai
श्वेता बासु प्रसाद उस आम नागरिक के किरदार में हैं जो इस रहस्यमयी मौत की सच्चाई जानने की कोशिश में है। उनके किरदार में एक आम भारतीय का अक्स भी उभरता है जब परदे पर संवाद आता है, ‘ये सत्य और अहिंसा का देश है। ये गांधी और नेहरू का देश है।‘ और, जवाबी संवाद, ‘शास्त्री जी का क्यों नहीं?’ सबकुछ साफ कर जाता है।
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the Tashkent files - फोटो : amar ujala mumbai
फिल्म द ताशकंद फाइल्स के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने इस फिल्म में अपना नया नाम विवेक रंजन अग्निहोत्री इस्तेमाल किया है। कट्टर दक्षिणपंथी विवेक की इस फिल्म को लेकर वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल सवाल जरूर उठाएंगे। विवेक की इस फिल्म की रिलीज की तारीख को लेकर सवाल जो भी हों, लेकिन उनकी इस फिल्म के सवाल सबके सवाल हैं। और, यही विवेक की जीत है। 
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the Tashkent files - फोटो : amar ujala mumbai
कभी हेट स्टोरी जैसी अश्लीलता की हदें पार करने वाले सिनेमा की शुरूआत करने की बदनामी बटोर चुके विवेक ने सिनेमा की धुरी का इस बार दूसरा छोर थामा है। ट्रेलर वाकई जोरदार है। पिक्चर तो खैर अभी बाकी है ही।
 
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