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मुफलिसी में जीने को मजबूर सितारे

Fri, 10 Jun 2016 06:02 PM IST
संजय मिश्रा/संवाद्दाता, बीबीसी
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- फोटो : BBC
फिल्मी दुनिया में उगते सूरज को बहुत शोहरतें मिलतूी हैं, दौलत बेइंतहा, चाहने वाले आगे-पीछे। ये सब तभी तक जब तक आपका नाम चल रहा है, एक बार इस भीड़ में पिछड़े तो कोई नाम याद करने वाला नहीं रहता। हाल ही में दिल्ली की सड़को पर अनीसा नाम की एक मॉडल बेघर घूमती मिली है। वो अकेली नहीं हैं ऐसे कई नाम हैं जिनकी कभी तूती बोलती थी लेकिन आज बेहद बुरे दौर में हैं।
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मुफलिसी में जीने को मजबूर सितारे

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- फोटो : BBC
साठ और सत्तर के दशक की मशहूर गायिका मुबारक बेगम को भले ही महाराष्ट्र के शिक्षा और संस्कृति मंत्री विनोद तावडे ने मदद का आश्वासन दिया, लेकिन वो मदद उन तक पहुंची नहीं। मुबारक बेगम से किए गए कई अधूरे वादों में एक और वादे का इजाफा हो गया, लेकिन इससे भी बडी मुश्किल यह हुई कि मुफलिसी के इस दौर में पहले से जो मदद मिल रही थी, वो भी इस सरकारी आश्वासन की भेंट चढ गई। जब बीबीसी की टीम मुबारक बेगम से मिलने उनके घर पहुंची, तो पाया कि वो बमुश्किल उठ-बैठ पा रही हैं। उनके सुरीले गले से आवाज भी नहीं निकल पा रही थी। बडी कोशिश करने के बाद उन्होंने अपना मशहूर गाना, ‘ऐ मेरे हमराही मुझको गले लगा ले’ सुनाया। इस गाने के बाद बजी तालियों के जवाब में ‘शुक्रिया’ में हाथ उठाया और धीमे से कहा कि मैं बात नहीं कर पाउंगी।
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- फोटो : Sanjay mishra
मुबारक बेगम की बहू जरीना शेख ने बताया, ‘‘छह महीने पहले बेगम की बेटी का निधन हुआ, तब से ये गहरे सदमे में हैं। दिनभर बिस्तर में पडे रहने से शरीर में घाव हो गए हैं।’’ वे आगे कहती हैं, ‘‘अस्पताल में मंत्री विनोद तावडे आए थे और उन्होंने सरकारी मदद का ऐलान भी किया था, लेकिन वो वादा भर बनकर रह गया।’’ जरीना ने बताया कि सरकारी मदद की बात सुनने के बाद जो अन्य मदद आ रहे थे, वो भी बंद हो गए। जरीना कहती हैं, ‘‘पहले लता मंगेशकर के ऑफिस से भी पैसा आता था, जिससे इनका खर्चा चलता था। लेकिन विनोद तावडे के ऐलान के बाद से कोई पैसा नहीं आया। अब सिर्फ सलमान खान की ओर से हर महीने दवाई मिल जाती है।’’ इंडस्ट्री के रवैये के बारे में बात करते हुए जरीना ने कहा, ‘‘इनकी बेटी के खत्म होने के बाद सिर्फ लता मंगेशकर का फोन आया था, बाकी किसी ने कोई पूछताछ नहीं की।’’

मुफलिसी में जीने को मजबूर सितारे

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- फोटो : BBC
वहीं बीबीसी से संस्कृति मंत्री विनोद तावडे के मीडिया सलाहकार गोविन्द येतेकर ने कहा, ‘‘मुबारक बेगम की बीमारी और ऑपरेशन से जुडे खर्च को वहन करने का जिम्मा सरकार ने लिया था।'' वे आगे कहते हैं, ''उनके रोजमर्रा के खर्च को वहन करने की कोई बात नहीं हुई थी। हमने बेगम के परिवार को सलाह दी थी कि जब तक वो पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाती, उन्हें अस्पताल में रहने दें, लेकिन उनका परिवार उन्हें घर ले गया।''
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- फोटो : BBC
मुबारक बेगम की ही तरह अभिनेता सतीश कौल भी मुफलिसी में जीने को मजबूर हैं। सतीश हिंदी और पंजाबी फिल्मों में जाना नाम हुआ करते थे। लेकिन अब हालत यह है कि बीते दिनों आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ के लिए ऑडिशन दिया था। उस ऑडिशन का नतीजा अभी तक नहीं निकला है। देव आनंद, दिलीप कुमार, शाहरुख खान, धर्मेंद्र जैसे कई कलाकारों के साथ 300 से ज्यादा फिल्में करने वाले सतीश कौल कहते हैं, ‘‘बढती उम्र और बीमारियों से खस्ताहाल हूं। आर्थिक तंगी से गुजर रहा हूं।''
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- फोटो : BBC
लोगों से खुद की मदद की अपील भी करते हुए कहते हैं, ‘‘पटियाला यूनिवर्सिटी और एसपी अग्रवाल से हर महीने मदद मिलती थी, लेकिन कुछ महीनों से वो मदद भी बंद है। अब जो लोग मिलने आते हैं, उनके दिए पैसे से गुजारा कर रहा हूं।'' सतीश ने कहते हैं कि मैंने एक्टिंग स्कूल खोला था, लेकिन स्कूल नहीं चला और मेरे 22 लाख रुपए डूब गए।
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- फोटो : BBC
इन बदहाल कलाकारों में अगला नाम पुष्पा पगधारे का है। साल 1986 में आई फिल्म ‘अंकुश’ का मशहूर गाना ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ गाने वाली पुष्पा को सरकारी मदद के नाम पर महज 2100 रुपए की पेंशन मिलती है। मोहम्मद रफी, आशा भोसले, मुकेश, उषा मंगेशकर, ओपी नैय्यर सरीखे लोगों के साथ काम करने वाली पुष्पा कहती हैं कि मिलने वाली सरकारी पेंशन से पूरी दवाएं भी नहीं आ पाती हैं। पुष्पा ने बीबीसी से कहा, ‘‘मेरे पति के निधन के बाद मैं बिलकुल अकेली हो गई हूं। कुछ मुंह बोले रिश्तेदार हैं, जो मेरी देखभाल करते हैं।’’ वो कहती हैं, ‘‘अपने गुजर-बसर के लिए मैं कुछ कार्यक्रमों में गा लेती हूं। मैं आज भी रियाज करती हूं, लेकिन कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाती।’’ एके हंगल, भगवान दादा ने भी जीवन के अंतिम पडाव में मुफलिसी भरे दिन गुजारे थे।
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