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Women In Hindi Cinema: थियेटरों से गायब हुईं महिला प्रधान फिल्में, विद्या, तापसी, यामी, राधिका सबकी एक कहानी

Thu, 09 Mar 2023 02:05 PM IST
प्रियंका नेगी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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जान्हवी कपूर, विद्या बालन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दो साल पहले अभिनेत्री राधिका आप्टे ने जब कोलकाता में कोरोना संक्रमण काल के बीच 35 दिन लगातार रुककर अपनी फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ शूट की तो उन्हें खूब तारीफें मिलीं। उनके प्रशंसकों को लगा कि अरसे बाद एक मजेदार एक्शन फिल्म बड़े परदे पर देखने को मिलेगी। लेकिन, कोरोना संक्रमण काल में और उसके बाद दर्शकों का फिल्मों को लेकर जो ‘स्वाद’ बदला है, उसने सिनेमाघरों में महिला प्रधान फिल्मों की रिलीज को करीब करीब असंभव बना दिया है। कंगना रणौत की पिछली फिल्म ‘धाकड़’ का उदाहरण देकर वितरक अब ऐसी फिल्मों को दूर से ही नमस्कार कर ले रहे हैं। हालात ये है कि कभी ‘डर्टी पिक्चर’ और ‘कहानी’ जैसी फिल्मों से धूम मचाने वाली विद्या बालन की पिछली तीन फिल्में ओटीटी पर रिलीज हो चुकी हैं। तापसी पन्नू, यामी गौतम, सारा अली खान से लेकर राधिका आप्टे तक सबकी यही कहानी बनती दिख रही है...
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राधिका आप्टे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

राधिका आप्टे 

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ओटीटी जी5 ने ये पत्ता खोला कि राधिका आप्टे की अगली फिल्म ‘मिसेज अंडरकवर’ उनकी ओरिजिनल फिल्म के रूप में रिलीज होगी। इसके पहले राधिका की 'रात अकेली', 'फोरेंसिक', 'लस्ट स्टोरी, 'मोनिका ओ माय डार्लिंग' जैसी फिल्में भी ओटीटी प्लेटफार्म पर ही रिलीज हो चुकी है। कभी नेटफ्लिक्स की इन हाउस हीरोइन का तमगा पा चुकीं राधिका आप्टे ने हालांकि हिम्मत नहीं हारी है। वह कहती हैं, 'ओटीटी प्लेटफार्म पर भी सिर्फ योग्य कलाकारों को ही मौका मिला है, स्टार सिस्टम अब खत्म हो चुका है। फिल्मे चाहे थियेटर में रिलीज हो या फिर ओटीटी पर चुनौती तो हर जगह ही है। हां, ओटीटी पर फिल्में रिलीज करने में निर्माता इन दिनों खुद को सुरक्षित मानने लगे हैं।’

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सारा अली खान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सारा अली खान 

सैफ अली खान की बिटिया सारा अली खान का भी बड़े परदे से नाता करीब करीब टूट ही चुकी है। उनकी अगली फिल्म फिल्म 'गैसलाइट' भी सीधे ओटीटी पर रिलीज होने जा रही है। इससे पहले उनकी दो फिल्में ‘कुली नंबर वन’ और 'अतरंगी रे' भी ओटीटी पर ही रिलीज हुईं। सारा अली खान इस बारे में कहती हैं, 'अब थियेटर ही मनोरंजन का इकलौता माध्यम नही रहे। कंटेंट अच्छा हो तो हर जगह चलता है चाहे वह थिएटर हो या फिर ओटीटी।' ये और बात है कि ओटीटी के सितारों की ब्रांड वैल्यू का सिने सितारों की ब्रांड वैल्यू से कोई मेल होता आने वाले दिनों में नहीं दिख रहा।

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लॉस्ट - फोटो : सोशल मीडिया

यामी गौतम 

यामी गौतम की हाल ही में फिल्म 'लॉस्ट' ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज हुई है। इससे पहले उनकी फिल्म 'अ थर्सडे' और 'दसवीं' भी ओटीटी प्लेटफार्म पर ही रिलीज हो चुकी है। यामी गौतम कहती हैं, 'फिल्में ओटीटी पर रिलीज हो या फिर थिएटर में यह सिलसिला कायम रहना चाहिए। ओटीटी के आने से इतना फायदा जरूर हुआ है कि अब महिला किरदारों को ध्यान में रखकर कहानियां लिखी जा रही हैं।'

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विद्या बालन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

विद्या बालन 

ओटीटी पर विद्या बालन की 'शकुंतला देवी' जब रिलीज हुई तो लॉकडाउन के दौरान इसने व्यूज का एक रिकॉर्ड बनाया था। लेकिन फिर उनकी दो और फिल्में 'शेरनी' और 'जलसा' भी ओटीटी पर ही आईं तो मामला गड़बड़ाने लगा। अब तो विद्या बालन रोज ही सोशल मीडिया पर रील्स बनाती दिखती हैं। विद्या बालन कहती हैं, ' थियेटर में फिल्में देखने का अपना एक अलग मजा तो होता ही है, अब यह फिल्म के निर्माता पर निर्भर करता है कि फिल्म थियेटर में रिलीज करते हैं या फिर थियेटर में, मेरी फिल्में जब थियेटर में रिलीज हुई तब भी दर्शकों का उतना ही प्यार मिला और ओटीटी पर भी अभी तक मिल रहा है।' 

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जान्हवी कपूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

जान्हवी कपूर

सोशल मीडिया पर चौबीसों घंटे नजर आने वाली जान्हवी कपूर का आकर्षण भी सिनेमा देखने वालों के बीच लगातार गिरता जा रहा है। ‘गुंजन सक्सेना’ से उनकी ओटीटी पर बोहनी हुई। फिर उनकी फिल्म 'गुड लक जेरी' भी थियेटर में रिलीज न होकर सीधे ओटीटी प्लेटफार्म पर ही रिलीज हुई। इस बीच सिनेमाघरों तक उनकी दो फिल्में ‘रूही’ और ‘मिली’ पहुंची भी तो दर्शकों ने उनमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। जान्हवी का कहना है कि ओटीटी पर फिल्म रिलीज करने में जोखिम कम होता है और इस बात की गारंटी होती है कि लोग आप की फिल्म देखेंगे ही, हालांकि थिएटर में फिल्म देखने का अपना एक अलग ही मजा होता है।

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तापसी पन्नू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

तापसी पन्नू 

तापसी पन्नू भले इन दिनों शाहरुख खान की फिल्म ‘डंकी’ में काम करके इतरा रही हों लेकिन उन पर ओटीटी की फेवरिट हीरोइन का ठप्पा बहुत गाढ़े रंग का लग चुका है। 'हसीन दिलरूबा', 'रश्मि रॉकेट' ‘लूप लपेटा’ ‘तड़का’ और 'ब्लर' जैसी उनकी फिल्में ओटीटी प्लेटफार्म पर ही रिलीज हो सकीं। बीच में 'दोबारा' और 'शाबाश मिट्ठू' जैसी फिल्में थियेटर आईं तो चली नहीं। वह मानती भी हैं, 'हमेशा से फीमेल आर्टिस्ट की फिल्मों को बड़े स्टार्स के मुकाबले कम स्क्रीन मिलते है। मुझे हमेशा इस बात का मलाल रहा है कि थियेटर में हमेशा से ही भेदभाव रखा जाता है।'

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रश्मिका मंदाना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रश्मिका मंदाना 

'पुष्पा द राइज' से पैन इंडिया स्टार बनने का सपना देखने वाली अभिनेत्री रश्मिका मंदाना को हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने बड़े परदे पर फिल्म 'गुड बाय' में पूरी तरह नकार दिया। उनकी दूसरी ही फिल्म 'मिशन मजनू' थियेटर में रिलीज ना होकर सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई। बाकी अभिनेत्रियों के मुकाबले थोड़ा बेहतर स्थिति में वह इसलिए हैं क्योंकि उनके पास ‘एनिमल’ और ‘पुष्पा द रूल’ जैसी कुछ बड़े बजट की फिल्में हैं जिन पर हिंदी सिनेमा के दर्शकों का ध्यान टिका हुआ है।

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तमन्ना भाटिया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

तमन्ना भाटिया 

मधुर भंडारकर के निर्देशन में बनी तमन्ना भाटिया की फिल्म 'बबली बाउंसर' को भी थियेटर नहीं मिले और ये ओटीटी पर रिलीज हुई। इस बारे में  तमन्ना भाटिया का कहना है कि ओटीटी से बदलाव अब यह आया है कि स्टारडम का दौर खत्म हो गया है। अब सिर्फ कलाकार और अच्छे कंटेंट चलेंगे, चाहे ओटीटी हो या फिर थिएटर। हालांकि, उनकी फिल्म को लोगों ने ओटीटी पर भी पसंद नहीं किया।

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