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Who is first Female Actor: हिंदी सिनेमा के इतिहास में निकली बड़ी खामी, फातिमा बेगम नहीं हैं पहली अभिनेत्री

Wed, 28 Dec 2022 02:09 PM IST
पलक शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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दुर्गाबाई कामत - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
भारतीय सिनेमा की जब पहली महिला स्टार की बात होती है तो इंटरनेट पर सबसे पहले देविका रानी का नाम आता है। देविका रानी ने साल 1933 में फिल्म 'कर्मा' से डेब्यू किया था और पहली ही फिल्म में चुंबन दृश्य को लेकर खूब चर्चा में रही। इंटरनेट पर थोड़ा और सर्च करते हैं तो पहली महिला कलाकार के रूप में 'फातिमा बेगम' का नाम भी आता है। फातिमा बेगम ने साल 1922 में आर्देशिर ईरानी की साइलेंट फिल्म 'वीर अभिमन्यु' के जरिए हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया और बाद में वह निर्माता निर्देशक भी बनी। लेकिन, क्या आपको पता है कि इंटरनेट पर उपलब्ध ये जानकारी असत्य है क्योंकि भारतीय सिनेमा को पहली महिला कलाकार तो फिल्म ‘मोहिनी भस्मासुर’ में ही मिल गई थी।
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दुर्गाबाई कामत - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हाल ही में फिल्म कलाकारों की संस्था सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन (सिंटा) ने दिग्गज अभिनेता विक्रम गोखले की याद में एक श्रद्धांजलि सभा की। इस सभा के दौरान खुलासा हुआ कि उनकी परदादी भी सिनेमा का हिस्सा रह चुकी हैं। इस बारें और पड़ताल करने पर पता चलता है कि गोखली की परदादी ही भारतीय सिनेमा की पहली महिला स्टार हैं और उनका नाम था, दुर्गाबाई कामत। भारतीय सिनेमा के जनक दादा साहेब फाल्के ने अपनी दूसरी फिल्म 'मोहिनी भस्मासुर' में दुर्गाबाई कामत को ब्रेक दिया था और यह फिल्म नवंबर 1913 में रिलीज हुई थी।
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आलम आरा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

दादा साहेब फाल्के ने जब साल 1913 में पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' का निर्माण किया तो उस समय फिल्म में काम करने के लिए कोई महिला कलाकार राजी नहीं हुई तो दादा साहेब फाल्के ने अन्ना सालुंके को तारामती के किरदार के लिए चुना। उस समय महिलाओं का फिल्मों में काम करना बहुत ही हेय दृष्टि से देखा जाता था। जब विक्रम गोखले की परदादी ने 'मोहिनी भस्मासुर' में काम किया तो उन्हें भी काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।
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कमला बाई गोखले - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
'मोहिनी भस्मासुर' में दुर्गाबाई कामत ने पार्वती की भूमिका निभाई थी और इसी फिल्म में उनकी बेटी कमला बाई गोखले ने मोहिनी की भूमिका निभाई। कमला बाई गोखले उस समय महज 13 साल की थीं और इस तरह से वह भारतीय सिनेमा पहली महिला बाल कलाकार बन गईं साल 1913 में भारतीय सिनेमा के इतिहास में दो महिला कलाकारों का पर्दापण हुआ। वह ऐसा दौर था जहां प्रदर्शन कला में महिलाओं के काम करने पर उन्हें ‘बाईजी’ का तमगा मिलता था और ये तमगा उन दिनों वेश्याओं के लिए भी प्रचलित था।
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आर्देशिर ईरानी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तफ्तीश करने पर पता चलता है कि फिल्मों में काम करने से पहले दुर्गाबाई कामत ट्रेवलिंग थिएटर कंपनी से जुड़ी और घूम घूम कर अभिनय करती थी। थिएटर में अभिनय करने को भी तब सम्मानजनक रूप से नहीं देखा जाता था। दुर्गा बाई ब्राह्मण परिवार से थीं और उनके फिल्मों व रंगमंच में काम करने को लेकर खूब हंगामा हुआ। पंचायतें हुईं और उस समय के ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने दुर्गाबाई कामत का बहिष्कार कर दिया। लेकिन बताते हैं दुर्गाबाई कामत हिम्मत नहीं हारी और अपने रास्ते पर डटी रहीं।
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