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जानिए क्या हुआ जब आनंद कुमार ने मां को दिखाया सुपर 30 का ट्रेलर, अमर उजाला से एक्सक्लूसिव मुलाकात

Fri, 14 Jun 2019 07:14 AM IST
Mishra Mishra अक्षित त्यागी, अमर उजाला, मुंबई
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Anand Kumar - फोटो : social media
गरीब बच्चों के आईआईटी में दाखिले का सपना पूरा करने में जुटे बिहार के आनंद कुमार की बायोपिक सुपर 30 अगले महीने रिलीज होने जा रही है। इस बायोपिक के निर्माण से आनंद कुमार भी शुरू से जुड़े रहे हैं। उनसे एक खास मुलाकात।

सुपर 30 का ट्रेलर देखकर घर वालों की क्या प्रतिक्रिया रही?
इस ट्रेलर का मेरे घर वालों का बहुत इंतजार रहा है। बहुत खुश हुए सब इसे देखकर। लेकिन, सबसे ज्यादा भावुक मेरी मां हुईं। वह रो दीं ये ट्रेलर देखकर। मैं उन्हें जब ट्रेलर दिखा रहा था तो वह कांप रही थीं। कहने लगीं कि हमें यकीन ही नहीं हो रहा कि इस फिल्म में तू है। अब सभी को फिल्म का बेसब्री से इंतजार है और ये सबसे ज्यादा उन बच्चों को है जो हमारे यहां पढ़ चुके हैं। 
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Anand Kumar - फोटो : social media
इस फिल्म के साथ आप कितना जुड़े रहे?
अक्सर ऐसा होता है कि किसी बायोपिक बनाने के लिए निर्माता इसके राइट्स खरीदते हैं, कहानी पूछते हैं और चले जाते हैं फिल्म बनाने। मैं हर कदम पर इनके साथ रहा। शूटिंग के दौरान भी फिल्ममेकर्स ने मुझसे सेट्स पर रहने को कहा। लेकिन कोचिंग छोड़कर मैं जा नहीं सकता। एक बार मैं जब शूटिंग पर गया तो ऋतिक खुद चलकर मेरे पास आए। मुझे लगा कि मैं खुद को ही आइने में देख रहा हूं। उनकी बोली भी बिल्कुल मेरे जैसी हो गई थी। मैंने उनसे मगही में बात की तो उन्होंने जवाब भी मगही में ही दिया, दिल खुश हो गया उनकी मेहनत देखकर।
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anand kumar - फोटो : Twitter
अपने बारे में बताइए कि आप इंजीनियर बनते बनते अध्यापक कैसे बन गए, सुना है आपने सरकारी नौकरी भी छोड़ दी थी?
पिताजी चाहते थे कि मैं पढ़ लिखकर वैज्ञानिक या अध्यापक बनूं और फिर लोगों के लिए मिसाल बनूं। गणित मेरा प्रिय विषय रहा। मेरे लेख तमाम जर्नल्स में छपने लगे और मुझे कैंब्रिज यूनीवर्सिटी में दाखिला भी मिल गया। लेकिन, तमाम जतन करने भी हम हवाई जहाज के टिकट भर के पैसे नहीं जुटा सके। इसी सदमे में मेरे पिताजी गुजर गए। पिताजी पोस्ट ऑफिस में थे, उनके गुजर जाने पर मुझे अनुकंपा के आधार पर नौकरी ऑफर हुई थी पर मैंने मना कर दिया। मां हर पल मेरे साथ रहीं। उन्होंने पापड़ बनाकर घर चलाया है। 
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anand kumar with wife - फोटो : Twitter
कुछ छात्रों ने आपके खिलाफ मुकदमा भी किया है, क्या कहना है इस विवाद के बारे में?
यह सब फिल्म बनने के बाद शुरू हुआ। ये बच्चे न मेरे संपर्क में कभी आए और न ही मुझसे पढ़े हैं। किसी ने मेरे संस्थान की प्रवेश परीक्षा तक नहीं दी है। मैं और मेरा भाई दिन रात करके यह संस्थान चलाते हैं। हम सरकारी मदद भी नहीं लेते हैं। किसी भी इंसान की तरक्की होती है तो उसकी राह में रोड़े अटकाने वाले बहुत लोग आ जाते हैं। मुझे इन बच्चों से पूरी सहानुभूति है। लगता है कि ये लोग किसी के बहकावे में आ गए।
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