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छिछोरे के डेरेक की युवाओं को सलाह, पहले खुद को जानो, फिर दूसरों से तुलना करने की सोचो

Fri, 27 Sep 2019 07:21 AM IST
Mishra Mishra मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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Chhichhore - फोटो : Social Media
बॉक्स ऑफिस पर 132 करोड़ रुपये कमा चुकी निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म छिछोरे में डेरेक बने ताहिर राज भसीन दिल्ली से हैं। 32 साल के डेरेक बास्केटबाल के खिलाड़ी रहे हैं और जल्द कबीर खान की फिल्म 83 में सुनील गावस्कर का किरदार करते नजर आने वाले हैं।

आपके घर में तो एयरफोर्स में नौकरी करने की परंपरा रही है, आप सिनेमा में कैसे आ गए?
आपने सही कहा मेरे दादाजी और पिता जी दोनों ही फाइटर पायलट थे। इस चक्कर में पूरी परवरिश पूरे हिंदुस्तान में हुई है। घर बदलता था तो दोस्त भी बदल जाते थे। बस एक ही चीज़ मेरी पक्की दोस्त रही और वो है फिल्में।
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Tahir Raj Bhasin - फोटो : Social Media
बचपन में देखी पहली फिल्म कौन सी रही?
अभी छिछोरे रिलीज हुई है और मुझे याद है मैं रिश्तेदारों से मिलने दिल्ली गया था वहीं पहली बार सिनेमाघऱ में मैंने जो पहली फिल्म देखी वो थी, जो जीता वही सिकंदर। मुझे यकीन नहीं हो रहा कि मैं इस बार उसी तरह की फिल्म का हिस्सा बन गया। वही हॉस्टल की लड़ाइयां हैं, वही जद्दोजहद है। वैसे ही दोस्त हैं।

अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान की तरह आप भी दिल्ली से मुंबई आए, शाहरुख खान से तो काफी मिलती है आपकी करियर यात्रा?
हां, मैं भी दिल्ली का हूं। मैंने भी बैरी जॉन के यहां से अभिनय सीखा। नकारात्मक किरदारों से अपने करियर की शुरुआत की। अमिताभ बच्चन सर की पहली फिल्म अग्निपथ मैंने ग्वालियर में कॉलेज के दिनों में एक ओपन थिएटर में देखी। मुझे अब भी याद है उस दिन बारिश हो रही थी और हम छाता लेकर फिल्म देख रहे थे। कांचा चीना के किरदार ने उस फिल्म में मुझे काफी प्रभावित किया।
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Tahir Raj Bhasin - फोटो : Social Media
फिल्म छिछोरे के क्लाइमेक्स में बास्केटबॉल का मैच है और आप मैच में कहीं नहीं दिख रहे जबकि आप ये खेल खूब खेल चुके हैं?
मैंने नितेश सर से बोला था कि मुझे खेलने दें। बास्केट बॉल छोड़कर मुझसे कबड्डी खिलवाई है, वॉलीबॉल खिलवाया है, फुटबॉल खिलवाया है। हर एक खेल जो मैं नहीं खेलता था वो मैंने फिल्म छिछोरे में खेला है। मुझे लगता है कि यह भी एक अभिनेता के जीवन का हिस्सा है जो हमें बहुत कुछ सिखाता है। मैंने ज़िंदगी में कभी सिगरेट नहीं पी, इस फिल्म में किरदार की मांग थी तो मैंने हर्बल सिगरेट पीकर अपना किरदार निभाया।
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Tahir Raj Bhasin - फोटो : Social Media
छिछोरे का संदेश यह भी है कि इट्स ओके टू फेल। और क्या कहना चाहती है ये फिल्म?
यह फिल्म कई तरह के संदेश देती है। आज जब मैं कहीं घूमने जाता हूं तो देखता हूं कि बच्चे इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लगे रहते हैं। यह गलत है। किसी और से अपनी तुलना करना और भी गलत है। छिछोरे का संदेश है कि किसी और से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए। पहले अपने आपको जानो, फिर दूसरों से तुलना करने की सोचो।
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