फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Emergency: 'गूंगी गुड़िया अब बोलने लगी', इमरजेंसी के ये डायलॉग्स सुनकर सिनेमाघरों में खूब बजीं तालियां

Sat, 18 Jan 2025 07:18 PM IST
दीक्षा पाठक एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

इन सब के अलावा फिल्म के डायलॉग भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि कंगना के ये डायलॉग काफी दमदार हैं। तो आइए आपको फिल्म के वो डायलॉग्स बताते हैं, जिसे सुनकर दर्शक खुद को ताली बजाने से नहीं रोक पा रहे हैं।
विज्ञापन
1 of 9
इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
 कंगना रनौत की लंबे समय से अटकी पहली सोलो डायरेक्टोरियल इस शुक्रवार को सिनेमाघरों में हिट रही। फिल्म में कंगना के हाव-भाव से लेकर उनके लुक की खूब तारीफ हो रही है। प्रशंसकों का कहना है कि कंगना ने इंदिरा गांधी के किरदार को बखूबी निभाया है। इन सब के अलावा फिल्म के डायलॉग भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि कंगना के ये डायलॉग काफी दमदार हैं। तो आइए आपको फिल्म के वो डायलॉग्स बताते हैं, जिसे सुनकर दर्शक खुद को ताली बजाने से नहीं रोक पा रहे हैं।
विज्ञापन

2 of 9
इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
‘राजनीति में कोई सगा नहीं होता’
ये संवाद तब का है, जब पंडित जवाहर लाल नेहरू इंदिरा को अपना उत्तराधिकारी बनाने से पीछे हटते हैं और इंदिरा असम को चीन में शामिल होने से रोक देती हैं। यह डायलॉग फिल्म की शुरुआत का हिस्सा होता है।
विज्ञापन

3 of 9
इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
‘नफरत-नफरत, नफरत और मिला क्या है मुझे इस देश से’
यह डायलॉग तब बोला गया है, जब इंदिरा के खिलाफ देशभर में विद्रोह होता है। विपक्ष पार्टी उनके खिलाफ आंदोलन कर रही होती है और उन्हें कुर्सी से हटाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी संपूर्ण क्रांति पर उतर आते हैं।

4 of 9
इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
'इंडिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इज इंडिया'
फिल्म का यह डायलॉग कंगना तब बोलती हैं, जब अखबार में उनके किए गए सराहनीय कामों की प्रशंसा होती है, उसमें एक अखबार की हेडलाइन होती है, ” इंडिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इज इंडिया”।
विज्ञापन

5 of 9
इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
'मैं ही कैबिनेट हूं'
इमरजेंसी के इस डायलॉग पर सिनेमाघरों में खूब तालियां बजती है। यह संवाद कंगना तब बोलती हैं, जब देशभर में इमरजेंसी लागू करना होता है और इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी चाहिए होती है। इस सीन में कंगना के अभिनय की भी लोगों ने खूब प्रशंसा की है।
विज्ञापन

6 of 9
इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
‘जिसके हाथ में सत्ता होती है वो कहलाता है शासक’
ये डायलॉग फिल्म के इस सीन का है, जब इंदिरा अपनी बुआ के व्यवहार से परेशान होकर अपने दादा मोतीलाल नेहरू के पास जाती हैं और उनकी शिकायत करती हैं। इस पर मोतीलाल नेहरू छोटी इंदिरा से यह संवाद कहते हैं।
विज्ञापन

7 of 9
इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
‘एक हारा हुआ इंसान कभी किसी की जीत बर्दाश्त नहीं कर सकता’
यह डायलॉग कंगना तब बोलती हैं, जब असम का एक मुद्दा उठता है. जहां यह कहा जा रहा है कि- इंदिरा गांधी ने असम जाकर उसे कश्मीर बनने से बचा लिया। जवाहर लाल नेहरू इस बात से खफा होते हैं और इंदिरा को खरी-खोटी सुनाते हैं। इस पर वह कहती हैं कि ‘एक हारा हुआ इंसान कभी किसी की जीत बर्दाश्त नहीं कर सकता।

8 of 9
इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
‘गूंगी गुड़िया ने अपने बाप को नीचे गिराकर उसकी कुर्सी को हड़प ली'
फिल्म में यह संवाद सतीश कौशिक ने बोली था। जब इंदिरा गांधी अपने पिता जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ लेती हैं। इस डायलॉग को लोगों ने काफी पसंद किया है।
विज्ञापन

9 of 9
इमरजेंसी - फोटो : अमर उजाला
‘संपूर्ण व्यवस्था बदलने का एक ही रास्ता है संपूर्ण क्रांति’
फिल्म में यह संवाद अनुपम खेर द्वारा बोला गया है, जब भारत की जनता इंदिरा गांधी की इमरजेंसी से परेशान हो जाती है और आम लोगों को जेल में बंद कर दिया जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें