इन सब के अलावा फिल्म के डायलॉग भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि कंगना के ये डायलॉग काफी दमदार हैं। तो आइए आपको फिल्म के वो डायलॉग्स बताते हैं, जिसे सुनकर दर्शक खुद को ताली बजाने से नहीं रोक पा रहे हैं।
कंगना रनौत की लंबे समय से अटकी पहली सोलो डायरेक्टोरियल इस शुक्रवार को सिनेमाघरों में हिट रही। फिल्म में कंगना के हाव-भाव से लेकर उनके लुक की खूब तारीफ हो रही है। प्रशंसकों का कहना है कि कंगना ने इंदिरा गांधी के किरदार को बखूबी निभाया है। इन सब के अलावा फिल्म के डायलॉग भी काफी पसंद किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि कंगना के ये डायलॉग काफी दमदार हैं। तो आइए आपको फिल्म के वो डायलॉग्स बताते हैं, जिसे सुनकर दर्शक खुद को ताली बजाने से नहीं रोक पा रहे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
‘राजनीति में कोई सगा नहीं होता’
ये संवाद तब का है, जब पंडित जवाहर लाल नेहरू इंदिरा को अपना उत्तराधिकारी बनाने से पीछे हटते हैं और इंदिरा असम को चीन में शामिल होने से रोक देती हैं। यह डायलॉग फिल्म की शुरुआत का हिस्सा होता है।
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‘नफरत-नफरत, नफरत और मिला क्या है मुझे इस देश से’
यह डायलॉग तब बोला गया है, जब इंदिरा के खिलाफ देशभर में विद्रोह होता है। विपक्ष पार्टी उनके खिलाफ आंदोलन कर रही होती है और उन्हें कुर्सी से हटाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी संपूर्ण क्रांति पर उतर आते हैं।
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'इंडिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इज इंडिया'
फिल्म का यह डायलॉग कंगना तब बोलती हैं, जब अखबार में उनके किए गए सराहनीय कामों की प्रशंसा होती है, उसमें एक अखबार की हेडलाइन होती है, ” इंडिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इज इंडिया”।
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'मैं ही कैबिनेट हूं'
इमरजेंसी के इस डायलॉग पर सिनेमाघरों में खूब तालियां बजती है। यह संवाद कंगना तब बोलती हैं, जब देशभर में इमरजेंसी लागू करना होता है और इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी चाहिए होती है। इस सीन में कंगना के अभिनय की भी लोगों ने खूब प्रशंसा की है।
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‘जिसके हाथ में सत्ता होती है वो कहलाता है शासक’
ये डायलॉग फिल्म के इस सीन का है, जब इंदिरा अपनी बुआ के व्यवहार से परेशान होकर अपने दादा मोतीलाल नेहरू के पास जाती हैं और उनकी शिकायत करती हैं। इस पर मोतीलाल नेहरू छोटी इंदिरा से यह संवाद कहते हैं।
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‘एक हारा हुआ इंसान कभी किसी की जीत बर्दाश्त नहीं कर सकता’
यह डायलॉग कंगना तब बोलती हैं, जब असम का एक मुद्दा उठता है. जहां यह कहा जा रहा है कि- इंदिरा गांधी ने असम जाकर उसे कश्मीर बनने से बचा लिया। जवाहर लाल नेहरू इस बात से खफा होते हैं और इंदिरा को खरी-खोटी सुनाते हैं। इस पर वह कहती हैं कि ‘एक हारा हुआ इंसान कभी किसी की जीत बर्दाश्त नहीं कर सकता।
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‘गूंगी गुड़िया ने अपने बाप को नीचे गिराकर उसकी कुर्सी को हड़प ली'
फिल्म में यह संवाद सतीश कौशिक ने बोली था। जब इंदिरा गांधी अपने पिता जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री पद की शपथ लेती हैं। इस डायलॉग को लोगों ने काफी पसंद किया है।
‘संपूर्ण व्यवस्था बदलने का एक ही रास्ता है संपूर्ण क्रांति’
फिल्म में यह संवाद अनुपम खेर द्वारा बोला गया है, जब भारत की जनता इंदिरा गांधी की इमरजेंसी से परेशान हो जाती है और आम लोगों को जेल में बंद कर दिया जाता है।