एक दूजे के लिए
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तो किस्सा कुछ यूं है कि तमिल सिनेमा के मशहूर निर्देशक के बालाचंदर ने साल 1973 में एक नए हीरो कमल हासन को अपनी फिल्म अरंगेत्रम में लॉन्च किया। बचपन से लेकर जवानी तक कमल हासन ने फिल्मों में खूब काम किया लेकिन हीरो वह इसी फिल्म से बने। तमिल में खूब नाम चमका तो पड़ोस में तेलुगू फिल्में बनाने वाले कमल हासन के चक्कर लगाने लगे। रोज उनके पास लोग पहुंच जाते किसी न किसी नई कहानी का प्रस्ताव लेकर। और, कमल हासन ने भी एक दिन सबको बोल ही दिया, मेरी तेलुगू फिल्म बनेगी तो सिर्फ के बालाचंदर के साथ। कमल हासन ने बोल तो दिया लेकिन के बालाचंदर से पूछ के थोड़े ही बोला था। बोलना था सो बस बोल दिया। लेकिन, उस्ताद अपने शागिर्दों के लिए क्या कुछ नहीं करते। द्रोणाचार्य ने अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर साबित करने के लिए एकलव्य का अंगूठा तक कटवा लिया था। के बालाचंदर के लिए भी कमल हासन किसी अर्जुन की तरह ही थे। उन्होंने कहानी सोचनी शुरू की।
एक तमिल लड़का और एक तेलुगू लड़की। दोनों की प्रेम कहानी। फिल्म का नाम ‘मारो चरित्रा’ यानी एक और इतिहास। हीरो कमल हासन, हीरोइन एक स्कूल में पढ़ने वाली गुमनाम सी लड़की अभिलाषा जिसका नंबर आडीशन में 162वां था और जिसे लेने के हक में के बालाचंदर की यूनिट का एक भी आदमी नहीं था, उसका नाम रखा गया सरिता। फिल्म में तेलुगू की ही उभरती स्टार माधवी को भी लिया गया। बालाचंदर ने एक कमाल और किया। पूरी फिल्म उन्होंने ब्लैक एंड व्हाइट में शूट कर डाली, ये दिखाने के लिए कहानी अच्छी हो तो उसके एहसासों के रंग के आगे दुनिया के सारे रंग फीके हैं। फिल्म सुपर हिट रही। कमल हासन तमिल और मलयालम के सुपरस्टार थे ही अब वह तेलुगू के भी हिट हीरो बन गए। पूरी फिल्म तेलुगू में और वह बोलते रहे तमिल।
ऐसा ही कुछ किया कमल हासन ने इसी फिल्म के हिंदी रीमेक एक दूजे के लिए में। वासू और सपना की ये कहानी कालजयी प्रेम कहानी है। फिल्म पूरी होने के बाद के बालाचंदर ने उस समय के शो मैन राज कपूर को ये फिल्म देखने का न्यौता दिया। राज कपूर आए। फिल्म देखी और क्लाइमेक्स पर नाक भौं सिकोड़ ली। बोले ये एंडिंग जमी नहीं। के बालाचंदर ने कौन सा राज कपूर को जमाने के लिए ये फिल्म दिखानी थी, वो ये जानते थे कि फिल्म की एंडिंग कम लोगों को ही पसंद आएगी। लेकिन, जब पसंद आएगी तो लोग इसी को देखने बार बार आएंगे। वही हुआ। सच्चा प्रेम कभी पूरा नहीं होता। ये इस फिल्म की कहानी ने फिर दिखाया। फिल्म दो दो साल तक सिनेमाघरों में लग रही। वासू और सपना का नाम लैला मजनू, शीरीं फरहाद और हीरा रांझा की कहानियों की तरह युवाओं के अड्डों में तैरने लगा।
पढ़ें: बाइस्कोप: आज ही रिलीज हुई थी अक्षय की 'राउडी राठौर', वाजिद खान ने मीका संग गाया था ये हिट गाना