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Abhishek Pathak Interview: 'अजय देवगन की फिल्में देखकर मैं बना निर्देशक, मूल फिल्म की कहानी में किए ये बदलाव'

Mon, 14 Nov 2022 12:04 PM IST
निधि पाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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अभिषेक पाठक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म 'उजड़ा चमन' से निर्देशन में डेब्यू करने वाले अभिषेक पाठक को इस बार सुपरहिट फिल्म 'दृश्यम' की सीक्वल 'दृश्यम 2' के निर्देशन की जिम्मेदारी मिली है। फिल्म 'दृश्यम' के निर्देशक निशिकांत कामत के साथ काम करने के अपने अनुभवों, अजय देवगन के सामने ही बड़े होकर अब उनको ही निर्देशित करने के मिले मौके और मूल मलयालम फिल्म ‘दृश्यम 2’ के ओटीटी पर रिलीज हो जाने के बावजूद हिंदी में इसे सिनेमाघरों तक नए अंदाज में पहुंचाने की चुनौतियों के बारे में अभिषेक ने ‘अमर उजाला’ के साथ ये खास बातचीत की। फिल्म ‘दृश्यम 2’ की कहानी में इस बार अक्षय खन्ना की एक नए किरदार के रूप में एंट्री भी हो रही है।
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अभिषेक पाठक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
'दृश्यम' का निर्देशन निशिकांत कामत ने किया। अब इसके सीक्वल की जिम्मेदारी आप पर है। निशिकांत के साथ काम करने की कुछ यादें साझा करना चाहेंगे?

निशिकांत कामत का यूं दुनिया छोड़ जाना बहुत ही दुखद है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब हम उन्हें याद न करते हों। वह बहुत ही शांत स्वभाव के इंसान थे और बिना किसी शोर शराबे के काम करने में यकीन करते थे। यह बात खास तौर पर मैंने निशिकांत से सीखी। शूटिंग के बीच में फुर्सत होने पर हम बातें करते तो उसमे भी उनका फोकस काम पर ही रहता था। उस समय ऐसा सोचा नहीं था कि एक दिन ऐसा भी समय आएगा जब मुझे 'दृश्यम 2' का निर्देशन करना पड़ेगा।

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अभिषेक पाठक, श्रिया सरन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, ये कब लगा कि 'दृश्यम' का सीक्वल हिंदी में भी बनाना ही चाहिए?

'दृश्यम' एक बहुत ही अच्छा ब्रांड बन गया है। इसे मूल रूप से मलयालम में बनाने वाली कंपनी आशीर्वाद सिनेमा ने इसके सीक्वल की पहल की और जब उन्होंने इसकी सीक्वल मलयालम में बनाई तो उन्होंने हमें इसे देखने के लिए बुलाया। हम तो इसके लिए पहले से मन बनाए बैठे थे। बस, फिल्म की आधिकारिक रीमेक बनाने के अधिकार खरीदकर हमने काम शुरू कर दिया। और, तब मेरे पिता कुमार मंगत ने कहा कि इसे मुझे ही निर्देशित करना चाहिए क्योंकि इसके पहले वाली फिल्म के निर्माण के दौरान मेरा फिल्म से शुरू से लेकर रिलीज के बाद तक का नाता रहा है। रीमेक को लेकर मेरा नजरिया ये था कि इसे हू ब हू वैसा ही नहीं बनाना है, इसलिए मैंने इसमें कुछ तत्व अलग से जोड़े हैं।

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अभिषेक पाठक, अक्षय खन्ना - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दक्षिण भारतीय फिल्मों की रीमेक का इस साल बहुत अच्छा प्रतिसाद नहीं मिला है, ऐसे में दबाव तो आप पर भी होगा?

अगर रीमेक को सही तरीके से बनाया जाए तो लोग उसे जरूर पसंद करेंगे। जिन रीमेक फिल्मों की तरफ आपका इशारा है, उनमें से अधिकतर के हिंदी संस्करण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं। 'दृश्यम 2' अभी हिंदी में डब होकर कहीं भी मौजूद नहीं है। हमने मलयालम फिल्म के अधिकार लेकर इसे सीधे उसकी नकल नहीं कर दी है। हमने इसको अपने हिसाब से बनाया है।
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दृश्यम 2 - फोटो : सोशल मीडिया
और, अजय देवगन को निर्देशित करना कितना चुनौती भरा रहा?

मैं कहूंगा कि उन्हें निर्देशित करना कोई चुनौती नहीं रही। उनको मैं बचपन से जानता हूं। 'ओंकारा' में निर्माण सहायक के रूप में शुरुआथ करने से लेकर अब तक मेरी कोई डेढ़ दशक की सिनेयात्रा रही है। पहले मैंने 'दृश्यम 2' की हिंदी पटकथा तैयार की और उसे लेकर अजय भाई के पास गया तो वह काफी उत्साहित दिखे। हां, शूटिंग के पहले दिन मैं नर्वस था और उसके पहले वाली पूरी रात मैं सो नहीं पाया। यह मेरे लिए बहुत बड़ी फिल्म है। लेकिन फिर धीरे धीरे सब सामान्य होता गया। सबको फिल्म की पटकथा में भरोसा था और सबको यही लगा कि हम एक अच्छी फिल्म बना रहे हैं।
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दृश्यम 2 - फोटो : सोशल मीडिया
अजय खुद भी निर्देशक हैं। क्या उन्होंने 'दृश्यम 2' की शूटिंग से पहले या शूटिंग के दौरान आपको कुछ सिखाया?

फिल्म 'दृश्यम 2' की शूटिंग मेरे लिए पहला मौका था मैं जब अजय देवगन के सामने किसी फिल्म की रचना को लेकर बात कर रहा था। शूटिंग के दौरान जब भी मैंने दो तीन टेक के बाद एक और टेक लेना चाहा तो उन्होंने कभी कोई सवाल नहीं किया। सीन की शूटिंग के बाद वह कभी अपना शॉट मॉनिटर पर देखने तक नहीं आए। वह देखकर समझ जाते थे कि मैं सही कर रहा हूं या नहीं। पटकथा और निर्देशक पर भरोसा करना मैंने उन्हें देखकर सीखा है और शूटिंग से पहले कागज पर पूरी तैयारी करना ही उनकी सबसे बड़ी सीख है।
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दृश्यम 2 - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जाहिर है कि अजय देवगन की पहली फिल्म 'फूल और कांटे' आपने बचपन में देखी होगी और अब आप उन्हें निर्देशित कर रहे हैं। उनकी किन फिल्मों ने आपको निर्देशक बनने में मदद की?

हां, सही कह रहे हैं आप। मैं पांच साल का था जब मैंने 'फूल और कांटे' देखी। उनकी दो फिल्मों 'ओंकारा' और 'कंपनी' ने मुझे काफी कुछ सिखाया है। इसके अलावा 'गंगाजल' और 'जख्म' देखकर भी काफी कुछ सीखा जा सकता है। निर्देशक बनने से पहले मैंने फिल्म 'नो स्मोकिंग' में अनुराग कश्यप का और उसके बाद अश्विन धीर का सहायक रहा। इन लोगों ने भी मुझे तराशने में काफी मदद की है। मैं लगातार सीखते रहना चाहता हूं। और, मेरी यही धारणा मुझे एक बेहतर निर्देशक और बेहतर इंसान बनाने में मदद करती रही है।
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अक्षय खन्ना, अभिषेक पाठक, तब्बू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'दृश्यम 2' में तब्बू और अक्षय खन्ना को निर्देशित करने का कैसा अनुभव रहा? 

जो कलाकार 'दृश्यम' में काम कर चुके थे, उनको ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं पड़ी। अक्षय खन्ना के साथ सबसे ज्यादा इस फिल्म को लेकर बातें और मुलाकातें हुई। उनके लिए ये एक नया विषय था। जब मैंने फिल्म 'दृश्यम 2' की कहानी लिखनी शुरू की थी तभी मैंने सोच लिया था कि अक्षय खन्ना ही यह किरदार निभाएंगे। उनको ध्यान में रखकर ही ये किरदार लिखा गया है।

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