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Diwali 2022 Special: अब शूटिंग पर हीरो नहीं चलाता गोली, पढ़िए कैसे रचे जाते हैं फ़िल्मों में धमाके

Tue, 25 Oct 2022 09:49 AM IST
मोहम्मद फायक अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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रोहित शेट्टी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सर्वोच्च न्यायालय ने जब से दिवाली पर पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाई है, तब से हर साल दिवाली से पहले कोई न कोई नेता इस पर लगी रोक हटाने के लिए कोई न कोई याचिका लेकर वहां पहुंच ही जाता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। लेकिन, आपको जानकर अचरज होगा कि हिंदी सिनेमा की एक्शन फिल्मों में बरसों से भारी मात्रा में इस्तेमाल होता रहा गोला बारूद अब बस नाम मात्र को रह गया है। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ये कदम उठाने की फिराक में हिंदी सिनेमा के एक्शन निर्देशक अरसे से रहे हैं और सिनेमा बनाने की तकनीक में आए बदलाव ने अब उनकी राह और आसान कर दी है। ‘अमर उजाला’ ने इस बारे में हिंदी सिनेमा के चर्चित एक्शन निर्देशक आर पी यादव समेत कई लोगों से बात की, आइए जानते हैं कि कैसे आया ये बदलाव...
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आर पी यादव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

इस तरह फिल्माए जाते थे धमाके

सिनेमा में विस्फोटक पदार्थों का प्रयोग बहुत कम हो गया है। एक्शन डायरेक्टर आर पी यादव से इस बारे में हमने खास बातचीत की। अजय देवगन की फिल्म 'तानाजी -द अनसंग वॉरियर' के लिए बेस्ट एक्शन डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड जीतने वाले आर पी यादव कहते हैं, 'अजय देवगन के पिता वीरू देवगन को मैं अपना गुरु मानता हूं और उनके सहायक के रूप में मैंने 10 साल तक काम किया। उस समय स्पेशल इफेक्ट्स और वीएफएक्स नहीं था। हम विस्फोटक वाले दृश्य में पेट्रोल का ज्यादा इस्तेमाल करते थे और कभी कभी पेट्रोल की जगह घासलेट (मिट्टी का तेल) और डीजल में रबर डालकर विस्फोटक वाले सीन करते थे।' 

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एक फिल्म का एक्शन सीन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अब सारा खेल एडिटिंग के दौरान

आर पी कहते हैं, 'इस समय स्पेशल इफेक्ट्स और वीएफएक्स की वजह से सिनेमा में गोला बारूद और विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल अब 50 प्रतिशत कम हो गया है। पर्यावरण को बचाने में भी इससे काफी मदद मिली है। अब हम थोड़ा बहुत विस्फोटक लगाकार एक्शन वाले दृश्यों की शूटिंग करते हैं और फिर उसका असर वीएफएक्स में बढ़ा देते हैं। अब इस तरह से दृश्यों को फिल्माना आसान और सुरक्षित हो गया है। पहले वीएफएक्स ना होने की वजह से फिल्मों में जितना गोला बारूद वाला दृश्य दिखता था, वह सब हमें आग लगाकर  ही शूट करना पड़ता था।' 

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एक फिल्म का एक्शन सीन - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

तकनीक और समझ का संतुलन जरूरी

स्पेशल इफेक्ट्स और वीएफएक्स के आने से  शूटिंग के दौरान विस्फोटक सीन फिल्माना आसान हो हुआ है, लेकिन आर पी के मुताबिक तकनीकी रूप से इसमें भी काफी सावधानियां बरतनी पड़ती है। वह कहते हैं, 'आप दिमाग से काम नहीं करेंगे तो सब खराब हो जाएगा। अभी विस्फोटक सीन शूट करने से पहले वीएफएक्स की तकनीकी टीम के साथ डिस्कस करना पड़ता है, इसमें कैमरामैन का समझदार होना बहुत जरुरी है। सीन के हिसाब से लाइट कितनी जरूरी है ये खास तौर से ध्यान देना पड़ता है, अगर लाइट कम ज्यादा हुई तो वह सीन वीएफएक्स के दौरान मैच नहीं होगा।'

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अमिताभ बच्चन के साथ आर पी यादव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

पेट्रोल की बजाय बैलून गैस

विस्फोटक सीन में इन दिनों पेट्रोल की बजाय बैलून गैस को काफी सुरक्षित माना जाता है। यह इतना सुरक्षित है कि शूटिंग के समय इसका इस्तेमाल पब्लिक के बीच भी कर सकते हैं और इसमें भी पेट्रोल वाला ही असर आता है। पहले कलाकार के साथ  आग से जलने वाला सीन फिल्माना  बहुत ही खतरनाक सीन होता है और इस तरह के सीन वही स्टंट आर्टिस्ट करते थे, जो काफी हिम्मती होते थे। पहले यह सीन स्टंट आर्टिस्ट फायर शूट पहन कर करते थे और फिर भी जरा सी लापरवाही हुई तो जान पर बन आती थी। अब फायर वाले सीन में फायर का इफेक्ट वीएफएक्स में ही किया जाता है। 

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इंद्र कुमार, अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित के साथ आर पी यादव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कम होती जा रही गोलीबारी
वीरू देवगन के साथ 'लाल बादशाह',  'इतिहास,' 'दिलजले', 'हकीकत' जैसी कई फिल्मों में स्टंट आर्टिस्ट के रूप में काम कर चुके एक्शन डायरेक्टर शहाबुद्दीन शेख कहते हैं, 'गन फायर के लिए बुलेट मंगाना भी अब प्रोडक्शन हाउस को महंगा पड़ता है। कई बार पिस्तौल से ठीक से फायर नहीं होता है तो कलाकार भी झल्ला जाते हैं और उनका परफॉर्मेंस ठीक से नहीं निकलता। अब इसके लिए हम वीएफएक्स की मदद लेते हैं। इससे फायदा ये होता है कि पैसे की बचत के साथ साथ कलाकार का अभिनय भी अच्छा निकल कर आता है।'  
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