सुभाष घई
हॉलीवुड में ऐसी कई फिल्में हैं जो ऐसी समस्याओं पर बनी दिखती हैं, लेकिन बॉलीवुड में ऐसा कुछ खास देखने को नहीं मिलता। इस पर सुभाष घई कहते हैं, 'हमारी रामायण पर कितने फिल्में बनीं, महाभारत पर कितनी फिल्में बनीं। ये सब वही है। राम हैं तो लखन भी हैं, कृष्ण योद्धा भी हैं तो बांसुरी भी हैं उनके हाथ में। आप देखें तो हमारी कहानी कहने का तरीका जो है वो संकटकाल को पकड़कर मनोरंजन से कैसे बताना, यही हमारा आर्ट है। कोरोना पर भी आपको कई कहानियां देखने को मिलेंगी, किसी का स्ट्रगल होगा तो कोई घर नहीं पहुंच पाया, किसी की नौकरी छूट गई आदि। कई लोग जुदा होंगे, कई मिलेंगे। इसको कोई डाक्यूमेंट्री दिखाएगा तो कोई मनोरंजक, लेकिन क्योंकि सिनेमा एक मनोरंजन का मुख्य जरिया है तो उसे वैसे ही दिखाया जाएगा। फिल्मों का अलग अलग रूप है तो जिसका जैसा नजरिया है, फिल्म आपको वैसे ही देखने को मिलेंगी।'