दिलीप कुमार
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दिलीप कुमार के फिल्मी करियर का वह शुरुआती दौर था। उनकी पहली फिल्म 'ज्वार भाटा' (1944) फ्लॉप हो चुकी थी। दिलीप कुमार अपने अभिनय की कोई खास छाप नहीं छोड़ पाए थे। हालांकि, इसके बाद भी उन्हें दर्शकों और निर्माता-निर्देशकों ने पूरी तरह खारिज नहीं किया था। दिलीप कुमार के अंदाज में कुछ तो बात थी कि लोग उनका सम्मान करते थे। इन्हीं में से एक थे के.आसिफ। दिलीप कुमार की आत्मकथा 'दिलीप कुमार-द सब्सटांस ऐंड द शेडो' में के आसिफ की पहली पत्नी और अभिनेत्री सितारा देवी ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा है, 'के. आसिफ ने हैंडसम एक्टर दिलीप कुमार के बारे में सुन रखा था। एक दिन बोले चलो एक बार इसको भी देख ही लूं। हालांकि, उस वक्त तक सलीम के रोल के लिए सप्रू ही उनके जहन में थे। लेकिन, उन्होंने सोचा किसी नए एक्टर के बारे में भी सोचने में कोई गुरेज नहीं। जब दिलीप भाई आए और हमारे ड्रॉइंग रू में बैठे तो एक लम्हे को मैंने खुद को बेजुबान सा महसूस किया। चेहरे पर चुंधियाते बाल और नूर की चमक। अंदाज में नफासत थी। उसे देखकर कोई भी कह सकता था कि वह एक खास चीज है, जिस पर अल्लाह का साया है।'