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दिलीप कुमार ने ऐसे जीता लोगों का दिल, जानिए दिग्गज अभिनेता के 10 सर्वोत्तम किरदार

Wed, 11 Dec 2019 02:40 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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दिलीप कुमार - फोटो : file photo
मोहम्मद युसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार आज 97 वर्ष के हो गए हैं। दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार भारतीय सिनेमा जगत  के ट्रेजडी किंग और पहले खान सुपरस्टार के रूप में पहचाने जाते हैं। पांच दशक से भी लंबे समय के करियर में उन्होंने दर्जनों ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं। उन्होंने साल 1944 में फिल्म 'ज्वार भाटा' से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। वहीं 1998 में फिल्म 'किला' में वह आखिरी दफा नजर आए। दिलीप कुमार के नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे अधिक पुरस्कार जीतने वाले भारतीय अभिनेता के तौर पर दर्ज है। इनमें 10 सर्वोत्तम अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार भी शामिल हैं।  हिंदी सिनेमा जगत का मुख्य हिस्सा बन चुके दिलीप कुमार के जन्मदिन के अवसर पर आज हम आपको उनके 10 बेहतरीन किरदारों के बारे में बताएंगे-
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daag - फोटो : amar ujala mumbai
दाग (1952)
इस फिल्म में दिलीप कुमार ने शंकर का किरदार निभाया है जो अपनी विधवा मां के साथ गरीबी में जीवन जी रहा है। खिलौने बेचकर वह अपना जीवन यापन करता।  उसे शराब पीने की लत पड़ जाती है। वह पार्वती (निम्मी ) को अपना दिल दे बैठता है। अपनी मां से बहस करने के बाद वह अपना जीवन बदलने का फैसला करता है।हालांकि उसके अतीत के दुश्मन उसके भविष्य को लगातार प्रभावित करते हैं।  इस फिल्म का निर्देशन अमिय चक्रवर्ती ने किया है। इस फिल्म के लिए दिलीप कुमार ने अपने करियर का पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का किरदार जीता था।
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devdas - फोटो : amar ujala mumbai
देवदास (1955)
1955 मे बनी यह फिल्म शरतचंद्र चटोपाध्याय के उपन्यास 'देवदास' पर आधारीत है। फिल्म में दिलीप कुमार ने देवदास का किरदार निभाया था जो एक आकर्षक  युवक होता है जो शराब के शिकंजे में फंस जाता है। फिल्म को बहुत अधिक सफलता मिली थी। देवदास हिंदी फिल्म जगत की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में एक है। दिलीप कुमार के साथ ही साथ पारो और चंद्रमुखी का किरदार निभाने वाली सुचित्रा सेन और वैजयंती माला के अभिनय को भी समीक्षकों द्वारा सराहा गया। इस फिल्म के जरिए दिलीप कुमार को सिनेमा जगत में एक सशक्त अभिनेता के तौर पर पहचान मिली।

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azaad - फोटो : amar ujala mumbai
आजाद (1955)
एस० एम० श्रीरामुलु नायडू निर्देशित इस फिल्म में दिलीप कुमार ने एक अमीर व्यक्ति और कुख्यात डाकू आजाद का किरदार निभाया है। फिल्म में शोभा (मीनाकुमारी) अगवा कर ली जाती हैं। उनके करीबी उन्हें ढूंढने की पूरी कोशिश करते हैं लेकिन उनका पता नहीं चलता है। फिर कुछ समय बाद जब शोभा वापस आती है और बताती है कि उसे आजाद ने बचाया और उसका काफी ख्याल रखा। वह आजाद से शादी करना चाहती है। हालांकि शोभा का परिवार इसके खिलाफ होता है।
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नया दौर - फोटो : file photo
नया दौर (1957)
आजादी के बाद की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की कहानी, गानें और एक्टिंग लोगों को खूब पसंद आई थी। बी. आर चोपड़ा निर्देशित इस फिल्म में दिलीप कुमार ने शंकर नामक एक तांगेवाले की भूमिका अदा की है जो बस की वजह से तांगेवालों की जीविका खत्म होने के खिलाफ लड़ता है। फिल्म में वैजयंती माला, अजीत और जीवन भी मुख्य किरदार में हैं।
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Madhumati - फोटो : social media
मधुमती (1958)
इस फिल्म में जहां दिलीप कुमार ने आनंद और देवेन्द्र नाम के दो व्यक्तियों का किरदार निभाया था तो वहीं वैजयंती माला ने मधुमती, माधवी और राधा नाम की तीन लड़कियों का रोल प्ले किया था। पुनर्जन्म पर आधारित इस फिल्म को लोगों ने इतना पसंद किया था कि आगे चलकर इस फिल्म की कई रीमेक फिल्में बनी जिनमें 'कुदरत', 'बीस साल बाद' और 'ओम शांति ओम' जैसी फिल्में शुमार हैं। दिलीप कुमार के निभाए दोनों ही किरदार लोगों को काफी पसंद आए थे। इस फिल्म में निभाए डबल रोल से उन्होंने फिल्म जगत में अपनी धाक जमा ली थी।
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मुगल ए आजम - फोटो : file photo
मुगल-ए-आजम (1960)
के. आसिफ निर्देशित यह फिल्म सिनेमा जगत की ऐसी फिल्म है जो फिर कभी दोबारा नहीं बनाई जा सकी। फिल्म में दिलीप कुमार ने अकबर के बेटे शहजादे सलीम का किरदार निभाया था। जिन्हें अपने दरबार की ही एक कनीज नादिरा (मधुबाला) से प्यार हो जाता है। दोनों के इस प्यार से अकबर नाराज हो जाते हैं। दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते हैं लेकिन अकबर इसकी इजाजत नहीं देते हैं और दोनों को जुदा करने के लिए जी जान लगा देते हैं। फिल्म में दिलीप कुमार ने जिस तरह से इश्क में डूबे शहजादे का रोल प्ले किया है वह आज भी एक मिसाल है।

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Kohinoor - फोटो : amar ujala mumbai
कोहिनूर (1961)
कहा जाता है कि फिल्मों में लगातार दुखों से भरे किरदार करने का असर दिलीप कुमार के निजी जीवन पर भी पड़ने लगा था। जिसके बाद उन्हें दूसरे तरह के किरदार करने की हिदायत दी गई। दिलीप कुमार ने इसके बाद फिल्म 'कोहिनूर' का चयन किया। फिल्म में दिलीप कुमार के अपोजिट मीना कुमारी हैं। दोनों राजकुमार और राजकुमारी के किरदार में हैं।  फिल्म में दोनों तलवारबाजी और डांस करते हुए नजर आ रहे हैं। इस फिल्म के हास्य से भरपूर अदाकारी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था।

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leader - फोटो : amar ujala mumbai
लीडर (1964)
इस फिल्म में दिलीप कुमार ने अभिनय के साथ ही लेखन में भी हाथ आजमाया था। इस फिल्म के लिए दिलीप कुमार ने  फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार अपने नाम किया था। यह एक पॉलीटिकल ड्राम फिल्म है जिसमें विजय (दिलीप कुमार) पर एक राजनेता की हत्या का आरोप लग जाता है। जिसके बाद विजय और सुनीता (वैजयंती माला) इस साजिश को नाकाम करते हैं।  

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Ram Aur Shyam - फोटो : amar ujala mumbai
राम और श्याम (1967)
इस फिल्म में फिर एक बार दिलीप कुमार डबल रोल में नजर आए। इसमें एक तरफ उन्होंने तेज तर्रार युवक का किरदार निभाया है तो वहीं दूसरी तरफ वह भोल भाले किरदार में भी नजर आए। फिल्म में दिलीप कुमार के अलावा , प्राण, वहीदा रहमान और मुमताज भी अहम करिदार में नजर आए।
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Shakti - फोटो : amar ujala mumbai
शक्ति (1982)
शक्ति में दिलीप कुमार एक पुलिस अफसर  अश्विनी कुमार  के किरदार में हैं। वहीं अमिताभ बच्चन उनके बेटे का रोल प्ले कर रहे हैं। अपने फर्ज को पूरी ईमानदारी से निभाने के चलते अश्विनी की अपने बेटे से थोड़ी दूरी बढ़ जाती है। आगे चलकर विजय एक गैंगस्टर बन जाता है। फिल्म में दिलीप कुमार ने  कर्त्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी का जो किरदार निभाया है वह आज के कलाकारों के लिए भी एक उदाहरण है।
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