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कृति सेनन ने खोले दिल के राज, बोलीं-पहली बार मुंबई गई, बार-बार रोई, कई ऑडिशन में रिजेक्ट

Mon, 03 Jun 2019 12:28 PM IST
विजय जैन मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला
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kriti sanon
अकेली आई थी मुंबई। नोएडा में बीटेक कर रही थी, फिल्मों के लिए मुंबई पहुंच गई। एक अनजान शहर में लगभग अकेली। जब मैं दिल्ली से मुंबई आई, तो मैं थोड़ा खोई हुई थी, मुझे नहीं पता था कि मुझे क्या करना है। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि मैं पहले कभी अपने माता-पिता से दूर नहीं रही थी। ऐसे भी दिन थे, जब मैं मां से बात करते-करते रो जाया करती थी, क्योंकि शुरुआत में सब इतना मुश्किल होता है कि आप कुछ सोच या समझ ही नहीं पाते। 
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kriti sanon
फिर ऑडिशन्स का दौर शुरू हुआ। ऐसे कई लोग हैं, जो सपनों के साथ इस शहर में आते हैं। मैं भी उन्हीं में से थी। मुंबई शहर किसी से कोई सवाल नहीं करता। हर आने वाले का स्वागत करता है। मैं भी आई। हालांकि, कभी-कभी मैं एकदम चिढ़ जाती थी, फिर भी मैं सकारात्मक रही। मैंने कभी भागने की नहीं सोची। बस मेहनत करती रही। कई बार तो लोग मुझे इसलिए भी रिजेक्ट कर देते थे, क्योंकि उनकी नजर में मैं पर्फेक्ट थी। 
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Kriti Sanon - फोटो : instagram
एक बार का किस्सा मुझे याद है। कई ऑडिशन देने के बाद मुझे एक मौका मिला था। मैं जब उन व्यक्ति से मिलने पहुंची, तो उन्होंने कहा, "कृति तुम बहुत खूबसूरत हो। तुम्हारे में कुछ भी इंपर्फेक्ट नहीं है। कुछ ऐसा हो, जब स्क्रीन पर लोग तुम्हें देखें, तो रियल लगे।" मैं उनकी बात सुनकर बहुत निराश हो गई थी। हालांकि मैंने हार कभी नहीं मानी। दक्षिण भारत की फिल्में कीं। फिर जब फिल्म 'हीरोपंती' मिली, तब मुझे अहसास हुआ कि मैं भाग्यशाली हूं। 

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Kriti Sanon
इस फिल्म के लिए मेरा चयन होना एकदम सपने की तरह था। फिल्म के लिए ऑडिशन बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया था। कैमरा, लाइट्स, मेकअप और पूरे कॉस्ट्यूम के साथ मुझे डायलॉग बोलने के लिए दिया गया। तभी पहली बार मैंने टाइगर को देखा था। हमने फिल्म का एक सीन किया। ऑडिशन के तुरंत बाद मुझे बताया गया कि हम साजिद नाडियाडवाला सर से जल्द ही मिलेंगे। जब हम रास्ते में थे, तब मुझे बताया गया कि यह फिल्म मुझे मिल गई है। 
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kriti sanon
एक पल के लिए विश्वास ही नहीं हुआ। कार से ही मैंने अपने माता-पिता को फोन करके बताया और जब मैं अपने प्रबंधक के कार्यालय में गई, तो उन्होंने चॉकलेट के एक डिब्बे के साथ मेरा स्वागत किया। मैंने फिल्म साइन की और बस सफर शुरू हो गया। मेरे जीवन की अच्छी चीजें ऐसे ही अप्रत्याशित रूप से एक ही पल में हुई हैं।
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