पंजाबी फिल्मों के वैसे तो कई स्टार रहे हैं, लेकिन ऐसा सुपरस्टार ऐसा भी था जिसकी पॉपुलैरिटी और स्टारडम ने अच्छे-अच्छों के छक्के छुड़ा दिए थे...पर इस सुपरस्टार की पॉपुलैरिटी ही उसकी जान की दुश्मन बन जाएगी किसी ने सोचा भी नहीं होगा।
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वीरेंद्र सिंह
ये सुपरस्टार थे बॉलीवुड के ही-मैन कहे जाने वाले धर्मेंद्र के भाई वीरेंद्र सिंह। वीरेंद्र सिंह पंजाबी सिनेमा के बहुत बड़े सुपरस्टार थे। 80 के दशक में वीरेंद्र सिंह का एक तरह से पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री पर राज था। हर निर्माता-निर्देशक पहले अपनी फिल्म में वीरेंद्र सिंह को ही लेने के लिए अड़ जाता। वीरेंद्र सिंह ना सिर्फ एक बेहतरीन एक्टर थे बल्कि एक सक्सेसफुल डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी रहे।
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वीरेंद्र सिंह
अपने 12 साल के फिल्मी करियर में वीरेंद्र सिंह ने करीब 25 फिल्में बनाईं और सभी ब्लॉकबस्टर रहीं। सिर्फ पंजाबी ही नहीं वीरेंद्र ने दो हिंदी फिल्में भी बनाईं- 'खेल मुकद्दर का' और 'दो चेहरे'। दोनों ही फिल्में सफल रहीं थीं।
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वीरेंद्र सिंह
वीरेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 1975 में आई फिल्म 'तेरी मेरी एक जिंदड़ी' से की थी जिसमें उनके भाई धर्मेंद्र भी नजर आए थे। कम ही वक्त में वीरेंद्र सिंह पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के इतने बड़े सुपरस्टार बन गए कि उनकी सफलता से चिढ़ने वालों की फौज खड़ी हो गई।
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वीरेंद्र सिंह
यही चिढ़ वीरेंद्र सिंह की जान की दुश्मन बन बैठी। 1988 की बात है। उस वक्त वीरेंद्र सिंह फिल्म 'जट ते जमीन' की शूटिंग कर रहे थे और शूट के दौरान ही उनकी हत्या कर दी गई। वीरेंद्र की उस हत्या में किन लोगों का हाथ था ये तो पता नहीं चल पाया, लेकिन कहा जाता है कि उनकी लोकप्रियता ही उनकी जान की दुश्मन बन बैठी थी।
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वीरेंद्र सिंह
वीरेंद्र सिंह चंद सालों के अंदर ही पंजाबी सिनेमा के राजा बन बैठे और कुछ लोगों से ये बर्दाश्त नहीं हुआ। वहीं ऐसा भी कहा जाता है कि वीरेंद्र सिंह को कुछ आतंकवादियों ने मार दिया था।
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वीरेंद्र सिंह
दरअसल उस वक्त काफी आतंकी गतिविधियां चल रही थीं। वीरेंद्र सिंह को साफ हिदायत दी गई थी कि ऐसे माहौल में वो शूटिंग ना करें, लेकिन वो नहीं माने और आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गए।
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वीरेंद्र सिंह
इस बात का जिक्र वीरेंद्र सिंह के बेटे रमनदीप आर्या ने भी सालों पहले दिए एक इंटरव्यू में किया था।
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वीरेंद्र सिंह
पिता की मौत के बाद घर में पसरे मातम पर रमनदीप ने कहा था कि उनकी मां बुरी तरह से टूट गईं थीं लेकिन उन्होंने कभी भी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी।