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'दे दे प्यार दे' के डायरेक्टर अकीव अली का इंटरव्यू, बोले- 'निर्देशकों का मजाक उड़ाना छोड़ दिया'

Wed, 15 May 2019 10:23 AM IST
shrilata biswas मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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akiv ali - फोटो : social media
हिंदी सिनेमा के जिन तकनीशियनों को भट्ट कैंप छोड़ने के बाद ही कायदे की शोहरत मिली, उनमें से एक हैं फिल्म एडीटर अकीव अली। मर्डर, वो लम्हें, काइट्स, डर्टी पिक्चर, प्यार का पंचनामा, अग्निपथ और बर्फी जैसी फिल्में एडिट करने वाले अकीव की निर्माता-निर्देशक लव रंजन से लंबी दोस्ती ने उन्हें अब फिल्म निर्देशक बना दिया है। दे दे प्यार दे उनकी पहली फिल्म है, अकीव अली से एक खास मुलाकात।
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de de pyaar de - फोटो : social media
ऋषिकेश मुखर्जी से लेकर डेविड धवन और अब आप तक, फिल्म एडीटर्स के निर्देशक बनने की एक लंबी परंपरा है। कितना फर्क आता है कुर्सी बदलने से?
एडिटिंग का अगला पड़ाव निर्देशन है, यह मैं नहीं मानता। हां,एडिटिंग करने की वजह से मुझे काफी मदद मिली है निर्देशन में। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि काम आसान हो गया। आप कितनी भी नेट प्रैक्टिस कर लो लेकिन असली काम तो मैच में ही करना पड़ता है। हां, इस फिल्म के बाद मेरे नजरिए में बहुत बदलाव आया है। निर्देशकों को लेकर मेरे सोचने का नजरिया बदल गया। पहले मैं कई निर्देशकों का मजाक उड़ाता था अब पता चला कि कितना मुश्किल काम है।
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De De Pyaar De - फोटो : social media
तो इस मुश्किल काम को आपने खुद आगे बढ़कर अपनाया या फिर कहीं और से इसकी शुरूआत हुई?
प्यार का पंचनामा के समय से मेरी और लव रंजन की ट्यूनिंग बनी। हम अक्सर नए नए प्रोजेक्ट्स को लेकर बातें करते रहते हैं। एक दिन उनका फोन आया। लव ने फोन पर कहा, ‘एक बहुत ही मजेदार कॉन्सेप्ट लेकर मैं फाइनेंसर से मिलने जा रहा हूं और मैं चाहता हूं कि यह फिल्म तुम निर्देशित करो।‘

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rakul preet singh - फोटो : file photo
फिल्म दे दे प्यार दे में तब्बू से लेकर अजय देवगन और रकुल प्रीत तक उम्र का फासला बहुत है। कैसा अनुभव रहा इस फिल्म में उनके साथ काम करने का?
अजय और तब्बू में कमाल की ऊर्जा है। जब आपका मुख्य कलाकार इतनी ऊर्जा के साथ काम करता है तो सभी को काम करने में मजा आता है। तब्बू जब स्क्रिप्ट पढ़ती थीं तो मैं हंसता रहता था। 5 मिनट के अंदर हम सीन शूट कर लेते थे। रकुल भी काफी ऊर्जा के साथ प्रोजेक्ट पर आईं। साथ ही उनमें सीखने की चाह भी काफी है। वह कठिन परिश्रम करने के लिए हरदम तैयार रहती हैं।
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kites - फोटो : social media
मेरा एक सवाल ऋतिक रोशन की काइट्स को लेकर है, क्या लगता है ये फिल्म क्यों नहीं चली? 
आपने मेरी दुखती रग पकड़ ली। ये फिल्म मेरी बेस्ट एडिटेड फिल्मों में से एक है। अब मुझे लगता है कि काइट्स की कहानी हमने कुछ ज्यादा लंबी कर दी। फिल्म में हमने स्पैनिश भाषा के तमाम सीन डाले, हो सकता है दर्शकों को वह पसंद न आया हो। इस फिल्म के फ्लॉप होने से मैं भी हक्का-बक्का रह गया था लेकिन ऐसी विफलताओं से ही हमें सबक मिलते हैं।
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ajay devgn, alok nath - फोटो : social media
अजय देवगन को हमेशा एक्शन हीरो के तौर पर ही क्यों देखा जाता है, कॉमेडी तो वह बेहतरीन करते हैं? निर्देशक के लिए उनकी एक्शन छवि तोड़ना कितना मुश्किल होता है?
अजय किसी इमेज में बंधे कलाकार नहीं हैं। वह एक उम्दा अभिनेता हैं। वह हमेशा बहुत ठंडे दिमाग से काम करते हैं। दे दे प्यार दे के किरदार के लिए हमें चाहिए भी ऐसा ही अभिनेता था। कई बार तो आपको लगेगा कि फिल्म में अजय एक्टिंग कर ही नहीं रहे हैं क्योंकि ये किरदार बहुत कुछ ठीक वैसा है जैसा अजय हकीकत में हैं।
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de de pyaar de - फोटो : social media
तो दे दे प्यार दे के बाद कोई और फिल्म भी निर्देशित करेंगे या फिर से एडिटिंग? 
फिलहाल तो निर्देशक के तौर मैंने कोई दूसरी फिल्म साइन नहीं की है। एडिटिंग मेरा जुनून है। लव रंजन की फिल्म शुरू होने वाली है, वह मुझे एडिट करनी है। फिर दे दे प्यार दे की टीम से जुड़े अंशुल की फिल्म भी एडिट करनी है। हम सब एक टीम की तरह काम करते हैं। हमारे बीच में किसी तरह का ईगो नहीं है, हम अच्छा काम करने में विश्वास रखते हैं।
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