दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
सकीना नौ-10 साल की रही होंगी, जब उन्होंने पहली बार 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' फिल्म देखी। टीवी पर वह इसे अब भी देख लेती हैं लेकिन 'डीडीएलजे' में अब कोई खास ज्यादा दिलचस्पी उन्हें है नहीं। फिल्म संवाद 'जा सिमरन जी ले अपनी जिंदगी' उन्हें अच्छे से याद है। मराठा मंदिर के पड़ोस में ही रावजी चवण रहते हैं जिन्होंने मराठा मंदिर में खूब फिल्में देखी हैं। 11-12 साल पहले 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' भी देखी लेकिन उन्हें कुछ खास पसंद नहीं आई। उनका मानना है कि 'दीवार', 'मुगल-ए-आजम', 'शोले' जैसी फिल्म अगर साल भर भी सिनेमाघर में चलती हैं तो लोग याद रखते हैं। लेकिन, 'डीडीएलजे' में लोगों को दिलचस्पी नहीं बची है।