फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाइस्कोप: बर्थडे पर रिलीज हुई मिथुन की इस फिल्म में दिखी पलायन की समस्या, बनी अपने समय का दस्तावेज

विज्ञापन
1 of 12
दाना पानी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
31 साल पहले मिथुन चक्रवर्ती के जन्मदिन के तोहफे के तौर पर रिलीज हुई फिल्म दाना पानी हिंदी सिनेमा के इतिहास का वह मील का पत्थर है जिसके बारे में कम ही लिखा गया। दाना पानी ही क्यों सत्तर, अस्सी और नब्बे के दशक के मुख्यधारा सिनेमा के बारे में उस समय के सक्रिय फिल्म समीक्षकों ने कुछ खास हिंदी में लिखा नहीं है। हिंदी सिनेमा के निर्माण और इसके सितारों पर जितनी किताबें अंग्रेजी में लिखी गई हैं, हिंदी में उनके आगे लिखी किताबें छटांक भर भी नहीं हैं।
विज्ञापन

2 of 12
मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : सोशल मीडिया
समस्या हिंदी सिनेमा की ये भी है कि ये कमाई तो हिंदी में बोलने वाले लाखों करोड़ों मध्यमवर्ग के लोगों की जेबें ढीली करके करता है, लेकिन इसका सारा काम एलीट क्लास वाली अंग्रेजी में होता है। मिथुन चक्रवर्ती इस मामले में हिंदी सिनेमा के पहले सितारे माने जाते हैं जिन्होंने आठवें दशक के मध्य में आकर हिंदी सिनेमा के इस एलीट क्लास के लिए दिक्कतें खड़ी कर दीं। जो फिल्म निर्माता और निर्देशक मिथुन को अपने दफ्तर तक में घुसने नही देते थे, वे निर्माता कुछ साल बाद उनके घर के आगे गाड़ियों में उनसे मिलने का इंतजार करते दिखते थे। मिथुन की फिल्म दाना पानी उनकी दोस्ती का नमूना है और उस जुबान का भी जिस पर जमाना अब भी एतबार करता है।
विज्ञापन

3 of 12
दाना पानी - फोटो : सोशल मीडिया
मिथुन चक्रवर्ती के नाम पर फिल्में बिकने का सिलसिला तो सुरक्षा से ही शुरू हो गया था और हम पांच व वारदात जैसी फिल्मों के जरिए मिथुन ने अपना एक अलग प्रशंसक वर्ग भी तैयार कर लिया था। मिथुन का प्रशंसक वर्ग अधिकतर वह सिनेमा दर्शक रहा जो दाना पानी की तलाश में ही बड़े शहरों में आया। ये सामाजिक और आर्थिक बदलाव का समय था। एक तरफ जहां समाज का एंग्री यंग मैन एलीट क्लास की आंखों में आंखें डालकर अपने साथ हुए हर अन्याय का बदला लेने को तैयार दिख रहा था, दूसरी तरफ एक जिम्मी भी अपनी जान जोखिम में डालकर समाज के बनाए बंधनों को तोड़ने की कोशिश में लगा था।

4 of 12
मिथुन चक्रवर्ती, अमिताभ बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया
जिम्मी का गुस्सा अपने परिवार को हर कदम पर बेइज्जत किए जाने का था। उसका संघर्ष निजी न होकर सामाजिक था और इसलिए एंग्री यंग मैन पर कई बार भारी पड़ा। ये वह हीरो था जो सेट पर खुद को सर कहे जाने के खिलाफ था। अमिताभ बच्चन के रिश्ते अपने साथी कलाकारों से इसी दौर में इसलिए खराब हुए क्योंकि वह सेट पर सर कहकर बुलाए जाने के पक्षधर थे और मिथुन को कोई सर बोले तो वह नाराज हो जाते थे, तो छोटे बड़े हर कलाकार, तकनीशियन और सेट पर काम करने वाले मजदूर ने उनको बोलना शुरू किया मिथुन दा।
विज्ञापन

5 of 12
मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : सोशल मीडिया
डिस्को डांसर से रोड साइड रोमियोज के दिल में बस चुके मिथुन चक्रवर्ती को घरों में एंट्री मिली फिल्म प्यार झुकता नहीं से। ये वो फिल्म थी जिसका जिक्र दो तीन अदालतों ने अपने फैसलों में किया और तलाक की अर्जी लगाने वालों से कहा कि पहले जाकर वो ये फिल्म देखें और तब भी बात न बनें तो वापस अदालत आएं। ये बात अदालतों की कार्यवाही में दर्ज है कि फिल्म प्यार झुकता नहीं देखने के बाद तमाम जोड़ों ने अपनी तलाक की दरख्वास्तें वापस ले ली थीं। प्यार झुकता नहीं फिल्म ने मिथुन को एक सामाजिक नायक की पहचान दी। इसी साल रिलीज हुई फिल्म प्यारी बहना ने मिथुन की इस पहचान को और पुख्ता किया। फिल्म प्यारी बहना के निर्देशक थे बापू, जिन्होंने मिथुन को हम पांच में भीमा बनाया था और बाद में फिल्म प्रेम प्रतिज्ञा में भी मिथुन का करियर चमकाया था।
विज्ञापन

6 of 12
दाना पानी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
तो इस सामाजिक नायक से जब अपने जमाने के मशहूर हास्य कलाकार देवेन वर्मा मिले तो तब तक वह बतौर प्रोड्यूसर चार फिल्में बना चुके थे और तीन फिल्में निर्देशित भी कर चुके थे। दाना पानी फिल्म को बनाने और निर्देशित करने से ठीक पहले जो फिल्म देवेन वर्मा ने बतौर प्रोड्यूसर डायरेक्टर बनाई थी, वह थी फिल्म बेशरम। अमिताभ बच्चन से सीधे देवेन वर्मा मिथुन तक आए थे। मिथुन ने भी देवेन वर्मा के इस ख्याल का ख्याल रखा और फिल्म के लिए हां कर दी। ये बात है साल 1985 की जिस साल फिल्म प्यार झुकता नहीं ने डायमंड जुबली मनाई। सिल्वर जुबली माने किसी फिल्म का एक ही सिनेमाघर में लगातार 25 हफ्ते चलना, गोल्डन जुबली माने 50 हफ्ते चलना और डायमंड जुबली माने 75 हफ्ते चलना। जी हां, 75 हफ्ते। अब तो सिनेमाघर में 50 दिन पूरे होने का भी जश्न मनाया जाता है।
विज्ञापन

7 of 12
मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : सोशल मीडिया
मिथुन ने देवेन वर्मा की शोहरत, शख्सियत और शराफत की कद्र की और फिल्म के लिए हां कर दी। ये और बात है कि फिल्म प्यार झुकता नहीं के बाद मिथुन के पास इतनी फिल्में आईं कि वह खुद नहीं समझ पाते थे कि किसकी शूटिंग पहले शुरू करें और किसकी बाद में। बताते हैं कि एक वक्त में सबसे ज्यादा फिल्में अंडर प्रोडक्शन होने का रिकॉर्ड भी मिथुन के पास ही है। ये वह समय था जब उनकी 35 फिल्में निर्माण के विभिन्न चरणों से गुजर रही थीं। किसी की कहानी पूरी की जा रही थी, किसी के संवाद लिखे जा रहे थे और किसी का संगीत तैयार हो रहा था।

8 of 12
देवेन वर्मा - फोटो : सोशल मीडिया
देवेन वर्मा का उन दिनों बड़ा नाम हुआ करता था। 1976 में फिल्म चोरी मेरा काम में फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने के बाद से उनकी गाड़ी रफ्तार पकड़ चुकी थी। ऋषिकेश मुखर्जी, बासु चटर्जी और गुलजार के वह बेहद प्रिय कलाकार थे। गुलजार की फिल्म अंगूर में तो उनके और संजीव कुमार के डबल रोल वाले किरदार एक मिसाल बन चुके हैं। इस फिल्म के लिए भी उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म रंग बिरंगी ने भी देवेन वर्मा को काफी शोहरत दिलाई थी। इसी फिल्म के बाद उन्होंने शुरू की थी फिल्म दाना पानी की तैयारी।

9 of 12
मिथुन चक्रवर्ती और पद्मिनी कोल्हापुरे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दाना पानी में फिल्म प्यार झुकता नहीं की लीड जोड़ी मिथुन चक्रवर्ती और पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ देवेन वर्मा के ससुर अशोक कुमार, सदाशिव अमरापुरकर, शफी ईनामदार, निरूपा रॉय, शरत सक्सेना और अरुणा ईरानी जैसे कलाकार भी साइन हुए। फिल्म की शूटिंग कोई तीन साल तक अलग-अलग समयों पर चलती रही। जब भी मिथुन के पास अपनी दूसरी फिल्मों के बीच से समय निकलता, वह तुरंत देवेन वर्मा को फोन करते और फिल्म के दो तीन सीन पूरे हो जाते। तारीफ करनी होगी देवेन वर्मा के धीरज और संयम की, जिन्होंने हिंदी सिनेमा के इस दौर में भी अपनी फिल्म पूरी की और उसे अच्छे से रिलीज किया।

10 of 12
दाना पानी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दाना पानी की कहानी शहरों में बड़े-बड़े सपनों के टूटने की कहानी है। खून के रिश्तों के टूटने की कहानी है और अपने सामने अपनों के बिखरते देखने की कहानी है। कुत्ती सेठ और सावित्री बाई के कत्ल के इल्जाम में जेल में अपनी फांसी का इंतजार कर रहे टैक्सी ड्राइवर सत्यप्रकाश त्रिपाठी की ये कहानी है। कहानी है कि कैसे बेरोजगारी भी भाइयों के बीच नफरत की दीवार खड़ी कर सकती है। एक कामयाब भाई जब एक बेरोजगार और गरीब भाई को दुत्कारता है तो हालात कैसे बिगड़ते हैं, इसी की कहानी कहती है देवेन वर्मा की फिल्म दाना पानी। दाना पानी को अपनी रिलीज के समय ज्यादा सिनेमाघर नहीं मिल सके थे।

11 of 12
मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म प्यार झुकता नहीं मिथुन के अलावा पद्मिनी कोल्हापुरे के लिए भी करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई थी। फिल्म प्रेम रोग और विधाता के बाद पद्मिनी के ये बड़ी हिट फिल्म थी और वह भी उन दिनों काफी व्यस्त हो चली थीं। मिथुन और पद्मिनी की एक साथ डेट ला पाना ही फिल्म की शूटिंग के लिए टेढ़ी खीर हुआ करता था लेकिन फिर भी ये फिल्म चार साल में बनी, रिलीज हुई और काफी चर्चा बटोरने में सफल रही।
विज्ञापन

12 of 12
मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म दाना पानी में मिथुन ने एक लाचार भाई का बहुत ही शानदार अभिनय किया था और पद्मिनी कोल्हापुरे ने हालात के हाथों मजबूर एक स्त्री का अपना परंपरागत अभिनय यहां भी बरकरार रखा था। सदाशिव अमरापुरकर की खलनायिकी को इसी फिल्म से हिंदी सिनेमा के दिग्गजों ने नोटिस किया। फिल्म में म्यूजिक के साथ अनु मलिक ने कई प्रयोग किए। हसरत जयपुरी के लिखे टाइटल सॉन्ग को अनूप जलोटा ने गाया और पद्मिनी कोल्हापुरे ने भी इस फिल्म के दो गानों में अपनी गायिकी का हुनर आजमाया। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।


(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)

बाइस्कोप: इस फौजी की असल प्रेम कहानी पर बनी गदर एक प्रेमकथा, बनाया ये अनोखा रिकॉर्ड
बाइस्कोप: बापू व अनिल कपूर की जोड़ी का अमर संदेश, 'सांसों से नहीं, कदमों से नहीं, मोहब्बत से....
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें